दहेज मृत्यु मामले में पति को अग्रिम जमानत

वर्धा जिला न्यायालय का आदेश

* एड. चिंतन ताम्हणे की सफल पैरवी
वर्धा /दि.21 दहेज मृत्यु के गंभीर मामले में आरोपी पति को वर्धा जिला एवं सत्र न्यायालय ने अग्रिम जमानत प्रदान की है. इस मामले में आरोपी पति की ओर से अधिवक्ता चिंतन संदीप ताम्हणे ने प्रभावी पैरवी की. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, न्यायालय क्रमांक-2, वर्धा, एस.ए.एस.एम. अली ने सुनवाई करते हुए आवेदन मंजूर किया.
प्रकरण के मुताबिक मृतका रोशनी का विवाह 27 मार्च 2024 को आरोपी से हुआ था. आरोपी सेना में कार्यरत था और घटना के समय अपनी पोस्टिंग के स्थान पर रह रहा था. अभियोजन के अनुसार मृतका के साथ दहेज की मांग, मारपीट तथा अन्य प्रकार से प्रताड़ना किए जाने के आरोप लगाए गए थे. 11 जुलाई 2026 को रोशनी द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने के बाद उसके रिश्तेदार की रिपोर्ट पर सिंदी (रेलवे) पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया. मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 80, 85 एवं 3(5) के तहत आरोप दर्ज किए गए. अभियोजन की ओर से आरोपी को मुख्य आरोपी बताते हुए उसकी गिरफ्तारी एवं पुलिस हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता जताई गई थी. वहीं बचाव पक्ष की ओर से यह महत्वपूर्ण तथ्य न्यायालय के समक्ष रखा गया कि घटना के समय आरोपी अपनी पोस्टिंग के स्थान पर था और घटनास्थल से काफी दूर था. साथ ही आरोपों को अस्पष्ट एवं सामान्य प्रकृति का बताया गया.
न्यायालय ने मामले के रिकॉर्ड एवं केस डायरी का अवलोकन करने के बाद पाया कि वाहन खरीदने के लिए पांच लाख रुपये की कथित मांग के संबंध में कोई विशिष्ट घटना सामने नहीं आती. न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि उपलब्ध मोबाइल चैट में कथित विवाहेतर संबंध का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है. महत्वपूर्ण रूप से, घटना के समय आरोपी मृतका के साथ था, बल्कि अपनी पोस्टिंग पर था. इन परिस्थितियों में न्यायालय ने प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 लागू होने पर संदेह व्यक्त किया. पुलिस द्वारा आरोपी के मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए हिरासत आवश्यक बताए जाने पर न्यायालय ने कहा कि मृतका को भेजे गए कथित संदेश पहले ही जांच अधिकारी द्वारा प्राप्त किए जा चुके हैं और आरोपी को मोबाइल जांच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जा सकता है. इसलिए इस उद्देश्य से आरोपी की हिरासत आवश्यक नहीं है. न्यायालय ने यह भी ध्यान में लिया कि आरोपी रक्षा बल में कार्यरत है, उसका पोस्टिंग स्थान घटनास्थल एवं गवाहों के निवास से दूर है तथा उसके कोई आपराधिक पूर्ववृत्त नहीं हैं. न्यायालय ने माना कि उसके फरार होने या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका पर्याप्त नहीं है और उसकी गिरफ्तारी से संरक्षण आवश्यक है.
इसके बाद न्यायालय ने आरोपी को 50 हजार रुपए के व्यक्तिगत मुचलके तथा समान राशि के एक जमानतदार पर अग्रिम जमानत प्रदान की. आरोपी को प्रत्येक सोमवार एवं गुरुवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक सिंदी (रेलवे) पुलिस थाने में उपस्थित रहने तथा जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही गवाहों को प्रभावित न करने, पासपोर्ट जमा करने तथा न्यायालय की अनुमति के बिना भारत से बाहर न जाने जैसी शर्तें भी लगाई गई हैं. इस आदेश को दहेज मृत्यु के गंभीर आरोपों में गिरफ्तारी की आवश्यकता, आरोपी की घटना के समय भौगोलिक स्थिति तथा हिरासत में जांच की वास्तविक आवश्यकता के संबंध में महत्वपूर्ण न्यायिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है.

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