मितव्ययिता करें, किंतु शुरूआत कौन करें ? सामान्य भारतीयों का प्रश्न
मंत्रियों के काफिले छोटे होंगे क्या ?

* पीएम मोदी की अपील पर चहुंओर से प्रतिक्रिया
अमरावती/दि.13 – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्बारा देश के लोगों से किफायत बरतने के आवाहन पर अमरावती के सामान्य लोगों ने नाना रूप में प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि पीएम मोदी ने मितव्ययिता का अवलंबन करने कहा है. इस पर मिश्रित प्रतिक्रिया मिल रही है. साथ ही शुरूआत कौन करें, यह प्रश्न सामान्य जन पूछ रहे हैं. प्रश्न यह भी उठाया जा रहा है कि मितव्ययिता अर्थात किफायत की अपेक्षा केवल नागरिकों से की जा रही है. शासन- प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं है क्या ?. अमरावती में एक कार्यक्रम हेतु केबिनेट मंत्री ने 8 लाख का हेलीकॉप्टर का उपयोग किए जाने का उदाहरण ताजा है. पदाधिकारियों के जन्मदिन और विवाह आदि भी धूमधाम से होते हैं. मंत्री महोदय सहित बडे- बडे लोगों की उपस्थिति रहती है. ऐसे में सामान्य लोगों से ही बचत किए जाने की अपेक्षा क्यों की जा रही है, इस प्रकार की चर्चा जोर पकड रही है.
वाहन पार्क, एसी शुरू
जिलाधिकारी और विभागीय आयुक्त कार्यालय में प्रशासकीय बैठकों हेतु अनेक प्रशासकीय अधिकारी का आना होता है. उनके वाहन पार्किंग में रहते दो- दो घंटे एसी शुरू रखे जाते हैं, रोज ही यह बात देखी जा सकती है. इस साहब गिरी को इंधन की बचत की फटकार कौन लगायेगा, यह सवाल भी नागरिका उठा रहे हैं.
काफिले के वाहन कम होंगे क्या ?
मंत्री महोदय का काफिला निजी सचिव सहित अन्य कुछ लोग सरकारी वाहनों का लाभ लेते हैं. सभी अधिकारी न चूकते हुए दौरे में उपस्थित रहते हैं. इंधन बचत के लिए काफिले के वाहन कम होंगे क्या ? यह प्रश्न पूछ जा रहा है.
यूरिया के उपयोग पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है. जिससे 50 प्रतिशत खाद की बचत हो जायेगी. यहां मितव्ययिता की नीति जरूरी है.
– मिलिंद इंगोले,
अध्यक्ष, जिला कृषि सामग्री विक्रेता संगठन
फिलहाल इंधन विक्री पर खास असर नहीं हुआ है. जिले में डर की कोई बात नहीं है. इस कारण अमरावती में पेट्रोल- डीजल की विक्री पर परिणाम नहीं हुआ है.
– सौरभ जगताप, सचिव पेट्राल पंप डीलर्स असो.
सोने पर आयात शुल्क बढाए जाने से नागरिकों की सोना खरीदी से फिलहाल परहेज करने की मानसिकता बन सकती है. लोग शुल्क कम होने की प्रतीक्षा में मितव्ययिता बरतेंगे.
– राजेंद्र भंसाली, अध्यक्ष, सराफा व्यापारी असो.
छोटे दुकानदारों को इसका झटका लग सकता है. संगठन में 700 सदस्य है. इसके अलावा सैकडों कारागीर है जो सदस्य नहीं है. इन सभी पर भूखमरी की नौबत आ सकती है.
– अजय तीनखेडे,
स्वर्णकार संघ अध्यक्ष





