एमपीएससी औषधि निरीक्षक पेपर लीक मामले में चार और गिरफ्तार

सांगोला, बुलढाणा और नवी मुंबई में एसआईटी की कार्रवाई

* दो परीक्षार्थी और दो कथित मध्यस्थ हिरासत में, गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 11
मुंबई /दि.25- महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की अन्न एवं औषधि प्रशासन के औषधि निरीक्षक (ग्रुप-बी) पद की परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है. एसआईटी ने सांगोला, बुलढाणा और नवी मुंबई में कार्रवाई की. पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में दो परीक्षार्थी और दो कथित मध्यस्थ शामिल हैं. इन गिरफ्तारियों के बाद मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 11 हो गई है.
* सांगोला और बुलढाणा से दो परीक्षार्थी गिरफ्तार
पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान पेपर लीक मामले के तार सांगोला और बुलढाणा तक पहुंचने की जानकारी सामने आई. इसके आधार पर साजिद संदे को सोलापुर जिले के सांगोला और विजय किंगर को बुलढाणा से गिरफ्तार किया गया. पुलिस का दावा है कि दोनों ने परीक्षा से पहले कथित तौर पर लीक हुआ प्रश्नपत्र हासिल किया था. उनके साथ हुए संभावित आर्थिक लेन-देन की भी जांच की जा रही है.
* नवी मुंबई से दो कथित मध्यस्थ पकड़े
संदीप खलाटे और भैरवनाथ कदम को नवी मुंबई से गिरफ्तार किया गया. अपराध शाखा के अनुसार, दोनों पर मंत्रालयीन अधिकारियों, कथित रैकेट से जुड़े लोगों और परीक्षार्थियों के बीच संपर्क तथा आर्थिक लेन-देन में मध्यस्थता करने का संदेह है. पुलिस इन आरोपों से जुड़े साक्ष्य जुटा रही है.
* गोपनीय व्यवस्था से प्रश्नपत्र बाहर निकलने का संदेह
एमपीएससी ने औषधि निरीक्षक के 154 रिक्त पदों के लिए 22 मार्च 2026 को राज्य के छह प्रमुख केंद्रों पर चाळणी परीक्षा आयोजित की थी. अपराध शाखा की प्रारंभिक जांच के अनुसार, परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र गोपनीय व्यवस्था से बाहर निकलने और कुछ परीक्षार्थियों तक पहुंचने का संदेह है. पुलिस इस कथित प्रक्रिया और इसके पीछे हुए संभावित आर्थिक लेन-देन की जांच कर रही है.
* सात आरोपी पहले ही गिरफ्तार
मामले में अपराध शाखा पहले ही सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इनमें अभिजीत लेंडवे (अवर सचिव), विश्वेश्वर नकाते (गोपनीय कक्ष के सहायक कक्ष अधिकारी), गोपाल मराठे (सहायक कक्ष अधिकारी), प्रवीण पाटील (कौटिल्य अकादमी के संचालक), अमृत पाटील (कथित मध्यस्थ), लोकेश उर्फ गौरव पाटील (कथित मध्यस्थ) और ऋतुजा पाटील (परीक्षार्थी) शामिल हैं. पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों से पूछताछ के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्यों और कथित व्हॉट्सऐप चैट के आधार पर आगे की जांच की गई. इन्हीं जांच कड़ियों के आधार पर नए आरोपियों तक पहुंचने का दावा पुलिस ने किया है.
* अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ महाराष्ट्र प्रतियोगी परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है. अपराध शाखा अब यह पता लगा रही है कि आयोग के अन्य कर्मचारी, निजी प्रतियोगी परीक्षा संस्थानों से जुड़े लोग अथवा अन्य व्यक्ति इस मामले से जुड़े हैं या नहीं. साथ ही अन्य परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों से संबंधित किसी संभावित अनियमितता की भी जांच की जा रही है

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