आखिर ‘पिंकी’ बाघिन आई पकड में

ट्रैंक्विलाइजर गन से डार्ट मारकर किया गया बेहोश

* वन विभाग ने मादा बाघ को कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू
* 24 घंटे में दो मानव शिकार और लगातार पशुओं को निशाना बनाए जाने से मचा था हड़कंप
* सांसद बलवंत वानखड़े ने जिलाधीश आशीष येरेकर से की थी चर्चा
* पूर्व सांसद नवनीत राणा और विधायक प्रवीण तायडे भी मौके पर डटे रहे
* बाघिन के पकड़े जाने से चांदूर बाजार-शिरजगांव कसबा परिसर ने ली राहत की सांस
अमरावती/चांदूर बाजार/दि.7- जिले के चांदूर बाजार तहसील के शिरजगांव कसबा और आसपास के गांवों में पिछले कई दिनों से आतंक का पर्याय बनी नरभक्षी बाघिन ‘पिंकी’ आखिरकार वन विभाग के रेस्क्यू अभियान में ट्रैंक्विलाइजर गन की जद में आ गई. रेस्क्यू चैरिटेबल ट्रस्ट, पुणे के मुख्य पशु चिकित्सक डॉ. हेमराज ने सोमवार को बाघिन को सफलतापूर्वक डार्ट कर बेहोश कर दिया. बाघिन के बेहोश होते ही वन विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित रूप से अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी. बाघिन के पकड़े जाने की खबर सामने आते ही शिरजगांव कसबा, सोनोरी, देऊलवाडा, रिद्धपुर और आसपास के गांवों में राहत की लहर दौड़ गई.
बता दे कि, पिछले कई दिनों से लगातार मानव और पशुओं पर हमले कर रही बाघिन के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल था. किसान खेतों में जाने से डर रहे थे और विशेष रूप से जंगल एवं झाड़ियों से सटे क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही लगभग थम गई थी. बाघिन को पकड़ने में मिली यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसने महज 24 घंटे के भीतर दो इंसानी जानें ले ली थीं. रविवार को सोनोरी गांव में घास काटने गई उर्मिला बाजीराव इवने पर बाघिन ने हमला कर दिया था. हमले में युवती की मौत हो गई थी. इसी दौरान बाघिन ने सोनोरी क्षेत्र में दो बकरियों को भी मार डाला था. सोनोरी की घटना के बाद वन विभाग ने बाघिन की तलाश तेज की थी. ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही बाघिन को पकड़ लिया जाएगा, लेकिन सोमवार सुबह उसने शिरजगांव कसबा क्षेत्र में एक और किसान को अपना शिकार बना लिया. लगातार दूसरे दिन मानव शिकार होने से पूरे परिसर में दहशत के साथ ही प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव भी बढ़ गया था.
* आज सुबह शिरजगांव कसबा में किसान को बनाया निशाना
गतरोज सोनोरी गांव में एक युवती को मार डालने के बाद आज सोमवार सुबह शिरजगांव कसबा से करीब दो किलोमीटर दूर पावर हाउस के समीप कालाटोला जंगल क्षेत्र में खेत में काम कर रहे दिनेश उर्फ दामू आवारे (45), निवासी केणीपुरा, शिरजगांव कसबा पर बाघिन ने हमला कर दिया. बताया गया कि आवारे अपने खेत में सल्फेट खाद डालने का काम कर रहे थे. इसी दौरान झाड़ियों में मौजूद बाघिन ने उन पर हमला किया. हमले में उनकी मौत हो गई. घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं. इस घटना के बाद शिरजगांव कसबा, केणीपुरा और आसपास के गांवों में भय का माहौल और गहरा गया. ग्रामीणों ने वन विभाग से बाघिन को तत्काल पकड़ने की मांग की.
* किसान के शव के पास ही डेरा डाले बैठी रही बाघिन
शिरजगांव कसबा में किसान पर हमला करने के बाद बाघिन काफी देर तक शिकार के पास ही मौजूद रही. इसके चलते ग्रामीण और अन्य लोग घटनास्थल के करीब जाने से भी डर रहे थे. वन विभाग की टीम ने बेहद सावधानी से इलाके को अपने नियंत्रण में लिया और बाघिन की गतिविधियों पर नजर रखी. बाघिन के घटनास्थल के आसपास ही मौजूद रहने से रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद संवेदनशील बन गया था. वनकर्मियों और विशेषज्ञों ने उचित अवसर की प्रतीक्षा करते हुए उसे सुरक्षित तरीके से डार्ट करने की रणनीति अपनाई.
* देऊलवाडा में दो गायों का भी शिकार
इसी दौरान सोमवार सुबह देऊलवाडा गांव में दो गायों को भी बाघिन द्वारा मार दिए जाने की जानकारी सामने आई. इससे ग्रामीणों में और अधिक भय फैल गया. इससे पहले सोनोरी में दो बकरियों को भी बाघिन ने अपना शिकार बनाया था. लगातार पशुओं पर हो रहे हमलों से किसान और पशुपालक भी चिंतित थे. ग्रामीणों का कहना था कि बाघिन अब जंगल तक सीमित न रहकर खेतों और गांवों के आसपास पहुंच रही थी.
* मोर्शी से चांदूर बाजार तक करीब 50 किलोमीटर का सफर
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ‘पिंकी’ वही बाघिन है, जिसने इससे पहले मोर्शी तहसील के भांबोरा क्षेत्र में भी मानव पर हमला किया था. इसके बाद उसका मूवमेंट रिद्धपुर और सोनोरी की ओर देखा गया तथा वह चांदूर बाजार तहसील के शिरजगांव कसबा क्षेत्र तक पहुंच गई. बताया जा रहा था कि बाघिन प्रतिदिन करीब 10 से 12 किलोमीटर तक दूरी तय कर रही थी और कुछ ही दिनों में उसने मोर्शी से करीब 50 किलोमीटर का सफर तय कर लिया था. लगातार स्थान बदलने के कारण वन विभाग के सामने उसे पकड़ना बड़ी चुनौती बना हुआ था.
* सांसद बलवंत वानखड़े ने जिलाधीश से की थी चर्चा
लगातार हो रहे मानव और पशु हमलों को लेकर सांसद बलवंत वानखड़े ने जिलाधीश आशीष येरेकर से चर्चा की थी. उन्होंने क्षेत्र की गंभीर स्थिति और ग्रामीणों में बढ़ती दहशत को देखते हुए बाघिन को जल्द से जल्द पकड़ने तथा नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया था. सांसद वानखडे की ओर से प्रशासन के समक्ष प्रभावित गांवों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, वन विभाग की गश्त बढ़ाने और बाघिन के मूवमेंट पर लगातार नजर रखने जैसे मुद्दे रखे गए थे. लगातार दो मानव शिकार के बाद यह मामला केवल वन्यजीव नियंत्रण तक सीमित न रहकर मानव जीवन की सुरक्षा का गंभीर प्रश्न बन गया था.
* रेस्क्यू चैरिटेबल ट्रस्ट की टीम ने संभाला मोर्चा
बाघिन को सुरक्षित पकड़ने के अभियान में रेस्क्यू चैरिटेबल ट्रस्ट, पुणे के मुख्य पशु चिकित्सक डॉ. हेमराज की महत्वपूर्ण भूमिका रही. उचित मौका मिलते ही उन्होंने ट्रैंक्विलाइजर गन से बाघिन को डार्ट किया. डार्ट लगने के बाद बाघिन बेहोश हो गई. इसके तुरंत बाद वन विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित रूप से अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू कर दी. बाघिन को किसी तरह की चोट न पहुंचे और रेस्क्यू प्रक्रिया सुरक्षित तरीके से पूरी हो, इसके लिए टीम बेहद सावधानी बरत रही है.
* पूर्व सांसद नवनीत राणा और विधायक प्रवीण तायडे भी मौके पर रहे मौजूद
रेस्क्यू अभियान के दौरान भाजपा नेत्री एवं पूर्व सांसद नवनीत राणा तथा भाजपा विधायक प्रवीण तायडे भी मौके पर डटे रहे. दोनों ने अभियान की प्रगति पर नजर रखी और बाघिन को सुरक्षित तरीके से पकड़ने की कार्रवाई पूरी होने तक मौके पर मौजूद रहे. लगातार बढ़ते आतंक के बीच जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी और वन विभाग की सक्रिय कार्रवाई से ग्रामीणों में भरोसा बढ़ा.
* अब ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत
पिछले कई दिनों से बाघिन के आतंक के कारण शिरजगांव कसबा, सोनोरी, देऊलवाडा, रिद्धपुर और आसपास के गांवों के लोग भय के साये में जी रहे थे. खेतों में काम करने से लेकर मवेशियों को चराने तक ग्रामीणों को हर समय बाघिन के हमले का डर सताता था. अब ‘पिंकी’ को सफलतापूर्वक डार्ट कर बेहोश किए जाने के बाद ग्रामीणों ने बड़ी राहत की सांस ली है. हालांकि वन विभाग की ओर से बाघिन को पूरी तरह सुरक्षित रूप से अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अभियान का अगला चरण स्पष्ट होगा. फिलहाल कई दिनों से जारी दहशत के बीच ‘पिंकी’ का ट्रैंक्विलाइजर गन की जद में आना वन विभाग के अभियान की बड़ी सफलता मानी जा रही है. अब सभी की नजरें बाघिन के सुरक्षित रेस्क्यू और उसे आगे कहां स्थानांतरित किया जाता है, इस पर टिकी हैं.

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