गडचिरोली, भंडारा अव्वल, नागपुर, संभाजी नगर सबसे पीछे

दो जिलों में स्कूलों की ‘जियो टैगिंग’ पूरी

* 2,000 से अधिक स्कूल अब भी पीछे
पुणे/दि.13– महाराष्ट्र में शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल मानचित्र पर लाने की मुहिम सुस्त दिखाई दे रही है. राज्य के दो हजार से अधिक स्कूलों ने अब तक ‘जियो टैकिंग’ की प्रक्रिया पूरी नहीं की है.
राज्य के 36 जिलों में से केवल गडचिरोली और भंडारा ही ऐसे जिले है, जहां शत-प्रतिशत स्कूलो की ‘जियो टैगिंग’ का काम हुआ है. बाकी जिलों में कार्यवाही लंबित है. इस मामले में संभाजी नगर और नागपुर जिला सबसे पीछे है. छत्रपति संभाजी नगर में 452 स्कूल और नागपुर में 353 स्कूल, जबकि कोल्हापुर में 158 स्कूल, धुलिया में 127 स्कूल, नाशिक में 122 स्कूल, सांगली में 120 स्कूल और जालना जिले के 116 स्कूलों ने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है.

* महा-जीआईएस पोर्टल पर 11 मई तक उपलब्ध आंकडे
कुल स्कूल                1,08,165
जियो टैगिंग पूर्ण         1,06,067
कार्यवाही लंबित         2,098

* चेतावनी : तो होगी विभागीय कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा सह-निदेशक श्रीराम पानझाडे ने सभी विभागीय शिक्षा उप-निदेशकों, शिक्षा अधिकारियों और निरीक्षकों को कडे निर्देश दिए है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि, जिन स्कूलों की ‘जियो टैगिंग’ अधूरी है, उन्हें हर हाल में 13 मई 2026 तक यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी. समय-सीमा का पालन न करनेवाले स्कूल और संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है.

* इसलिए जरुरी
केंद्र सरकार के ‘यू-डाइस प्लस’ पोर्टल पर स्कूलों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और भौतिक सुविधाओं की जानकारी पहले ही उपलब्ध है. स्कूली शिक्षा विभाग के पास गांवों, बस्तियों के सटीक भौगोलिक स्थिति, आबादी का घनत्व और दो स्कूलों के बीच की वास्तविक दूरी जैसे आंकडों का अभाव था. इसे दूर करने के लिए स्कूलों और आंगनवाडियों की ‘जियो टैगिंग’ का निर्णय लिया गया. जिसके लिए ‘महाराष्ट्र रिमोट सेसिंग एप्लीकेशन सेंटर’ के साथ अनुबंध किया गया है. इन आंकडों के आधार पर ही भविष्य में नई स्कूल विकास योजना और बुनियादी सुविधाओं का खाका तैयार किया जाएगा.

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