गर्मियों में जलसंकट से निपटने की तैयारी, 12.57 करोड़ का प्लान मंजूर
14 तहसीलों के 287 गांवों में जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी

63 नल योजनाओं की मरम्मत, 7 कुओं का गहराईकरण और जरूरत पड़ने पर 1,782 कुओं का अधिग्रहण
अमरावती /दि.30– गर्मी के मौसम में संभावित जलसंकट की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में जलकिल्लत से निपटने के लिए जिला परिषद के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने 12 करोड़ 57 लाख 52 हजार रुपए का विशेष जलापूर्ति कृति प्रारूप तैयार किया है. जिलाधिकारी ने इस प्रारूप को मंजूरी दे दी है और अब संबंधित कार्यों की निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
प्रशासन ने संभावित अल नीनो प्रभाव को ध्यान में रखते हुए यह नियोजन तैयार किया है. 25 अक्टूबर को प्रस्ताव जिलाधिकारी कार्यालय को भेजा गया था. मंजूरी के बाद अब विभिन्न कामों की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है.
* 287 गांवों में किए जाएंगे जलसंकट निवारण के उपाय
विशेष जलापूर्ति प्रारूप के तहत जिले की 14 तहसीलों के 287 गांवों में जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत करने के लिए विभिन्न उपाय किए जाएंगे. इसमें 63 नल जलापूर्ति योजनाओं की विशेष मरम्मत, 4 जलस्रोतों को मजबूत करना और 7 स्थानों पर कुओं का गहराईकरण शामिल है. इसके अलावा जलसंकट के समय ग्रामीणों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए 292 हैंडपंप और 917 विद्युत पंपों की मरम्मत की जाएगी. जरूरत पड़ने पर प्रभावित गांवों में टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाने की व्यवस्था भी की जाएगी.
* 637 सार्वजनिक, 1,145 निजी कुओं का अधिग्रहण
जलसंकट की स्थिति में पानी के वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध रखने के लिए प्रशासन ने 637 सार्वजनिक और 1,145 निजी कुओं के अधिग्रहण का नियोजन किया है. यानी जरूरत पड़ने पर कुल 1,782 कुओं का उपयोग जलापूर्ति के लिए किया जा सकेगा. इससे जलस्रोत सूखने या नियमित जलापूर्ति बाधित होने की स्थिति में प्रशासन को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध होगी.
* चिखलदरा पर विशेष ध्यान
चिखलदरा तहसील और शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को इस बार विशेष प्राथमिकता दी गई है. गर्मी के दौरान चिखलदरा के अनेक ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में जलसंकट गंभीर हो जाता है. पिछले वर्ष मार्च से मानसून सक्रिय होने तक 31 टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाना पड़ा था. इस वर्ष संभावित जलकिल्लत को देखते हुए टैंकरों की संख्या बढ़ने की संभावना है. प्रशासन ने जरूरत के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों से पानी पहुंचाने की व्यवस्था भी प्रारूप में शामिल की है.
* तहसीलवार खर्च का नियोजन
विशेष जलापूर्ति प्रारूप में तहसीलवार गांवों और जलस्रोतों के साथ खर्च का भी नियोजन किया गया है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वरुड़ के लिए करीब 3.32 करोड़, धारणी के लिए 2.67 करोड़, चिखलदरा के लिए 2.28 करोड़ और तिवसा के लिए करीब 1.40 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. जिले के अन्य तहसीलों में भी आवश्यकतानुसार जलापूर्ति संबंधी कार्य किए जाएंगे.
* निविदा प्रक्रिया शुरू
जिला परिषद के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की ओर से प्रारूप को मंजूरी मिलने के बाद अब संबंधित कार्यों की निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. प्रशासन का उद्देश्य गर्मी शुरू होने से पहले आवश्यक मरम्मत और जलस्रोतों से जुड़े काम पूरे करना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित जलकिल्लत के दौरान लोगों को परेशानी न हो. ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की कार्यकारी अभियंता स्नेहा धावड़े के अनुसार, संभावित जलसंकट को ध्यान में रखते हुए विशेष जलापूर्ति प्रारूप को मंजूरी मिल गई है और अब निविदा समेत आगे की प्रक्रिया तेजी से शुरू की जा रही है.





