पुणे मनपा के पूर्व मुख्य अभियंता के पास 2 हजार करोड़ की संपत्ति!
हाईकोर्ट ने एसीबी जांच का रास्ता खोला

* विधानसभा में भी गूंजा मामला
* तत्कालीन आयुक्त की भूमिका पर भी उठे सवाल
पुणे/मुंबई /दि.24- पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) के सेवानिवृत्त मुख्य शहर अभियंता प्रशांत वाघमारे की कथित 2,000 करोड़ रुपये की बेहिसाबी संपत्ति के मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मुंबई हाईकोर्ट ने इस प्रकरण में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को खुली जांच करने की अनुमति देते हुए पूर्व में जांच की मंजूरी न देने वाले तत्कालीन आयुक्त के आदेश को रद्द कर दिया है. यह जानकारी विधान परिषद में विधायक सत्यजीत तांबे द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में सामने आई.
* 2016 में हुई थी शिकायत
सरकारी जवाब के अनुसार, मई 2016 में प्रशांत वाघमारे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत एसीबी को मिली थी. प्रारंभिक गोपनीय जांच के बाद एसीबी ने खुली जांच की अनुमति मांगी थी, लेकिन 25 अप्रैल 2019 को तत्कालीन पुणे महापालिका आयुक्त ने अनुमति देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद शिकायतकर्ता ने मुंबई हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 2 अप्रैल 2026 को दिए गए फैसले में अदालत ने आयुक्त के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि जांच की अनुमति रोकना भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की जांच प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने जैसा है. अदालत ने एसीबी को मामले की खुली जांच करने के निर्देश दिए.
* विदेश यात्राओं और निवेश की जानकारी छिपाने का आरोप
सरकार के लिखित जवाब में कहा गया है कि एसीबी की प्रारंभिक जांच में वाघमारे पर स्वयं, परिवार और विभिन्न कंपनियों के नाम पर बड़ी मात्रा में संपत्ति अर्जित करने के आरोप सामने आए हैं. जांच में यह भी पाया गया कि उन्होंने विदेश यात्राओं, बच्चों की विदेश में शिक्षा तथा विभिन्न व्यावसायिक निवेशों की जानकारी विभाग से छिपाई थी.
विधायक सत्यजीत तांबे ने कहा कि प्रशांत वाघमारे वर्षों तक एक ही विभाग में प्रभावशाली पद पर कैसे बने रहे, इसकी भी जांच होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि एसीबी जांच की अनुमति न देने वाले तत्कालीन आयुक्त की भूमिका भी संदेह के घेरे में है. तांबे ने कहा कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोपों के बावजूद जांच रोकी गई, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए. उन्होंने राज्य सरकार से मामले की व्यापक जांच कराने की मांग की है.
नगर विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि एसीबी द्वारा की जा रही जांच अभी पूरी नहीं हुई है. साथ ही, महापालिका के अधिकारियों से हर वर्ष संपत्ति विवरण लिया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर यह जानकारी जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराई जाती है. हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब एसीबी को मामले की विस्तृत जांच करने का रास्ता साफ हो गया है. जांच के निष्कर्षों और संभावित कार्रवाई पर राज्यभर की नजरें टिकी हुई हैं.





