गुलाल या केमिकल का मिश्रण? एलर्जी के साथ कैंसर का भी खतरा
गणेश विसर्जन में 300 टन गुलाल इस्तेमाल होने का अनुमान

* केमिकलयुक्त रंगों से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर खतरा
अमरावती/दि. 25 – गणेश विसर्जन के दौरान शहर और जिले में बड़े पैमाने पर गुलाल उड़ाया जाता है. इस वर्ष गणेश मंडलों की ओर से विसर्जन जुलूस की तैयारियों के बीच करीब 300 टन गुलाल इस्तेमाल होने का अनुमान है. ऐसे में बाजार में बिकने वाले केमिकलयुक्त गुलाल को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है.
त्यौहार के मौसम में आकर्षक पैकेजिंग और अलग-अलग रंगों में केमिकलयुक्त गुलाल बाजार में बिक रहा है. इनमें लेड, कॉपर, क्रोमियम और एल्युमिनियम जैसे रासायनिक तत्व पाए जाने की आशंका रहती है. इनके संपर्क में आने से त्वचा और आंखों में जलन, एलर्जी तथा सांस संबंधी परेशानी हो सकती है. लंबे समय तक कुछ हानिकारक रसायनों के संपर्क को गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से जोड़ा गया है. केमिकलयुक्त रंगों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी, पानी और हवा भी प्रदूषित होने का खतरा रहता है. इसलिए विशेषज्ञों की ओर से प्राकृतिक और हर्बल रंगों के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है.
* नियम तोड़ने पर कार्रवाई
क्राइम ब्रांच के पुलिस निरीक्षक अतुल वर के मुताबिक प्रतिबंधित या खतरनाक रसायनों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रशासन की नजर है. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी. हर्बल गुलाल प्राकृतिक सामग्री से तैयार होने के कारण सामान्यतः केमिकलयुक्त रंगों की तुलना में महंगा होता है. नागरिकों से गुलाल खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और सामग्री की जानकारी जांचने की अपील की गई है.





