बागी विधायकों को कोर्ट कर सकती है अपात्र

उबाठा शिवसेना के वकील का सुको में दावा

* पार्टी पर कब्जे संबंधी याचिका पर युक्तिवाद
* चुनाव आयोग का बडा आधार नष्ट करने का अनुरोध
* शिंदे ग्रुप को क्या लगेगा तगडा झटका?
* स्पीकर के निर्णय कई बार बदले हैं अदालतों ने
मुंबई/दि.20- शिवसेना में विभाजन के बाद एकनाथ शिंदे का साथ देनेवाले विधायकों को न्यायालय विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका में जाकर अयोग्य ठहरा सकता हैं क्या? यह प्रश्न सर्वोच्च न्यायालय ने शिवसेना किसकी? संबंधित याचिका पर सुनवाई दौरान पूछा था. उस पर उबाठा शिवसेना के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने आज बडा युक्तिवाद किया. समाचार है कि, उबाठा सेना ने न्यायालय से बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग रखी. एड. कामत ने तर्क दिया कि, विधायकों को अयोग्य ठहराने का अधिकार केवल स्पीकर का न होकर कोर्ट भी कुछ प्रकरणों में विधायकों को अयोग्य ठहरा सकते हैं.
शिवसेना के पक्ष और चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान उद्धव ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने दलीलें रखीं. अब मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2026 को होगी, जिसमें एकनाथ शिंदे गुट की ओर से वकील अपना पक्ष रखेंगे.
देवदत्त कामत ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि यह स्पष्ट किया जाए कि शिंदे गुट के विधायकों ने दलबदल किया था या नहीं. उन्होंने कहा कि यदि दलबदल साबित होता है तो चुनाव आयोग द्वारा शिंदे गुट को चुनाव चिह्न देने का एक प्रमुख आधार ही खत्म हो जाएगा. कामत ने दलील दी कि दलबदल के कथित लाभ का असर आज भी जारी है, क्योंकि शिंदे गुट के पास शिवसेना का चुनाव चिह्न है. उन्होंने कहा कि अदालत इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय ले सकती है.
* सुको को निर्णय बदलने का अधिकार
एड. कामत ने अदालत के कई निर्णयों का भी इस समय उल्लेख किया. उन्होंने कोर्ट के सामने कहा कि, विधानसभा अध्यक्ष ने इस महत्वपूर्ण विषय को ठीक से हेंडल नहीं किया. विधायकों ने मूल पक्ष से अलग होने का निर्णय किया था. जिससे यह सभी विधायक अयोग्य ठहराए जाने चाहिए थे, इस प्रकार का तर्क एड. देवदत्त कामत ने दिया. उन्होंने चुनाव आयोग और स्पीकर द्वारा दिए गए फैसलों के अदालत में पलट जाने के अनेक उदाहरण होने का दावा किया.
चुनाव आयोग ने विधान मंडल में बहुमत के आधार पर एकनाथ शिंदे गट को पार्टी और चुनाव निशानी दी. किंतु दलबदल कानून अंतर्गत सभी विधायक अयोग्य ठहराए जा सकते हैं. जबकि उन्होंने पार्टी का त्याग करने के बावजूद वे अपात्र नहीं माने गए और चुनाव निशानी के आधार पर सभी लाभ प्राप्त कर रहे हैं. उन्हें चुनाव निशानी सिर्फ विधान मंडल के बहुमत के आधार पर मिली थी. एड. देवदत्त कामत ने दलील दी कि, उन्होंने पार्टी छोडी है, यह सिद्ध हो जाए तो कोर्ट आज ही उन विधायकों को अयोग्य घोषित कर सकता है. जिसके बाद चुनाव आयोग के निर्णय का आधार नष्ट होने का दावा एड. कामत ने किया. उन्होंने कहा कि, दलबदल कानून के प्रावधानों के लाभ पहले भी लिए गए थे. एड. कामत ने कानूनन निष्कर्ष यही होने का दावा किया और कहा कि, उसी दिन से संबंधित सदस्य अपनी सदस्यता खो देते हैं, जब वे पार्टी का त्याग करते हैं. न्यायालय को इस प्रकार के अधिकार होने और भूतकाल में उन अधिकारों के उपयोग का दावा भी एड. कामत ने किया. बता दें कि, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली खंडपीठ केस की सुनवाई कर रही हैं. जिसमें न्या. मोहना और न्या. नागरत्ना भी है.
एड. कामत ने कहा कि, सुभाष देसाई प्रकरण में भी हमने ऐसी ही मांग रखी थी. विधानसभा अध्यक्ष पर हमारा विश्वास नहीं होने से अब कोर्ट को ही फैसला करना है. यही हमारी डिमांड है. उन्होंने दलील दी कि, विधानसभा अध्यक्ष ने फैसला देते समय काफी समय लिया. उस समय भी सर्वोच्च न्यायालय का दो बार द्वार खटखटाना पडा था, तब जाकर जनवरी 2024 में निर्णय दिया गया था. अब कोर्ट योग्य आदेश इस संबंध में देने की संभावना बताई जा रही है.

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