मन करता है सवाल पूछने की बजाए दो थप्पड लगाए जाए

विधान परिषद में विधायक बच्चू कडू का आक्रामक तेवर

* सरकार और अफसरशाही पर बरसे; मंत्री जयकुमार गोरे के खिलाफ हक्कभंग प्रस्ताव भी दायर
* विधायक बच्चू कडू व प्रविण दरेकर फिर हुए आमने-सामने, शाब्दिक तनातनी हुई
* थप्पड शब्द पर उपसभापति सचिन अहीर ने जताई आपत्ति, कडू ने मांगी माफी
मुंबई/दि.10- महाराष्ट्र विधान परिषद के मानसून सत्र में शुक्रवार को विधायक बच्चू कडू का आक्रामक रूप देखने को मिला. दिव्यांगों, अनाथों, भिक्षुकों और एकल महिलाओं के मुद्दों पर सरकार और प्रशासन के खिलाफ तीखी नाराजगी जताने के साथ ही उन्होंने ग्रामविकास मंत्री जयकुमार गोरे पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ हक्कभंग प्रस्ताव भी पेश किया. इस समय विधायक बच्चू कडू व विधायक प्रविण दरेकर एक बार फिर आमने-सामने होते दिखाई दिए और दोनों के बिच जबरदस्त शाब्दिक तनातनी भी हुई. इस दौरान उनके एक विवादित बयान पर सदन में हलचल मच गई, जब बच्चू कडू ने कहा कि, कभी-कभी उनका मन करता है, सवाल पूछने की बजाए दो थप्पड लगाए जाए. इस बात पर उपसभापति सचिन अहीर ने तत्काल आपत्ति दर्ज कराई. जिसके बाद विधायक बच्चू कडू ने अपने द्वारा कही गई बात पर खेद जताते हुए थप्पड वाली बात को सदन की कार्रवाई में शामिल नहीं किए जाने का अनुरोध किया.
सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग कल्याण विभाग पर चर्चा के दौरान बच्चू कडू ने कहा कि दिव्यांगों, अनाथों, भिक्षुकों और एकल महिलाओं से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रस्ताव वर्षों से लंबित पड़े हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों का भी प्रशासनिक स्तर पर पालन नहीं हो रहा है. कडू ने कहा कि महाराष्ट्र में दिव्यांगों के लिए अलग मंत्रालय स्थापित किया जाना सराहनीय कदम है और इसके लिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बधाई के पात्र हैं, लेकिन केवल मंत्रालय बनाने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मुख्यमंत्री के आदेशों का पालन नहीं हो रहा है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी. उन्होंने दिव्यांगों के लिए मासिक आर्थिक सहायता बढ़ाने, स्वतंत्र उद्योग एवं खेल नीति बनाने, बजट में पांच प्रतिशत निधि सुनिश्चित करने, विशेष कोष निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहनों के वितरण, मूक-बधिर विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा तथा सरकारी नौकरियों में अतिरिक्त लाभ देने जैसी कई मांगें रखीं.
* ‘दो थप्पड़ मारने का मन करता है’ बयान पर विवाद
विशेष सहायता योजना के तहत दिव्यांगों से अनावश्यक दस्तावेज मांगे जाने का मुद्दा उठाते समय बच्चू कडू भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि समस्याएं वर्षों से जस की तस बनी हुई हैं और कभी-कभी ऐसा लगता है कि प्रश्न पूछने से बेहतर दो थप्पड़ मार दिए जाएं. उनके इस बयान पर उपसभापति सचिन अहीर ने तत्काल आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे शब्द सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं. इसके बाद कडू ने तुरंत माफी मांगते हुए कहा कि यह शब्द अनजाने में निकल गया और उन्होंने टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाने का अनुरोध किया.
* दरेकर के बिच में बोलने पर भडके बच्चू कडू, किया पलटवार
विधान परिषद की कार्रवाई जारी रहने के दौरान भाजपा विधायक प्रविण दरेकर तथा शिंदे गुट के विधायक बच्चू कडू आज एक बार फिर आमने-सामने होते दिखाई दिए. विधायक प्रविण दरेकर का कहना रहा कि मंत्रियों का वक्तव्य जारी रहते समय बच्चू कडू हमेशा ही बिच में बोलकर कार्रवाई को बाधित करते है. जिस पर पलटवार करते हुए बच्चू कडू ने कहा कि, सभापति का वक्तव्य जारी रहते समय प्रविण दरेकर बिच में बोल रहे है, यह ठिक नहीं है. महायुती के दोनों विधायकों के बिच मची इस तनातनी को सभापति राम शिंदे ने मध्यस्थता करते हुए शांत कराया.
* अनाथ, भिक्षुक और एकल महिलाओं के लिए विशेष योजनाओं की मांग
बच्चू कडू ने कहा कि आज भी मंत्रालय परिसर के आसपास छोटे बच्चे भीख मांगते दिखाई देते हैं, लेकिन उनके पुनर्वास के लिए प्रभावी व्यवस्था नहीं है. उन्होंने भिक्षुक शब्द को बदलने तथा पुनर्वास नीति को मजबूत करने की मांग की. अनाथ बच्चों के लिए 21 वर्ष की आयु के बाद आवास, रोजगार और आर्थिक सुरक्षा की व्यवस्था करने की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने विशेष घरकुल योजना, आर्थिक सहायता तथा बीमा आधारित बचत योजना शुरू करने का सुझाव दिया. एकल महिलाओं के लिए पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना, बच्चों की शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा के लिए अलग नीति बनाए जाने की भी मांग की गई.
* मंत्री जयकुमार गोरे के खिलाफ हक्कभंग प्रस्ताव
इसी बीच बच्चू कडू ने ग्रामविकास मंत्री जयकुमार गोरे के खिलाफ विधान परिषद में हक्कभंग प्रस्ताव पेश कर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी. कडू ने आरोप लगाया कि ग्रामपंचायत संगणक परिचालकों के मानधन और वेतन संबंधी प्रश्न पर मंत्री गोरे ने सदन में गलत जानकारी दी. मंत्री ने दावा किया था कि संगणक परिचालक 50 हजार रुपये तक की आय अर्जित करते हैं, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है. कडू ने कहा कि मंत्री ने बार-बार तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी देकर सदन को गुमराह किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि संगणक परिचालकों को कमीशन आधारित वेतन मिलने की बात भी तथ्यहीन है, क्योंकि उनका भुगतान ग्रामपंचायत स्तर पर किया जाता है.
* पुराना राजनीतिक विवाद फिर आया सामने
राजनीतिक जानकारों के अनुसार बच्चू कडू और जयकुमार गोरे के बीच विधानसभा चुनावों के समय से ही मतभेद चले आ रहे हैं. चुनाव के दौरान कडू ने माण-खटाव क्षेत्र में उम्मीदवार उतारने की घोषणा की थी, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक तल्खी बढ़ गई थी. अब ग्रामपंचायत संगणक परिचालकों के मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है. कडू ने यहां तक कह दिया था कि यदि मंत्री का दावा सही साबित हुआ तो वे अपनी मूंछ मुंडवा देंगे.
* सभापति ने मांगा विभाग से स्पष्टीकरण
हक्कभंग प्रस्ताव पर कार्रवाई करते हुए विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने संबंधित विभाग से विस्तृत स्पष्टीकरण तलब किया है. उन्होंने कहा कि विभागीय जवाब प्राप्त होने के बाद ही इस मामले पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
* सत्र में चर्चा का केंद्र बने बच्चू कडू
एक ही दिन में दिव्यांगों के मुद्दे पर सरकार को कठघरे में खड़ा करना, विवादित टिप्पणी के कारण सदन में चर्चा का विषय बनना और फिर मंत्री जयकुमार गोरे के खिलाफ हक्कभंग प्रस्ताव लाना-इन घटनाओं ने बच्चू कडू को विधान परिषद सत्र के सबसे चर्चित नेताओं में शामिल कर दिया है. अब सभी की नजर विभागीय स्पष्टीकरण और हक्कभंग प्रस्ताव पर होने वाली आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है.

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