गांवों में पार्सल कैसे पहुंचेगा? तीन महीने से एसटी की पार्सल सेवा बंद
कॉन्ट्रैक्ट रद्द होने से व्यापारी, किसान और आम नागरिक परेशान

मेडिकल सप्लाई पर भी असर
अमरावती/दि.1– गांवों को शहरों और एक-दूसरे से जोड़ने वाली महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एसटी) की पार्सल सेवा पिछले तीन महीने से बंद है. एसटी महामंडल और संबंधित निजी ठेकेदार के बीच करार रद्द होने के बाद यह स्थिति बनी है. नए ठेकेदार की नियुक्ति की प्रक्रिया अभी जारी होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पार्सल भेजने और मंगाने में लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है.
एसटी की पार्सल सेवा कम खर्च में सामान को दूरदराज के गांवों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम थी. सेवा बंद होने से छोटे व्यापारी, दुकानदार, किसान और आम नागरिकों को निजी कूरियर तथा परिवहन सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है. इससे समय और परिवहन खर्च दोनों बढ़ गए हैं.
* मेडिकल सप्लाई पर भी असर
शहरों से ग्रामीण क्षेत्रों के मेडिकल स्टोर, अस्पताल और डॉक्टरों तक दवाइयां तथा अन्य जरूरी मेडिकल सामग्री भेजने में भी एसटी पार्सल सेवा का उपयोग किया जाता था. सेवा बंद होने के कारण जरूरी सामान समय पर पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं.
* निजी कूरियर का खर्च अधिक
एसटी की तुलना में निजी कूरियर और फ्रेट सेवाओं का खर्च अधिक होने से व्यापारियों और आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. वहीं कई निजी कूरियर कंपनियों की पहुंच तालुका और बड़े शहरों तक ही सीमित है. ऐसे में दूरदराज के गांवों तक पार्सल पहुंचाना चुनौती बना हुआ है.
* नए ठेकेदार की नियुक्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया
एसटी की ओर से नए ठेकेदार की नियुक्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी है. हालांकि, प्रक्रिया पूरी होने और नई एजेंसी के काम संभालने में अभी समय लग सकता है. फिलहाल एसटी के बस स्टैंड स्थित पार्सल बुकिंग और डिलीवरी काउंटर बंद हैं. सेवा कब तक दोबारा शुरू होगी, इसे लेकर ग्रामीण नागरिकों और व्यापारियों में इंतजार बना हुआ है.





