मुख्यमंत्री तक पहुंचा करोड़ों का प्लॉट घोटाला
भू-माफिया पर शिकंजा कसने की तैयारी

अमरावती /दि.7– शहर में सरकारी जमीन, डीपी सड़कों और ग्रीन ज़ोन की भूमि पर कथित अवैध प्लॉटिंग का मामला अब मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है. शिकायत के बाद संबंधित विभागों ने बिना वैध मंजूरी वाले प्लॉटों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं. मामले में आर्थिक अनियमितताओं की जांच की मांग भी उठी है.
मनपा शिक्षा समिति के पूर्व सभापति अब्दुल रफीक अब्दुल रज्जाक ने 23 मई को मुख्यमंत्री कार्यालय और ‘आपले सरकार’ पोर्टल पर दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मौजा नवसारी, तारखेड़ा, गंभीरपुर और सुकली क्षेत्रों में बिना आवश्यक अनुमति और गैर-कृषि स्वीकृति के कृषि भूमि पर अवैध लेआउट विकसित कर करोड़ों रुपये के प्लॉट बेचे गए, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ. शिकायत के अनुसार, वलगांव रोड स्थित रॉयल पैलेस के पीछे सर्वे नंबर 78 में डीपी रोड आरक्षण क्षेत्र पर अतिक्रमण किया गया, जबकि सर्वे नंबर 82/1 और 82/2 की सरकारी भूमि पर कथित कब्जा कर उसे निजी व्यक्तियों को बेच दिया गया. मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देश के बाद संबंधित विभाग ने आदेश जारी कर कहा है कि संबंधित सर्वे नंबरों में प्लॉटों की वैध मंजूरी की पुष्टि किए बिना किसी भी प्रकार की खरीद-बिक्री या पंजीयन प्रक्रिया न की जाए. आदेश के बाद भू-माफिया में हड़कंप मचने की चर्चा है.
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि गंभीरपुर के हाजरा नगर क्षेत्र, रेलवे ट्रैक के समीप ग्रीन ज़ोन तथा कई डीपी सड़कों पर भी अवैध प्लॉटिंग की गई. वहीं सर्वे नंबर 109, 110, 111, 112 और 113 की ग्रीन ज़ोन भूमि को भी कथित रूप से आवासीय प्लॉट के रूप में बेचा गया. शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में केवल निजी भू-माफिया ही नहीं, बल्कि राजस्व एवं टाउन प्लानिंग विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. इसी आधार पर मामले की जांच ईडी, सीबीआई, एसीबी और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों से कराने तथा दोषियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है. हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा किसी कार्रवाई की घोषणा अभी तक सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है. मामले की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी.





