कोचिंग क्लासेस पर प्रतिबंध लगाया जाए
नीट पेपर लीक प्रकरण

* पूर्व सांसद अनंत गुढे की केंद्रीय शिक्षा विभाग से मांग
अमरावती/दि.19 – मेडिकल प्रवेश पूर्व परीक्षा का पेपर लीक होने के कारण केंद्र सरकार को परीक्षा रद्द करने की नामुष्की झेलनी पड़ी. इस मामले में कई अधिकारियों और कोचिंग क्लास संचालकों को सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किया गया है. इस पूरी घटना से विद्यार्थियों और अभिभावकों को भारी मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं कुछ विद्यार्थियों ने आत्महत्या जैसा कदम भी उठाया है. पूर्व सांसद अनंत गुढे ने इस पूरे प्रकरण के लिए तीन व्यवस्थाओं को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, मान्यता प्राप्त महाविद्यालय और निजी कोचिंग क्लासेस इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं.
गुढे ने मांग की कि उच्च शिक्षा से जुड़े सभी निजी कोचिंग क्लासेस पर केंद्र सरकार को प्रतिबंध लगाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इन कोचिंग संस्थानों पर किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं है. इनके लिए कोई ठोस नियम, लाइसेंस व्यवस्था या सरकारी निगरानी नहीं होने के कारण कोचिंग व्यवसाय तेजी से बढ़ता जा रहा है. भारी फीस वसूलकर विद्यार्थियों और अभिभावकों का आर्थिक व मानसिक शोषण किया जा रहा है. उन्होंने मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों को भी उतना ही जिम्मेदार बताया. गुढे के अनुसार कई कॉलेज शिक्षक विद्यार्थियों और अभिभावकों पर निजी कोचिंग लेने का दबाव डालते हैं. कई बार ये कोचिंग संस्थान उनके रिश्तेदारों या परिचितों के होते हैं.
उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं पहली बार नहीं हुई हैं. इससे पहले भी मेडिकल प्रवेश परीक्षा, महाराष्ट्र लोकसेवा सहित कई अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. गुढे ने आरोप लगाया कि कोचिंग क्लास संचालक अपने संस्थानों का नाम बड़ा करने के लिए किसी भी हद तक जाते हैं. उन्होंने दावा किया कि कोचिंग उद्योग का कारोबार अब 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक का हो गया है और इसमें सत्ता से जुड़े लोगों की भी भागीदारी है. उन्होंने कहा कि कोचिंग क्लासेस बंद कर 11वीं और 12वीं के शिक्षकों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाए, तभी विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा.





