हरे बैंगन के गिरे दाम से किसान बेहाल, लागत भी नहीं निकल रही

थोक बाजार में 2 से 3 रुपए किलो हुए भाव

* पथ्रोट के बैगन उत्पादक किसानों की हालत चिंताजनक
पथ्रोट/दि.7– पथ्रोट और आसपास के क्षेत्रों में पिछले तीन दशकों से उगाए जा रहे हरे बैंगन की पहचान उसके खास स्वाद के कारण कई राज्यों तक बनी हुई है. लेकिन इस समय बैंगन के दामों में भारी गिरावट से किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं. किसानों को उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने से उत्पादन लागत तक नहीं निकल पा रही है.
एक एकड़ में हरे बैंगन की खेती पर करीब 30 से 40 हजार रुपये खर्च आता है, जबकि मंडियों में किसानों को महज 1 से 2 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है. ऐसे में मजदूरी और परिवहन का खर्च भी किसानों की जेब से जा रहा है. हालात इतने खराब हैं कि कई किसान बैंगन की फसल उखाड़कर उसकी जगह कपास, अरहर और सोयाबीन जैसी फसलें बोने को मजबूर हो गए हैं.
पथ्रोट का हरा बैंगन विदर्भ के अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु सहित सात राज्यों में अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है. हर वर्ष जून की शुरुआत से इसकी कटाई शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार बाजार में कीमतें बेहद कम रहने से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है. किसानों का कहना है कि खाद, बीज और अन्य कृषि सामग्री के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि बैंगन का भाव 1 से 1.5 रुपये प्रति किलो तक सिमट गया है. ऐसे में खेती घाटे का सौदा बन गई है. हरे बैंगन उत्पादक किसान गोपाल कावरे ने कहा कि बढ़ती लागत और गिरते बाजार भाव ने किसानों की कमर तोड़ दी है. यदि जल्द उचित मूल्य नहीं मिला तो बैंगन की खेती से किसानों का मोहभंग हो जाएगा.

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