49 लंबित आश्वासनों पर विधानसभा आश्वासन समिति की सुनवाई
रवी राणा की अध्यक्षता में उद्योग, ऊर्जा और कामगार विभाग की समीक्षा

औद्योगिक जमीन का प्रोजेक्टवार ऑडिट और ‘कितनी जमीन-कितना निवेश-कितना रोजगार’ का मानक तय करने पर जोर
मुंबई/दि.30 – महाराष्ट्र विधानसभा की आश्वासन समिति ने उद्योग, ऊर्जा और कामगार विभाग से जुड़े 49 लंबित आश्वासनों पर मंगलवार को सुनवाई की. समिति के अध्यक्ष विधायक रवी राणा की अध्यक्षता में हुई बैठक में लंबित आश्वासनों की वर्तमान स्थिति, अब तक की कार्रवाई, देरी के कारण और आगे की कार्यवाही की समयसीमा की जानकारी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों से ली गई. समिति ने केवल कागजी पूर्ति के बजाय आश्वासनों की जमीनी स्तर पर वास्तविक स्थिति की जांच पर जोर दिया.
बैठक में विधायक राजेश पवार, समीर मेघे, अनुप अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, विक्रम पाचपुते, सचिन कल्याण शेट्टी, पराग शाह, रमेश कराड, किशोर पाटील, अमोल पाटील, प्रदीप जायसवाल, किरण सामंत, हिरामण खोसकर, जयंत बनसोड, दौलत दारोडा, वरुण सरदेसाई, अमित झनक और राजू खरे सहित समिति के सदस्य मौजूद थे.
* औद्योगिक जमीन का होगा प्रोजेक्टवार ऑडिट
बैठक में औद्योगिक परियोजनाओं के लिए आवंटित और अधिग्रहित जमीन का प्रोजेक्टवार ऑडिट करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई. विशेष रूप से अमरावती और वाशिम सहित राज्य के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में पिछले 10 से 15 वर्षों में उपलब्ध कराई गई जमीन की समीक्षा करने की बात कही गई. ऑडिट में यह देखा जाएगा कि संबंधित परियोजना को कितनी जमीन दी गई, उसका कितना हिस्सा वास्तव में इस्तेमाल हुआ, अपेक्षित और वास्तविक निवेश कितना रहा, कितने रोजगार का लक्ष्य था और वास्तव में कितने रोजगार पैदा हुए. साथ ही परियोजना को पूरा करने की निर्धारित समयसीमा और करार की शर्तों का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी जांच की मांग की गई.
* ‘कितनी जमीन-कितना निवेश-कितना रोजगार’ का मानक
बड़ी मात्रा में औद्योगिक जमीन उपलब्ध कराने से पहले ‘कितनी जमीन-कितना निवेश-कितना रोजगार’ का स्पष्ट प्रोजेक्टवार मानक तय करने पर जोर दिया गया. यदि परियोजना की जरूरत से अधिक जमीन लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं होती है, तो मौजूदा सरकारी नीति और संबंधित करार की शर्तों के अनुसार उस जमीन के संबंध में आगे की कार्रवाई पर विचार करने की मांग की गई. समिति के समक्ष यह मुद्दा भी रखा गया कि जब राज्य में कई औद्योगिक भूखंड वर्षों से खाली पड़े हैं, तब नए उद्योगों के लिए दोबारा किसानों की जमीन अधिग्रहित करने की स्थिति नहीं बननी चाहिए. इसके लिए राज्य की उपलब्ध औद्योगिक जमीन का एकीकृत डेटाबेस तैयार करने की मांग की गई है.
* अमरावती टेक्स्टाइल पार्क और आईटी उद्योग को गति
अमरावती के औद्योगिक विकास से जुड़े मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा हुई. अमरावती टेक्स्टाइल पार्क के काम को गति देने के साथ ही जिले में आईटी उद्योग के लिए सड़क, बिजली, पानी, संचार और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की मांग की गई. औद्योगिक निवेश के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया गया.
* बंद उद्योगों के पुनरुज्जीवन की जरूरत
राज्य में विभिन्न कारणों से बंद पड़े उद्योगों का विभागवार आकलन कर उन्हें दोबारा शुरू करने के लिए प्रभावी नीति बनाने की आवश्यकता पर चर्चा हुई. उपलब्ध जमीन, बुनियादी ढांचा और रोजगार क्षमता लंबे समय तक निष्क्रिय न रहे, इसके लिए सरकार द्वारा आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई.
* सूखे के बीच रतन इंडिया के पानी की समीक्षा की मांग
अमरावती जिले में सूखे जैसे हालात और जलस्रोतों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए रतन इंडिया पावर केंद्र को होने वाली पानी की आपूर्ति की समीक्षा करने की मांग की गई. उपलब्ध जलस्रोतों में खेती, पीने के पानी और नागरिकों की मूलभूत जरूरतों को प्राथमिकता देने की बात बैठक में रखी गई. रतन इंडिया पावर केंद्र से निकलने वाली राख के कारण खेती पर असर पड़ने की शिकायतों का मुद्दा भी उठाया गया. राख के संग्रहण, परिवहन, प्रबंधन और उसके पर्यावरणीय प्रभावों के संबंध में संबंधित विभागों से जानकारी लेने की मांग की गई.
* 24 घंटे बिजली और घर-घर सौर ऊर्जा का प्रस्ताव
सूखे जैसे हालात में किसानों, खेत मजदूरों, व्यापारियों और नागरिकों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे की योजना बनाने पर जोर दिया गया. इसके साथ ही घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए अलग नीति तैयार करने का प्रस्ताव भी रखा गया. घरेलू सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर बिजली व्यवस्था पर दबाव कम करने की दिशा में नीतिगत विचार करने की मांग की गई.
* आवास विभाग के 14 आश्वासनों की कल समीक्षा
समिति की अगली बैठक में आवास विभाग से संबंधित 14 लंबित आश्वासनों की समीक्षा की जाएगी. इस दौरान राज्य के प्रत्येक जिले में अतिरिक्त 2 हजार घर उपलब्ध कराने के लिए नीतिगत निर्णय लेने की मांग रखी जाएगी. आम नागरिकों को किफायती आवास उपलब्ध कराने के लिए सरकारी जमीन, आवास योजनाओं और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी चर्चा प्रस्तावित है.
* कागजी कार्रवाई नहीं, जमीन पर अमल पर जोर
विधानसभा आश्वासन समिति ने स्पष्ट किया कि लंबित आश्वासनों की केवल प्रशासनिक पूर्ति दर्ज करना पर्याप्त नहीं है. आश्वासन वास्तव में किस स्थिति में है, उस पर कितना काम हुआ है और आगे की कार्रवाई कब तक पूरी होगी, इसकी नियमित समीक्षा की जाएगी. संबंधित विभागों को निर्धारित समयसीमा में लंबित आश्वासनों पर कार्रवाई करने के लिए आवश्यक प्रयास करने पर समिति ने जोर दिया. बैठक में उद्योग विभाग के प्रधान सचिव डॉ. पी. अनबलगन, ऊर्जा विभाग की अपर मुख्य सचिव आभा शुक्ला, कामगार विभाग के अपर मुख्य सचिव आई. ए. कुंदन, एमआईडीसी के सीईओ दीपेंद्र सिंह कुशवा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.





