गोपीनाथ मुंडे कांग्रेस में आने वाले थे, रखी थी मंत्री पद की शर्त
नागपुर के दो नेताओं का भी किया था जिक्र

* पूर्व सीएम पृथ्वीराज चव्हाण का नया दावा
मुंबई/दि.15 – महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण के एक दावे से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है. चव्हाण ने दावा किया है कि भाजपा के दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे एक समय कांग्रेस में शामिल होने के इच्छुक थे. उन्होंने कांग्रेस में प्रवेश के लिए मंत्री पद की शर्त भी रखी थी. हालांकि, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के विरोध के कारण यह राजनीतिक घटनाक्रम आगे नहीं बढ़ सका.
चव्हाण ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब गोपीनाथ मुंडे और कांग्रेस के तत्कालीन वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के बीच गुप्त बैठकें हुई थीं. मुंडे कांग्रेस में शामिल होने के लिए तैयार थे, लेकिन उन्होंने मंत्री पद देने की शर्त रखी थी. चव्हाण के मुताबिक, मुंडे का कहना था कि यदि उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया तो नागपुर के दो नेता उन्हें चुनाव जीतने नहीं देंगे.
* सोनिया गांधी ने दी थी हरी झंडी
पृथ्वीराज चव्हाण के अनुसार, गोपीनाथ मुंडे के कांग्रेस में प्रवेश को लेकर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी चर्चा हुई थी. उन्होंने मुंडे के कांग्रेस में आने को मंजूरी दे दी थी. लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विपक्ष के एक सांसद को कांग्रेस में शामिल कर मंत्री बनाने पर आपत्ति जताई थी. इसके चलते मुंडे का कांग्रेस प्रवेश नहीं हो सका. चव्हाण ने कहा कि इस मामले में उन्हें अब भी अफसोस है कि उन्होंने प्रधानमंत्री से चर्चा करने के बजाय सीधे सोनिया गांधी से संपर्क किया था.
* मोदी सरकार पर भी साधा निशाना
पृथ्वीराज चव्हाण ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर दबाव में है और वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर आश्वस्त नहीं है. उन्होंने दावा किया कि बहुमत मजबूत करने के लिए विपक्षी दलों में तोड़फोड़ की जा रही है.
* परिसीमन के मुद्दे पर भी विरोध
चव्हाण ने परिसीमन के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों ने पिछले वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है. ऐसे में परिसीमन लागू होने से क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित हो सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीति विपक्ष को कमजोर करने की है. उन्होंने शरद पवार गुट की परिसीमन को लेकर संभावित भूमिका पर भी कांग्रेस की असहमति जताई. चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर शरद पवार की भूमिका से सहमत नहीं है. साथ ही उन्होंने केंद्र को तंज कसते हुए कहा कि यदि सत्तारूढ़ दल के पास उपयुक्त शिक्षा मंत्री नहीं है, तो देशहित में दूसरे दलों से भी योग्य व्यक्ति को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए.





