राष्ट्रसंत को भारतरत्न देने कृति समिति का समस्त जिले में अभियान
बीजेपी नेताओं को दिए निवेदन

* आगामी गणतंत्र दिवस पर घोषित करें सम्मान
अमरावती /दि.28– राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज को भारतरत्न दिए जाने की मांग हेतु गुरुदेव भक्त संगठित होकर संपूर्ण जिले में मुहिम चला रहे हैं. अध्ययन कर विस्तृत निवेदन बनाया गया है. कृति समिति ने जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देकर आगामी गणतंत्र दिवस अर्थात 26 जनवरी तक इस बारे में घोषणा किए जाने की मांग रखी है. गत शनिवार भाजपा नेताओं का गुरुकुंज मोझरी में जमावडा रहा. भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण पहुंचे थे. ऐसे में कृति समिति ने मौका साधकर सांसद डॉ. अनिल बोंडे, विधायक प्रवीण पोटे पाटिल, विधायक प्रताप दादा अडसड, विधायक प्रवीण तायडे को निवेदन सौंपे.
उल्लेखनीय है कि, पिछले माह 6 गुरुदेव भक्तों ने बेमियादी अनशन किया था. उस समय भी गुरुदेव अनुयायियों का अनशन आंदोलन नेताओं ने वादे कर स्थगित करवाया था. गुरुदेव भक्तों की राष्ट्रसंत को भारतरत्न सम्मान दिए जाने की एकमात्र डिमांड है. चर्चा थी कि, इस महत्वपूर्ण मांग के संदर्भ में भाजपा विधायक राजेश वानखडे ने आनन-फानन में दिल्ली जाकर देश के गृह मंत्री अमित शाह से भेंट की है. बता दें कि, आगामी दशहरा के पहले 18 अक्तूबर को राष्ट्रसंत की पुण्यतिथि है. जिससे कृति समिति ने अगले कुछ माह अभियान समस्त जिले में जारी रखने का निर्णय किया है. उनमें संयोजक मुकुंद पुनसे, विलास महाराज साबले, प्रल्हाद पारिसे गुरुजी, जय कुमार बोके, धीरज केने, सेवानिवृत्त अधीक्षक अभियंता रमेश ढवले, पूर्व एसडीपीओ विनोद शिरभाते, ग्रामगीताचार्य प्रा. नरेंद्र राऊत, भजन रत्न नितिन कुबडे, भजन प्रमुख पुरुषोत्तम खोडे, ग्रामगीताचार्य राज कुमार बोके, कृति समिति सचिव और नगरसेवक अमर वानखडे, अशोक माहोरे, अभिजीत निमकर, सौरभ कोहले, सतीश फाले, राजेंद्र बीजागरे, हैबतराव गाडगे, नरेश भोयर, संजय ठाकरे, सुधीर लवणकर, उमेश पारिसे सहित अनेक मान्यवरों का समावेश है.
* 1942 के आंदोलन में जगाई अलख
राष्ट्रसंत का केवल वैचारिक योगदान नहीं है, तो आपने खंजिरी लेकर गांव-गांव 1942 के भारत छोडो आंदोलन के समय अलख जगाई. लोगों को स्वाधीनता संग्राम से जुडने प्रेरित किया. देहाती भागों में जागरुकता के लिए सघन दौरा किया. यहां तक कि, गुरुदेव जेल भी गए. ब्रिटिश सरकार ने गुरुदेव को राजबंदी के रुप में नागपुर मध्यवर्ती कारागार में स्थानबद्ध किया था. स्वाधीनता आंदोलन में कारावास भोगनेवाले संत के रुप में तुकडोजी महाराज का अनन्य साधारण स्थान है.





