बाल-माता मृत्यु के मुद्दे पर स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय जांच की मांग

सरकारी दवाओं का भंडार जब्त होने के मामले की भी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग

अमरावती /दि. 25 – जिले में बाल मृत्यु और मातृ मृत्यु का मुद्दा गंभीर बना हुआ है. इस संबंध में न्यायालयीन स्तर पर जनहित याचिका भी चल रही है. ऐसे में जिला परिषद स्वास्थ्य विभाग के कामकाज को लेकर सामने आ रही घटनाओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. स्वास्थ्य विभाग के भंडार विभाग में छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए निर्धारित दवाओं का भंडार पाए जाने तथा बाद में संबंधित यंत्रणा द्वारा उसे जब्त किए जाने के मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है.
इस संबंध में शिकायतकर्ता समीर जवंजाल ने कहा कि अमरावती जिले में मातृ एवं बाल स्वास्थ्य की स्थिति पहले से ही गंभीर है. ऐसे में सरकारी दवाओं का भंडार कहां, किसके आदेश पर और किस उद्देश्य से रखा गया था, इसकी जांच आवश्यक है. साथ ही जब्त की गई दवाओं की अवधि, उन्हें किस स्वास्थ्य केंद्र के लिए आवंटित किया गया था तथा उनके वितरण और स्टॉक से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच की जानी चाहिए.
* मेलघाट में बाल-मातृ मृत्यु का मुद्दा भी न्यायालय के समक्ष
मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ के समक्ष चल रही जनहित याचिका में अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र में बाल मृत्यु, मृतजन्म और मातृ मृत्यु के मुद्दे भी उठाए गए हैं. न्यायालयीन कार्यवाही में स्वास्थ्य सेवाओं, औषधोपचार, पोषण और चिकित्सा सुविधाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दे सामने आए हैं. ऐसे में यदि स्वास्थ्य विभाग के कामकाज में लापरवाही, अनियमितता अथवा सरकारी दवाओं के प्रबंधन में गंभीर त्रुटियां सामने आती हैं, तो केवल विभागीय जांच तक सीमित न रहते हुए जिम्मेदारी निश्चित की जानी चाहिए. संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए.
* सीईओ और जिला स्वास्थ्य अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने की मांग
समीर जवंजाल ने पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. साथ ही जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और जिला स्वास्थ्य अधिकारी की प्रशासनिक जिम्मेदारी की भी जांच करने की मांग की गई है. उन्होंने कहा कि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा कर्तव्य में कसूर साबित होता है, तो संबंधित सेवा नियमों तथा लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए. बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी दवाओं के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए. प्रशासन को पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लानी चाहिए.

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