‘पिंकी’ का आतंक जारी, 24 घंटे में दूसरा मानव शिकार

सोनोरी की युवती की मौत के अगले ही दिन फिर दहाड़ा मौत का साया

* आज शिरजगांव कसबा के खेत में काम कर रहे किसान को मार डाला
* सुबह देऊलवाडा गांव में दो गायों का भी बनाया निशाना
* मोर्शी से चांदूर बाजार तक 50 किलोमीटर का सफर तय कर दहशत फैला रही ‘पिंकी’
* सांसद बलवंत वानखड़े ने जिलाधिकारी येरेकर से की चर्चा, ‘पिंकी’ का बंदोबस्त करने कहा
* अब ‘पिंकी’ को देखते ही गोली मारने की तैयारी, चंद्रपुर से बुलाई गई विशेष टीम
अमरावती/चांदूर बाजार/दि.7 – अमरावती जिले में पिछले दस दिनों से दहशत का पर्याय बनी कथित नरभक्षी बाघिन ‘पिंकी’ का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. मोर्शी तहसील में किसान की जान लेने के बाद चांदूर बाजार तहसील में पहुंची इस बाघिन ने अब 24 घंटे के भीतर दूसरा मानव शिकार कर पूरे क्षेत्र को दहला दिया है. रविवार को सोनोरी गांव में एक युवती को मौत के घाट उतारने वाली बाघिन ने सोमवार को शिरजगांव कसबा क्षेत्र में खेत में काम कर रहे किसान को अपना शिकार बना लिया. लगातार हो रहे हमलों ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है और अब बाघिन को पकड़ने के साथ-साथ उसे मार गिराने की मांग भी तेज हो गई है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार दिनेश उर्फ दामू आवारे (45, केणीपुरा, शिरजगांव कसबा) सोमवार सुबह अपने खेत में सल्फेट खाद डालने के लिए निकले थे. शिरजगांव कसबा से लगभग दो किलोमीटर दूर पावर हाउस के समीप स्थित कालाटोला जंगल क्षेत्र में काम करते समय उन पर बाघिन ने हमला कर दिया. ग्रामीणों के अनुसार हमला इतना अचानक था कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला. कुछ समय बाद उनका क्षत-विक्षत शव खेत के समीप बरामद हुआ. घटना की खबर फैलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर जमा हो गए और वन विभाग के खिलाफ तीव्र नाराजगी व्यक्त की.
* 24 घंटे में दो इंसानों की जान, क्षेत्र में दहशत चरम पर
रविवार शाम चांदूर बाजार तहसील के सोनोरी गांव में 22 वर्षीय उर्मिला बाजीराव इवने बकरियों के लिए घास काटने गई थीं. उसी दौरान बाघिन ने उन पर हमला कर दिया. प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों के अनुसार बाघिन ने युवती को घसीटते हुए झाड़ियों में ले जाकर मार डाला. घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश फैल गया था और ग्रामीणों ने वन विभाग के वाहनों पर पथराव भी किया था. उर्मिला की मौत के बाद वन विभाग की टीमें पूरी रात बाघिन की तलाश में जुटी रहीं, लेकिन इससे पहले कि उसे पकड़ा जा सके, उसने शिरजगांव कसबा क्षेत्र में एक और जान ले ली. लगातार दूसरे दिन मानव शिकार होने से सोनोरी, शिरजगांव कसबा, केणीपुरा, देऊलवाडा, रिद्धपुर और आसपास के दर्जनों गांवों में भय का माहौल है.
* इंसानों के बाद पशुधन पर भी लगातार हमले
बाघिन का आतंक केवल मानवों तक सीमित नहीं है. सोमवार सुबह देऊलवाडा गांव में उसने दो गायों को मार डाला. इससे पहले रविवार को सोनोरी गांव में दो बकरियों को भी अपना शिकार बनाया था. पिछले कुछ दिनों में भांबोरा, नजरपुर, रिद्धपुर और आसपास के क्षेत्रों में कई गाय, बछड़े और बकरियां उसके हमलों का शिकार हो चुकी हैं. ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में चरने वाले पशुओं को बचाना अब मुश्किल हो गया है.
* मोर्शी से चांदूर बाजार तक 50 किलोमीटर का खौफनाक सफर
वन विभाग की प्रारंभिक जांच और पदचिह्नों के आधार पर माना जा रहा है कि यही वही बाघिन है जिसने 27 अगस्त को मोर्शी तहसील के भांबोरा क्षेत्र में किसान चरणदास इखे की जान ली थी. इसके बाद उसने कई स्थानों पर पशुओं पर हमले किए और धीरे-धीरे रिद्धपुर, सोनोरी तथा शिरजगांव कसबा क्षेत्र तक पहुंच गई. अधिकारियों के अनुसार बाघिन प्रतिदिन लगभग 10 से 12 किलोमीटर का सफर तय कर रही है और पिछले चार-पांच दिनों में करीब 50 किलोमीटर का क्षेत्र पार कर चुकी है. उसकी यह तेज आवाजाही वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है.
* घने जंगल छोड़ खेतों और बस्तियों तक पहुंची बाघिन
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बाघिन अब जंगलों तक सीमित नहीं रही. वह खेतों, चरागाहों और गांवों के बाहरी हिस्सों तक पहुंच चुकी है. कई स्थानों पर ग्रामीणों ने उसे सड़क किनारे चलते हुए देखने का दावा किया है. वन विभाग को आशंका है कि यदि उसकी गतिविधियों पर तत्काल नियंत्रण नहीं पाया गया तो वह चांदूर बाजार से आगे अचलपुर और परतवाड़ा क्षेत्र की ओर बढ़ सकती है.
* अब बाघिन के अचलपुर की ओर बढ़ने की आशंका
वन विभाग के सूत्रों का मानना है कि बाघिन लगातार स्थान बदल रही है और घने जंगलों, नालों तथा खेतों का सहारा लेकर आगे बढ़ रही है. उसकी वर्तमान गतिविधियों को देखते हुए आशंका व्यक्त की जा रही है कि वह अब चांदूर बाजार से अचलपुर तहसील क्षेत्र की ओर बढ़ सकती है. इस संभावना को देखते हुए अचलपुर, परतवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में भी अलर्ट जारी किया गया है. ग्रामीणों को अकेले खेतों में न जाने, समूह में काम करने तथा शाम के बाद जंगल से सटे इलाकों में आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है. लगातार दो मानव शिकार और कई पशुओं की मौत के बाद पूरा इलाका दहशत में है और लोगों की निगाहें अब वन विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.
* सांसद की जिलाधिकारी से चर्चा, बढ़ा दबाव
लगातार बढ़ती घटनाओं के बाद सांसद बलवंत वानखड़े ने जिलाधिकारी आशीष येरेकर से चर्चा कर तत्काल निर्णायक कार्रवाई की मांग की है. सांसद ने कहा कि अब यह केवल वन्यजीव प्रबंधन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि हजारों ग्रामीणों की सुरक्षा का प्रश्न बन चुका है. उन्होंने प्रभावित गांवों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था, लगातार गश्त और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया.
* अब ‘देखते ही शूट’ की तैयारी, चंद्रपुर से पहुंच रही विशेषज्ञ टीम
सूत्रों के अनुसार लगातार दो मानव शिकार और पशुधन पर बढ़ते हमलों के बाद वन विभाग ने बाघिन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. यदि उसे बेहोश कर पकड़ने के प्रयास विफल रहते हैं और वह मानव जीवन के लिए खतरा बनी रहती है, तो आवश्यक अनुमति मिलने पर उसे देखते ही मार गिराने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है. हालांकि अंतिम निर्णय वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नियमों और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार लिया जाएगा. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने चंद्रपुर से विशेष प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को बुलाया है. इस टीम में ट्रैंक्विलाइजर विशेषज्ञ, ट्रैकर्स और अनुभवी वन अधिकारी शामिल हैं. ड्रोन कैमरे, कैमरा ट्रैप, थर्मल उपकरण और विशेष निगरानी तंत्र की सहायता से बाघिन की सटीक लोकेशन तलाशने का प्रयास किया जा रहा है. वन विभाग की कई टीमें दिन-रात जंगलों, नालों और झाड़ियों में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं.
* खेतों में जाने से डर रहे किसान
लगातार हमलों के बाद स्थिति यह हो गई है कि अनेक गांवों में किसान अकेले खेतों में जाने से डर रहे हैं. कई स्थानों पर लोग समूह बनाकर खेतों में जा रहे हैं, जबकि महिलाओं और बच्चों की आवाजाही भी सीमित हो गई है. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बाघिन को पकड़कर या मारकर क्षेत्र को सुरक्षित नहीं किया जाता, तब तक सामान्य जनजीवन बहाल होना मुश्किल है.
सोनोरी की उर्मिला, शिरजगांव कसबा के दामू आवारे और इससे पहले मोर्शी क्षेत्र में हुई मौतों ने पूरे जिले को झकझोर दिया है. गांवों में अब एक ही मांग सुनाई दे रही है-पहले बाघिन को पकड़ो, फिर हम खेतों में जाएंगे. लगातार बढ़ते हमलों के बीच लोगों की निगाहें अब वन विभाग की विशेष टीम और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं. यदि शीघ्र परिणाम नहीं मिले तो प्रभावित गांवों में बड़े जनआंदोलन की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा.
* शिकार के पास ही बैठी रही बाघिन, बढ़ा तनाव
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि, शिरजगांव कसबा में दिनेश उर्फ दामू आवारे नामक किसान को मारने के बाद बाघिन घटनास्थल से भागी नहीं, बल्कि अपने शिकार के पास ही काफी देर तक डेरा डाले बैठी रही. इससे वन विभाग के कर्मचारियों और ग्रामीणों के बीच भारी तनाव का माहौल बन गया. घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश फैल गया है. प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार हमले के बाद बाघिन काफी देर तक अपने शिकार के पास ही बैठी रही. इससे पूरे इलाके में भय का माहौल और गहरा गया. ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी. सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी तथा पुलिस दल मौके पर पहुंचा. वनकर्मियों ने सुरक्षा घेरा बनाकर ग्रामीणों को घटनास्थल से दूर रखा. बाघिन को सुरक्षित तरीके से पकड़ने तथा किसी अन्य अनहोनी को रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है.

* नरभक्षी बाघ को मारने के आदेश
इस बीच सांसद बलवंत वानखडे ने अमरावती मंडल से चर्चा में बताया कि, उन्होंने सोमवार दोपहर ही कलेक्टर आशीष येरेकर से बात की है. नरभक्षी बाघ को मारने के आदेश जारी कर देने की जानकारी येरेकर सांसद वानखडे को दी है. वानखडे ने दावा किया कि, वन विभाग के पास इस संबंध में सभी साधन-सामग्री तैयार है. शूटर बाहर से बुलवा लिए गए हैं. मादा बाघ ने एक के बाद एक कई लोगों को मार डाला, इसलिए उसे मार गिराने संबंधी फॉरेस्ट प्रशासन की प्रक्रिया पूर्ण कर लेने की जानकारी भी जिले के सांसद वानखडे ने दी.

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