सीसीएमपी के विरोध में डॉक्टर्स सडक पर
जमकर लगाए नारे, सैकडों चिकित्सकों की एक स्वर में मांग

* लगातार तीसरे दिन अमरावती जिले के एक हजार निजी अस्पताल बंद
* सैकडों सर्जरी टली, मरीज हलकान-परेशान
* हाईकोर्ट का निर्णय होने तक होमिओपैथिक का पंजीयन रोकें
अमरावती/दि.6 – इंडियन मेडिकल असो. (आईएमए) द्वारा अचानक शुरु की गई हडताल के कारण आज लगातार तीसरे दिन शहर और जिले के एक हजार से अधिक क्लिनीक व खासकर ओपीडी बंद रखने के साथ आईएमए के नेतृत्व में सैकडों चिकित्सक सडकों पर उतर आए. सुबह 11 बजे इर्विन चौक पर बाबासाहब की प्रतिमा के पास एकत्र होकर हाथ में पोस्टर और प्ले कार्ड लेकर प्रदर्शन करते हुए पैदल ही जिलाधीश कार्यालय पहुंचे और जिलाधीश को अपना स्पष्ट शब्दों वाला एक पेज का निवेदन सौंपा.
सतत तीसरे दिन ओपीडी और अब पूर्ण अस्पताल ही बंद हो जाने से जिले के निजी अस्पतालों पर निर्भर 20-25 हजार से अधिक रुग्णों को बगैर उपचार के लौटना पडा. 2 से 4 हजार के करीब रुग्णों की आपात सेवा, उपचार न मिलने से उन्हें लेकर सरकारी, निमसरकारी अस्पताल दौडना पडा. आज आपात सेवा भी बंद हो जाने से कई सर्जरी और ऑपरेशन टाले गए हैैं, इस प्रकार का दावा दोपहर को चिकित्सकों ने अमरावती मंडल से चर्चा में किया था. तथापि आयोजित बंद आंदोलन को पूरा समर्थन, प्रतिसाद मिलने का दावा भी उन्होंने किया.
अमरावती का आंदोलन अध्यक्ष डॉ. दिनेश वाघाडे, सचिव डॉ. विक्रम वानखडे, कोषाध्यक्ष डॉ. रोहन बोबडे, पूर्व अध्यक्ष डॉ. अलका कुथे, अगले अध्यक्ष डॉ. संदीप दानखडे, उपाध्यक्ष डॉ. विक्रम देशमुख, डॉ. तृप्ति दानखडे, डॉ. भूपेश भोंड, सहसचिव डॉ. आशीष डगवार, डॉ. ऋतिका लोखंडे, डॉ. सौरभ लांडे, डॉ. मृण्मयी बोबडे, डॉ. विजय कुथे, डॉ. राधा सावदेकर, डॉ. संगीता सालुंके, डॉ. गौरव गोहाड, डॉ. जयंत पांढरीकर, डॉ. सोहेल बारी, डॉ. सोनाली शिरभाते, डॉ. सीमा आडवानी, डॉ. तृप्ति जावदे, डॉ. नितिन जायसवाल, डॉ. नीलेश पाचकवडे, डॉ. अंशू चांडक, डॉ. अमित डफले, डॉ. अपूर्वा मुंधडा, डॉ. प्रणिक काकडे, डॉ. हिमानी राठोड, डॉ. अक्षय चांदुरकर, डॉ. सिकंदर आडवानी, डॉ. वसंत लुंगे, डॉ. अलका कुथे, डॉ. दिलीप पारवानी, डॉ. राघानी सहित सैकडों चिकित्सकों का समावेश रहा.
* आईएमए स्ट्राइक, नो ओपीडी, नो इमर्जन्सी
डॉक्टर्स आज पूरी तैयारी से सडकों पर उतरे. अपने साथ बैनर्स, पोस्टर्स, प्ले कार्ड्स लाने के साथ ही घोषणाएं देने के लिए अपना निजी लाउडस्पीकर भी लेकर कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला. उनके कुछ प्ले कार्ड्स सभी का ध्यान खींच गए. जिसमें एक पोस्टर पर लिखा था आईएमए स्ट्राइक, नो ओपीडी, नो इमर्जन्सी. जिससे चिकित्सकों के दृढ रवैये का पता चलता है.
* क्या कहा गया निवेदन में
अध्यक्ष डॉ. दिनेश वाघाडे और सचिव डॉ. विक्रम वानखडे के नेतृत्व में चार मांगों का मुख्य रुप से निवेदन जिलाधिकारी को सौंपा गया. जिसमें मेडिकल क्षेत्र द्वारा व्यक्त गंभीर आपत्तियों की तत्काल दखल लेने, निवेदन सीएम तक पहुंचाने, बंबई हाईकोर्ट का फैसला आने तक बीएचएमएस डॉक्टर्स की एमएमसी में रजिस्ट्री स्थगित करने और रुग्णों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर आधुनिक मेडिकल शिक्षा और मेडिकल व्यवसाय के उच्च मापदंड कायम रखे जाएं.
* सभी तहसीलों में प्रतिसाद का दावा
पीआरओ डॉ. चांदुरकर ने बताया कि, जिले की सभी तहसीलों से बढिया प्रतिसाद मिला है. अपने अधिकारों की लडाई में चिकित्सक एकजुट है. केवल आपात स्थिति सेवा शुरु रखी गई. जिसमें लगभग दो हजार गंभीर रुग्णों का उपचार तत्काल किया गया. चिकित्सकों ने अपनी मानवीय संवेदनाएं हडताल में भी पूरी तरह जागृत रखी. जिसकी बदौलत आईएमए की हडताल के कारण जिले में इन पंक्तियों के लिखे जाने तक किसी गंभीर मरीज की जान नहीं गई.
* क्या है मसला
उल्लेखनीय है कि, होमिओपैथी की डिग्री प्राप्त करनेवाले डॉक्टर्स को महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विद्यापीठ के फॉर्माकोलॉजी पाठ्यक्रम पूर्ण करने पर प्रमाणपत्र दिए जाने का विरोध आईएमए ने किया है. पूरे राज्य में एक लाख से अधिक चिकित्सक के अस्पताल तीसरे दिन बंद रहने का दावा संगठन ने किया. आंदोलन में निवासी डॉक्टर अर्थात मार्ड भी कूदने की संभावना बताई जा रही है. जिसके बाद कई सरकारी, निमसरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा चरमरा सकती है. वहां मरीजों की भीड सतत बढ रही है. कई गंभीर मरीजों को आपात सेवा उपलब्ध करवाने सीएस डॉ. पवार ने अपने अधीनस्थ सभी चिकित्सकों की छुट्टी स्थगित कर अस्पताल पहुंचने कहा है.
* मेडिकल का बिजनेस प्रभावित
डॉक्टर्स के काम बंद के कारण अस्पतालों के आसपास का इको सिस्टम प्रभावित हुआ है. विशेषकर दवा दुकानों के बिजनेस पर असर पडा. आमतौर पर सुबह से लेकर शाम तक फुर्सत न पानेवाले मेडिकल संचालक डॉक्टरों की हडताल के कारण लगभग व्यापार ठप होने की स्थिति में रहे. उसी प्रकार एमआर को भी विशेष काम न रहा.





