1 जुलाई को विधान परिषद उपसभापती पद के लिए चुनाव

शिवसेना में कई नामों की चर्चा, नीलम गोर्‍हे सबसे प्रबल दावेदार

* एकनाथ शिंदे फिर कर सकते हैं बड़ा राजनीतिक सरप्राइज
मुंबई/दि.29- महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए आखिरकार चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है. विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने चुनाव की अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि 1 जुलाई 2026 को दोपहर 1 बजे उपसभापति पद के लिए मतदान कराया जाएगा. राजनीतिक गलियारों में इस चुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. पूर्व उपसभापति नीलम गोर्‍हे को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है, लेकिन उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अंतिम समय में किसी नए चेहरे को मौका देकर एक बार फिर राजनीतिक चौंकाने वाला फैसला कर सकते हैं.
* 30 जून तक नामांकन
घोषित कार्यक्रम के अनुसार, इच्छुक उम्मीदवार कल 30 जून को दोपहर 12 बजे तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे. इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी. यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में रहे तो 1 जुलाई को मतदान होगा. वहीं, यदि केवल एक ही उम्मीदवार का नामांकन वैध रहता है तो चुनाव निर्विरोध होने की संभावना है.
* महायुति के पास स्पष्ट बहुमत
विधान परिषद में महायुति के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण उपसभापति पद का जाना लगभग तय माना जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, सत्ता संतुलन के तहत यह पद एक बार फिर शिवसेना (शिंदे गुट) को मिलने की संभावना है. इसी वजह से पार्टी के भीतर कई नेताओं के नामों पर चर्चा शुरू हो गई है.
* नीलम गोर्‍हे के साथ अन्य नाम भी चर्चा में
हाल ही में विधान परिषद के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुईं नीलम गोर्‍हे को इस पद के लिए सबसे आगे माना जा रहा है. हालांकि, पार्टी के भीतर अन्य नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं. इनमें कृपाल तुमाने, चंद्रकांत रघुवंशी और मनीषा कायंदे के नाम प्रमुख रूप से लिए जा रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंतिम निर्णय पूरी तरह एकनाथ शिंदे के हाथ में होगा और वे संगठनात्मक तथा राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार तय करेंगे.
* क्या फिर दिखेगा शिंदे का ’सरप्राइज कार्ड’?
महाराष्ट्र की राजनीति में कई बार अंतिम क्षण में अप्रत्याशित निर्णय लेकर सभी को चौंकाने वाले एकनाथ शिंदे इस बार भी कोई नया चेहरा सामने ला सकते हैं. यही वजह है कि नीलम गोर्‍हे की दावेदारी मजबूत होने के बावजूद अंतिम घोषणा तक सस्पेंस बना हुआ है. दूसरी ओर, विधान परिषद में पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के कारण महाविकास आघाड़ी की ओर से उम्मीदवार उतारा जाएगा या नहीं, इस पर भी नजरें टिकी हुई हैं. यदि विपक्ष उम्मीदवार नहीं उतारता है तो उपसभापति का चुनाव निर्विरोध भी हो सकता है. अब 30 जून को नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उपसभापति पद की दौड़ में कौन-कौन शामिल है और 1 जुलाई को आखिर किस नेता के सिर यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाती है.

Back to top button