सार्वजनिक जलस्रोतों से 500 मीटर तक नए कुएं-बोरवेल पर रोक
जिलाधिकारी आशीष येरेकर ने जारी किए आदेश

भूजल दोहन पर कड़े प्रतिबंध, स्थानीय निकायों को 10 फीसदी पानी बचाने के निर्देश
अमरावती /दि.8– जिले में घटते भूजल स्तर और आगामी गर्मी में संभावित जलसंकट को देखते हुए जिलाधिकारी तथा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष आशीष येरेकर ने भूजल दोहन और पानी के उपयोग को लेकर विभिन्न प्रतिबंध लागू करने के आदेश जारी किए हैं. इसके तहत जिले के शासकीय, अर्धशासकीय, ग्राम पंचायत और नगर परिषद क्षेत्रों में स्थित सार्वजनिक पेयजल स्रोतों को संरक्षित जलस्रोत घोषित किया गया है.
आदेश के अनुसार, अधिसूचित सार्वजनिक पेयजल स्रोत से 500 मीटर की दूरी के भीतर नया कुआं अथवा बोरवेल खोदने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. इस क्षेत्र में कृषि, औद्योगिक, व्यावसायिक अथवा निजी उपयोग के लिए भी कोई नया जलस्रोत नहीं बनाया जा सकेगा.
* 30 जून 2027 तक लागू रहेंगे प्रतिबंध
जिले में इस वर्ष मानसून के दौरान बारिश में कमी दर्ज की गई है. इसके चलते कई क्षेत्रों में भूजल स्तर चिंताजनक रूप से नीचे चला गया है. आगामी गर्मी में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के नागरिकों के साथ ही पशुधन के लिए पेयजल की समस्या उत्पन्न न हो, इसके लिए महाराष्ट्र भूजल (विकास एवं प्रबंधन) अधिनियम 2009, महाराष्ट्र सिंचाई अधिनियम 1976 तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत यह आदेश जारी किया गया है. ये प्रतिबंध जिले के संपूर्ण राजस्व क्षेत्र में 30 जून 2027 तक अथवा अगले आदेश तक प्रभावी रहेंगे.
* 500 मीटर क्षेत्र में भूजल दोहन पर नियंत्रण
आदेश में कहा गया है कि मौजूदा सार्वजनिक पेयजल स्रोत के 500 मीटर के दायरे में स्थित कुओं और बोरवेल से होने वाले पानी के दोहन को पेयजल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए नियंत्रित किया जाए. इसके अलावा जिन गांवों में जलसंकट घोषित किया गया है अथवा जहां जीडब्ल्यूडीआई के अनुसार भूजल कमी सूचकांक अधिक है, ऐसे क्षेत्रों में सार्वजनिक पेयजल स्रोत से एक किलोमीटर के दायरे में सभी कुओं और बोरवेल से भूजल दोहन पर प्रतिबंध रहेगा.
* बांध और तालाबों का पानी पहले पेयजल के लिए
जिले के प्रमुख बांधों, मध्यम एवं लघु सिंचाई परियोजनाओं, तालाबों, नदियों और जलाशयों से कृषि सिंचाई अथवा व्यावसायिक उपयोग के लिए अनधिकृत रूप से पानी उठाने पर रोक लगाई गई है. आवश्यकता के अनुसार जल दोहन की अनुमति जलसंपदा विभाग द्वारा दी जाएगी. साथ ही सभी गांव तालाब, जलसंचय तालाब और स्थानीय जलस्रोतों को पेयजल के लिए आरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं. उपलब्ध जल क्षमता और वर्तमान स्थिति का आकलन कर जलस्रोतों का नियोजन करने को भी कहा गया है.
* सात उपविभागों में सख्त निगरानी
अमरावती, मोर्शी, चांदूर रेलवे, दर्यापुर, धारणी, अचलपुर तथा तिवसा-भातकुली के सभी उपविभागीय अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में आदेश का कड़ाई से पालन कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. अनधिकृत भूजल दोहन रोकने के लिए स्वतंत्र पथक गठित कर नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए हैं. इन पथकों द्वारा कुओं और बोरवेल से होने वाले पानी के उपसा पर नजर रखी जाएगी.
* अनधिकृत बोरवेल से पानी उठाने पर बिजली कनेक्शन कटेगा
महावितरण को भी इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं. अधिसूचित क्षेत्र में अनधिकृत बोरवेल अथवा कुएं से कृषि पंप के जरिए पानी उठाते हुए पाए जाने पर संबंधित पंप का बिजली कनेक्शन तत्काल काटने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा अनधिकृत कनेक्शन अथवा सीधे बिजली आपूर्ति लेकर चलाए जा रहे कृषि पंपों का भी पता लगाकर कार्रवाई की जाएगी.
* स्थानीय निकायों को 10 फीसदी पानी बचाने के निर्देश
अमरावती महानगरपालिका, नगरपालिका, नगर पंचायत, ग्राम पंचायत सहित अन्य स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं को उपलब्ध पानी का किफायती उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं. 16 अक्टूबर 2026 से पानी के उपयोग में कम से कम 10 फीसदी कटौती करने को कहा गया है. नागरिकों में पानी बचाने को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाने के साथ ही सार्वजनिक उद्यानों, बगीचों, धुलाई कार्यों और अन्य स्थानों पर उपलब्ध पानी का प्राथमिकता के आधार पर उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं.
* अनधिकृत पानी उपसा करने पर पंप, पाइपलाइन और मशीन जब्त
आदेश का उल्लंघन कर अनधिकृत रूप से पानी उठाने अथवा 500 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध कुआं या बोरवेल बनाने पर संबंधित पंप, पाइपलाइन, केबल और बोरवेल मशीन तत्काल जब्त की जाएगी. दोषियों के खिलाफ महाराष्ट्र भूजल अधिनियम 2009, महाराष्ट्र सिंचाई अधिनियम 1976, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. जिला प्रशासन ने आगामी गर्मी में संभावित जलसंकट से निपटने के लिए अभी से कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. प्रशासन ने नागरिकों से पानी का किफायती उपयोग करने और जलस्रोतों के संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है.





