जन्मभर मुर्गी तक नहीं पाली, लेकिन कागजों में बेच दी गाय!

विदर्भ की योजना में करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा

वर्धा /दि.7– विदर्भ में पशुसंवर्धन विभाग की विशेष घटक योजना में कथित बड़े घोटाले का मामला सामने आया है. आरोप है कि कोरोना लॉकडाउन के दौरान, जब पशु बाजार बंद थे, तब भी कागजों पर गायों की खरीद-फरोख्त दिखाकर सरकारी पैसा निकाला गया. अब कई किसानों ने दावा किया है कि उन्होंने कभी गाय बेची ही नहीं, बल्कि उनके नाम का दुरुपयोग कर भुगतान उठा लिया गया.
जानकारी के मुताबिक वर्धा जिले के शांतिनगर निवासी पुरुषोत्तम महादेव थूल के नाम पर 24 मार्च 2020 को 40 हजार रुपये में गाय बेचने का रिकॉर्ड तैयार किया गया. जबकि थूल का कहना है कि उन्होंने आज तक एक मुर्गी तक नहीं पाली, फिर गाय बेचने का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस बोरगांव धांदे कृषि उपज मंडी में गाय बेचने का उल्लेख दस्तावेजों में किया गया है, वहां वे कभी गए ही नहीं. पुरुषोत्तम थूल ने आरोप लगाया कि उनके नाम का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और सरकारी योजना की राशि का गबन किया गया. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जरूरत पड़ने पर गवाही देने की भी बात कही है.
इसी तरह का मामला यवतमाल जिले के रालेगांव तहसील के झाडगांव निवासी गजानन ब्राह्मणवाडे के साथ भी सामने आया है. दस्तावेजों में उनके नाम पर 40 हजार रुपये में गाय बेचने का उल्लेख है, जबकि गजानन ब्राह्मणवाडे और उनके पिता सुरेश ब्राह्मणवाडे ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने कभी किसी गाय की बिक्री नहीं की और न ही संबंधित बाजार समिति में गए. रिपोर्ट के अनुसार, विदर्भ के कई किसानों के नाम का कथित रूप से इसी तरह इस्तेमाल किया गया है. ऐसे में पूरे प्रकरण, विशेषकर कोरोना काल के दौरान हुई कथित खरीद-बिक्री और भुगतान की व्यापक जांच की मांग तेज हो गई है. यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह गरीब किसानों के लिए चलाई गई सरकारी योजना में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार का मामला साबित हो सकता है.

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