अमरावती में तेजी से पनपा बैंकों का धंधा
फाइनांस कंपनी के कर्मी भी आखिर पहुंचे सराफा ही

* मामला गोल्ड लोन का
* हजारों जरुरतमंदों की सांस सांसत में
* अमरावती में कितने किलो सोना गिरवी – किश्त चार
अमरावती/दि.18 – केवल कम ब्याज की दरों का प्रलोभन देकर वित्तीय संस्था और बैंकों ने अमरावती के निजी साहूकारों के गोल्ड लोन धंधे को हथियाने का प्रयास किया. कुछ प्रमाण में यह संस्थाएं, कंपनियां, बैंक सफल भी रहे. किंतु आज भी सराफा मार्केट पर अपने सोने के जेवर सुरक्षित रहने का विश्वास अधिक होने का दावा सराफा कारोबारी कर रहे हैं. जबकि बैंकों और निजी फाईनांस कंपनियों के घपले आए दिन उजागर हो रहे हैं. अमरावती मंडल ने साहूकारों के साथ-साथ कर्जदारों से भी इस विषय में चर्चा की. जानकारों ने कितने किलो सोना गिरवी इसका अलग-अलग अंदाज बताया. मोटे तौर पर यही बात सामने आई कि, सराफा मार्केट में ही करोडों का सोना रेहन रखकर रकम उठाई गई है. कर्जदारों की संख्या जहां हजारों में है, वहीं उन्हें समय पर और पूरी सलामती से उनकी चीज लौटाने भी निजी साहूकारों की तत्पर एवं पारदर्शी प्रक्रिया रही है. ऐसे में सूत्रों की मानें तो वित्तीय कंपनी का चर्चित शख्स भी सराफा और स्वर्णकारों के पास ही गोल्ड लोन के लिए पहुंचा था. समाचार में दावा किया गया कि, एक प्रमुख व्यापारी सहित 3-4 सुनारों से संपर्क किया गया और कई किलो गोल्ड रेहन अर्थात गहान रखकर बडी मात्रा में रकम उठाई गई है. इसके पीछे भी सुरक्षा की वहीं भावना रही कि, सराफा में गोल्ड लोन महफूज रहता है.
* ट्रांसफर व्यवहार
निजी साहूकारों ने चर्चा में स्वीकार किया कि, लाईसेंसधारी साहूकार भी अपनी रकम पूरी तरह निवेश हो जाने के बाद ग्राहक का सोना अन्यत्र रेहन अर्थात गिरवी रखकर उसे रकम लाकर देते हैं. इसे ट्रांसफर व्यवहार कहते हैं. वर्षों से यह व्यवहार स्थानीय सराफा में चल रहा है. जिसके कारण व्यापारियों का आपस में विश्वास भी बना हुआ है. कतिपय प्रकरणों को छोड दें, तो रेहन आभूषण या गोल्ड रकम और ब्याज के भुगतान पश्चात मिनटों में लौटा दिया जाता है. इस तरह से व्यवहार दशकों से चले आ रहे है.
* कंपनियों ने दिया धोखा
अमरावती में निजी कंपनियों और बैंकों द्वारा वक्त जरुरत सोना रखकर पैसे लेने वाले कई लोगों को धोखा मिला है. कंपनियों के अधिकारी और कर्मचारियों ने ग्राहकों के साथ फ्रॉड किया है. ताजा चर्चित प्रकरण में 7 किलो अर्थात 10 करोड से अधिक मूल्य के सोने की हेराफेरी का आरोप किया जा रहा है. उसी प्रकार इससे पूर्व एक नैशनलाइज बैंक में भी तीन किलो से अधिक सोना ग्राहकों फंस गया था. वहां भी कर्मचारी ने हाथ बताया था. तीन वर्षों से यह प्रकरण चल रहा है. अभी तक लोगों को उनका सोना हाथ नहीं लगा है. वे बस प्रतीक्षा कर रहे हैं. उन्हें अपने कीमती आभूषण कब सही-सलामत मिलेंगे अथवा उसके बदले में सोना मिलेगा, इसकी भी गारंटी अब तक नहीं है.
* सराफा सबसे महफूज
तुलना में सराफा के सदस्यों अथवा मार्केट के दुकानदारों से किए गए व्यवहार अधिक सफल रहे हैं. इक्का-दुक्का घटनाएं छोड दें, तो लगभग सभी व्यवहारों में भुगतान के दिन ही उनके रेहन आभूषण लौटा दिए जाते हैं. आज भी सराफा कारोबारियों पर ग्राहकों का विश्वास कायम है, बल्कि गोल्ड लोन के मामले में अधिकांश लोग सराफा पर भरोसा करते हैं. सराफा भी बदलते दौर में गहान के व्यवहार पर काफी कुछ निर्भर है. नए माल की खरीदी-विक्री बढे बेतहाशा दामों के कारण सीमित हो जाने के बीच रेहन व्यवहार ने सराफा को गतिमान रखा है. (अगले अंक में जारी)