मनपा को 129 करोड रूपए मिलने के बावजूद शहर में विकास काम ठप्प

कचरे की समस्या में उलझी महानगरपालिका, वार्ड विकास निधि नहीं मिलने से पार्षदों में नाराजगी

* शहर के कई रिहायशी क्षेत्रों में छोटे पुल, सड़कें, नाले और उद्यानों के काम अटके
* प्रशासन का तर्क- जिस उद्देश्य के लिए मिला है अनुदान, उसी पर होगा खर्च
अमरावती/ दि. 19 – अमरावती महानगरपालिका को पिछले कुछ महीनों में विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत लगभग 129 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है, लेकिन इसके बावजूद शहर में विकास कार्यों की गति थमी हुई है. नागरिकों की अपेक्षाओं के विपरीत सड़क, नाले, छोटे पुल, उद्यान, पथदीप और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े अनेक कार्य आज भी अधूरे पड़े हैं. शहर में विकास की चर्चा गौण हो चुकी है और पूरा प्रशासनिक व राजनीतिक विमर्श फिलहाल केवल कचरा प्रबंधन के मुद्दे तक सीमित दिखाई दे रहा है. महानगरपालिका चुनाव के बाद नागरिकों को उम्मीद थी कि वर्षों से लंबित छोटे-बड़े विकास कार्यों को नई गति मिलेगी, लेकिन हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं. कई प्रभागों में पेवर ब्लॉक लगाने का काम शुरू नहीं हो पाया है, आंतरिक सड़कों का कंक्रीटीकरण अधूरा है, नालों का निर्माण रुका हुआ है तथा नागरिक सुविधाओं से जुड़े अनेक प्रस्ताव फाइलों में ही कैद हैं.
* सात वर्षों से लंबित हैं अनेक आवश्यक कार्य
शहर के कई हिस्सों में छोटे नालों पर पुलों का निर्माण वर्षों से अधूरा पड़ा है. आवारा पशुओं की समस्या लगातार बढ़ रही है, जबकि श्वानों के नसबंदी अभियान पर भी विराम लगा हुआ है. अनेक क्षेत्रों में पथदीप खराब पड़े हैं, उद्यानों की हालत खराब है और समाज मंदिरों के निर्माण कार्य अधूरे हैं. नए विकसित हो रहे इलाकों में तो नियमित कचरा संग्रहण की व्यवस्था भी नहीं है. कई स्थानों पर घंटागाड़ी एक-दो सप्ताह में एक बार ही पहुंच रही है, जिससे नागरिकों में असंतोष बढ़ रहा है.
* पार्षदों ने मांगे 10 करोड़, प्रशासन ने दिखाई असमर्थता
विकास कार्यों को गति देने के लिए महापौर श्रीचंद तेजवानी, उपमहापौर, विभिन्न दलों के नेता तथा स्थायी समिति पदाधिकारियों ने हाल ही में मनपा आयुक्त वर्षा लड्डा से मुलाकात कर वार्ड विकास कार्यों के लिए 10 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की मांग की थी. पार्षदों का कहना है कि उन्हें विकास निधि और स्वेच्छा निधि पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रही है, जिसके कारण वे अपने क्षेत्रों की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे हैं. भाजपा पार्षद व सभागृह नेता चेतन गावंडे ने भी पार्षदों को विकास कार्यों के लिए निधि उपलब्ध कराने की मांग का समर्थन किया है. उनका कहना है कि नागरिकों ने विकास की अपेक्षा से पार्षदों को चुना है और उन्हें अपने वार्डों में काम करने के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराना आवश्यक है.
* 15वें वित्त आयोग के निधि को लेकर विवाद
विवाद का मुख्य कारण 15वें वित्त आयोग से प्राप्त निधि का उपयोग है. मनपा प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि इस निधि का उपयोग केवल कचरा प्रबंधन, स्वच्छता, जलापूर्ति तथा अन्य मूलभूत सेवाओं के लिए ही किया जा सकता है. इससे अन्य विकास कार्यों पर खर्च करना नियमों के विरुद्ध होगा. स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर के अनुसार मनपा को पहले लगभग 31 करोड़ रुपये के ओवरड्राफ्ट का समायोजन करना है. कुछ समय पहले कर्मचारियों के वेतन और सफाई व्यवस्था के खर्च के लिए बैंक से ओवरड्राफ्ट लेना पड़ा था. ऐसे में उपलब्ध निधि को अन्य मदों में खर्च करना संभव नहीं है.
* 129 करोड़ की राशि किन योजनाओं के लिए मिली?
महानगरपालिका को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त निधि के तहत शहरी नवीनीकरण योजना में 20 करोड़ रुपये, बालासाहेब ठाकरे शहरी दवाखाना योजना में 5 करोड़ रुपये, 15वां वित्त आयोग निधि में 15.84 करोड़ रुपये व अन्य आवश्यक योजनाओं में 88.20 करोड़ रुपये, ऐसे लगभग 129 करोड़ रुपये की निधि प्राप्त हुई है. प्रशासन का कहना है कि प्रत्येक योजना की निधि निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही खर्च की जा सकती है और नियमों का उल्लंघन कर किसी अन्य कार्य पर राशि खर्च नहीं की जा सकती.
* कचरे की राजनीति में दब गए विकास के मुद्दे
विशेष उल्लेखनीय है कि शहर में इन दिनों कचरा प्रबंधन सबसे बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बना हुआ है. विभिन्न जनप्रतिनिधि और पार्षद इस विषय को लेकर आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं. लेकिन नागरिकों का कहना है कि शहर की समस्याएं केवल कचरे तक सीमित नहीं हैं. खराब सड़कें, अधूरे नाले, जर्जर पुल, बंद पड़ी उद्यान सुविधाएं और आवारा पशुओं की समस्या भी उतनी ही गंभीर है. नागरिकों का मानना है कि मनपा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को कचरा प्रबंधन के साथ-साथ शहर के समग्र विकास पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए. यदि जल्द ही विकास कार्यों को गति नहीं मिली तो नागरिकों में असंतोष और बढ़ सकता है.
* नागरिकों की उम्मीद, अब जमीन पर दिखे विकास
शहरवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये की निधि मिलने के बावजूद यदि विकास कार्य आगे नहीं बढ़ते, तो यह चिंता का विषय है. चुनाव के बाद नागरिकों को विकास की नई उम्मीद जगी थी, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए लोगों की निगाहें अब मनपा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं. शहर के विकास की रफ्तार कब बढ़ेगी और वार्ड स्तर पर लंबित कार्यों को कब मंजूरी मिलेगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा. फिलहाल अमरावती में 129 करोड़ रुपये की निधि से अधिक चर्चा विकास कार्यों के ठप पड़ने की हो रही है.

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