जी एच रायसोनी विश्वविद्यालय ने उत्साह से मनाया विश्व फार्मासिस्ट दिन
रक्तदान शिइवर समेत विविध कार्यक्रमो का हुआ आयोजन

अमरावती /दि.29– जी एच रायसोनी विश्वविद्यालय, अमरावती (जीएचआरयूए) के स्कूल ऑफ फार्मेसी में विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2026 का आयोजन हालही में किया गया. इस अवसर पर शैक्षणिक, सामाजिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों की श्रृंखला का आयोजन किया गया. इस वर्ष की थीम एक स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना रखी गई, जिसमें रोगी देखभाल, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं समाज के कल्याण में फार्मासिस्टों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया.
कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति डॉ. विनायक देशपांडे ने किया. कार्यक्रम की शुरुआत स्टूडेंट फोरम के औपचारिक उद्घाटन से हुई. यह फोरम छात्रों में नेतृत्व क्षमता, रचनात्मकता, टीमवर्क, संचार कौशल एवं व्यावसायिक दक्षता विकसित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है. इस अवसर पर छात्रों ने पोस्टर प्रस्तुति एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता, वृक्षारोपण अभियान तथा रक्तदान शिविर में सक्रिय रूप से भाग लिया. इन गतिविधियों के माध्यम से छात्रों ने अपनी रचनात्मकता, वैज्ञानिक ज्ञान, सामाजिक जिम्मेदारी तथा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्शित की.
मुख्य अतिथि महाराष्ट्र राज्य फार्मेसी काउंसिल के समन्वयक तथा ड्रगिस्ट्स एंड केमिस्ट्स एसोसिएशन के सचिव डॉ. सागर आंदे ने दिन विशेष पर आधारित विशेष व्याख्यान दिया. उन्होंने फार्मासिस्टों की बदलती भूमिका, रोगी-केंद्रित देखभाल के महत्व तथा स्वस्थ समाज के निर्माण में इस पेशे के योगदान पर प्रकाश डाला. इस अवसर पर कुलपति डॉ. विनायक देशपांडे, कुलसचिव डॉ. स्नेहिल जायसवाल एवं छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. प्रशांत अवचट ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र प्रदान कर सभी प्रतिभागियों की सराहना की .
कार्यक्रम का आयोजन स्कूल ऑफ फार्मेसी के अधिष्ठाता डॉ. नरेंद्र चंद्रा तथा समन्वयक डॉ.बी.वी. नागार्जुन, डॉ. सचिन पडोले एवं सहायक प्रोफेसर अल्ताफ खान के मार्गदर्शन में एनएसएस अधिकारी सहायक प्रोफेसर कैलाश वाधवानी, डॉ. चैताली निमजे, सहायक प्रोफेसर करुणा माकेश्वर, सहायक प्रोफेसर मेघा कोसरकर, सहायक प्रोफेसर समिक्षा अजमीरे, सहायक प्रोफेसर कृतिका हाडोले एवं सहायक प्रोफेसर तन्वी कोकाटे की समिति द्वारा किया गया. शिक्षकेत्तर कर्मचारियों रूपेश कलम्बे एवं गौरव इसल ने भी व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण सहयोग दिया.





