चिखलदरा में पर्यटकों की रिकॉर्ड भीड़, लेकिन सुविधाएं बदहाल
जुलाई में एक लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे, महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी

* पुलिस व्यवस्था चुस्त, नगर परिषद सुस्त, एक महीने में 20 लाख की वसूली के बावजूद 4 में से 3 सार्वजनिक शौचालय बंद
चिखलदरा/दि.31– विदर्भ का कश्मीर कहे जाने वाले चिखलदरा में इस वर्ष मानसून पर्यटन अपने चरम पर है. जुलाई माह में ही एक लाख से अधिक पर्यटक यहां पहुंचे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिली और नगर परिषद के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई. लेकिन दूसरी ओर पर्यटकों की मूलभूत सुविधाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. लाखों रुपये का राजस्व जुटाने के बावजूद सार्वजनिक सुविधाओं के अभाव ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
समुद्र तल से लगभग 3600 फीट की ऊंचाई पर स्थित चिखलदरा अपनी हरियाली, घाटियों, झरनों और बादलों के बीच लिपटी प्राकृतिक सुंदरता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. बारिश के मौसम में यहां पर्यटकों का सैलाब उमड़ता है. जुलाई माह के दौरान धामणगांव गढ़ी स्थित वन विभाग के प्रवेश नाके से होकर लगभग 18 हजार छोटी-बड़ी गाड़ियां चिखलदरा पहुंचीं. नगर परिषद द्वारा प्रवेश शुल्क और अन्य मदों से करीब 20 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है.
* राजस्व बढ़ा, लेकिन सुविधाएं नहीं
पर्यटकों का आरोप है कि नगर परिषद द्वारा शुल्क तो नियमित रूप से वसूला जा रहा है, लेकिन बदले में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं. सबसे गंभीर स्थिति सार्वजनिक शौचालयों की है. करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित चार सार्वजनिक शौचालयों में से तीन वर्तमान में बंद पड़े हैं. परिणामस्वरूप विशेषकर महिला पर्यटकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं दिखाई दे रही. कई स्थानों पर कचरा जमा होने और नियमित सफाई नहीं होने की शिकायतें सामने आई हैं. ऐसे में पर्यटक सवाल उठा रहे हैं कि जब नगर परिषद को लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है तो सुविधाओं की यह स्थिति क्यों बनी हुई है.
* पुलिस का नियोजन सराहनीय, नगर परिषद पर सवाल
पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पुलिस विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है. पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में यातायात और सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत व्यवस्थित दिखाई दे रही है. वहीं नगर परिषद का प्रशासनिक प्रबंधन कमजोर नजर आ रहा है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रभारी मुख्याधिकारी के अधीन कामकाज होने और कर्मचारियों की कमी का असर सीधे पर्यटन प्रबंधन पर दिखाई दे रहा है. नगर परिषद के उपाध्यक्ष प्रमोद नाईक ने भी कर्मचारियों की कमी और प्रभारी प्रशासनिक व्यवस्था को प्रमुख कारण बताते हुए एक सप्ताह के भीतर सुधार का आश्वासन दिया है.
* करोड़ों की परियोजनाएं, लेकिन उपयोगिता पर सवाल
पूर्व विधायक राजकुमार पटेल के प्रयासों से पर्यटकों की सुविधा के लिए लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न स्थानों पर सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया गया था. लेकिन आज इनमें से अधिकांश सुविधाएं बंद या जर्जर अवस्था में हैं. इससे यह प्रश्न उठ रहा है कि केवल विकास कार्यों के लिए निधि उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके रखरखाव और प्रभावी संचालन की भी समान रूप से आवश्यकता है. स्थानीय नागरिकों और पर्यटन व्यवसायियों का मानना है कि योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी की कमी के कारण करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं.
* पर्यटन क्षेत्र में कई बुनियादी कमियां
चिखलदरा में वर्तमान समय में कई महत्वपूर्ण समस्याएं सामने आ रही हैं, जिसमें प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था का अभाव, कई स्थानों पर पेयजल सुविधा उपलब्ध नहीं, पर्यटकों के बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं, करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित कई सोलर लाइटें बंद, सुव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था का अभाव, पर्यटक सूचना केंद्र नहीं, प्रशिक्षित गाइडों की व्यवस्था नहीं, वृक्ष कटाई और अतिक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं, सार्वजनिक संपत्तियों की तोड़फोड़ और चोरी पर कार्रवाई का अभाव, बच्चों और परिवारों के लिए आकर्षक उद्यानों की कमी शामिल है.
* व्यापारियों में भी नाराजगी
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि चिखलदरा में पर्यटकों की संख्या तो लगातार बढ़ रही है, लेकिन पर्यटन सुविधाओं का विकास उस अनुपात में नहीं हुआ. परिणामस्वरूप अधिकांश पर्यटक केवल एक दिन का भ्रमण कर लौट जाते हैं. इससे होटल, रेस्टोरेंट, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य व्यवसायों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है.
* अगस्त में और बढ़ेगी भीड़
मानसून पर्यटन का चरम अगस्त माह में माना जाता है. ऐसे में आगामी दिनों में पर्यटकों की संख्या और बढ़ने की संभावना है. यदि नगर परिषद ने समय रहते बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त नहीं किया, तो पर्यटन स्थल की छवि प्रभावित हो सकती है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चिखलदरा को केवल प्राकृतिक सौंदर्य के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. पर्यटन विकास के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी नियोजन, नियमित रखरखाव और जवाबदेह प्रशासन की आवश्यकता है. तभी विदर्भ के इस एकमात्र प्रमुख हिल स्टेशन की पहचान और प्रतिष्ठा को लंबे समय तक कायम रखा जा सकेगा.





