इलाज के इंतजार में चार साल की बच्ची की मौत

डॉक्टर पर सदोष मनुष्य वध का मामला दर्ज

धारणी उपजिला अस्पताल में लापरवाही का आरोप
जांच समिति की रिपोर्ट के बाद मेडिकल ऑफिसर के खिलाफ एफआईआर
अमरावती/दि.30 – धारणी उपजिला अस्पताल में समय पर इलाज नहीं मिलने से चार साल की बच्ची की मौत का गंभीर मामला सामने आया है. चिंचघाट निवासी चार वर्षीय युवानी ईश्वर जावरकर की मौत के मामले में पुलिस ने अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. चंद्रकांत तामेवार के खिलाफ सदोष मनुष्य वध का मामला दर्ज किया है. यह कार्रवाई जिला शल्य चिकित्सक द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है.
जानकारी के मुताबिक युवानी जावरकर को तबीयत खराब होने के बाद 1 अगस्त को सुबह करीब 11 बजे धारणी उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के दौरान 2 अगस्त की सुबह करीब 3 बजे उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी. बच्ची की हालत लगातार खराब होते देख उसके पिता ईश्वर जावरकर ने ड्यूटी पर मौजूद नर्स को इसकी जानकारी दी. परिजनों के मुताबिक इसके बाद ड्यूटी पर मौजूद मेडिकल ऑफिसर डॉ. चंद्रकांत तामेवार को फोन कर बच्ची की गंभीर स्थिति के बारे में बताया गया. आरोप है कि आपात स्थिति के बावजूद डॉक्टर तत्काल अस्पताल नहीं पहुंचे और करीब तीन घंटे बाद सुबह 6 बजे अस्पताल पहुंचे. तब तक बच्ची की हालत अत्यंत गंभीर हो चुकी थी और उसकी मौत हो गई.

* पिता ने की डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग
बेटी की मौत के बाद पिता ईश्वर जावरकर ने जिला शल्य चिकित्सक के पास लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए अस्पताल में इलाज में कथित लापरवाही की जांच और जिम्मेदार डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला शल्य चिकित्सक ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की. 28 सितंबर की शाम जांच समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद धारणी पुलिस थाने में डॉ. चंद्रकांत तामेवार के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया. मामले की आगे की जांच पुलिस उपनिरीक्षक विशाल राठौड़ और सहायक पुलिस निरीक्षक संध्या चव्हाण कर रहे हैं.

* मेलघाट की स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर सवाल
धारणी उपजिला अस्पताल में चार साल की बच्ची की मौत के बाद मेलघाट की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है. परिजनों ने आरोप लगाया है कि गंभीर स्थिति में भी समय पर चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध नहीं हो सका. घटना के बाद क्षेत्र के नागरिकों में भी नाराजगी है और सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने तथा लापरवाही के मामलों में जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है. हालांकि, मामले में डॉक्टर की ओर से क्या पक्ष रखा गया है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है. पुलिस जांच और संबंधित चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट होंगी.

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