एग्रीमेंट वैध है तो संपत्ति के ट्रांसफर पर अंतरिम रोक उचित

नागपुर हाईकोर्ट का अहम फैसला

* प्रतिवादी ने खुद माना था जमीन के सौदे का एग्रीमेंट और 2 लाख रुपये की रकम
* अमरावती के जमीन विवाद में नागपुर हाईकोर्ट ने निचली अदालतों के आदेश को रखा बरकरार, रिट याचिका खारिज
नागपुर/अमरावती/दि.6- जमीन के सौदे से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रतिवादी स्वयं संपत्ति के लिए किए गए परचेज एग्रीमेंट के अस्तित्व और उसके तहत रकम स्वीकार करने की बात मान चुका है, तो मुख्य मामला लंबित रहने के दौरान संपत्ति को किसी तीसरे व्यक्ति को बेचने अथवा ट्रांसफर करने से रोकने के लिए अंतरिम निषेधाज्ञा (इंटरिम इंजंक्शन) देना उचित है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरिम राहत के स्तर पर न्यायालय को मुख्य मुकदमे का ‘मिनी ट्रायल’ नहीं करना चाहिए.
जस्टिस नंदेश देशपांडे ने अमरावती निवासी पुष्पक अन्ना मेश्राम की रिट याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत तथा जिला अदालत द्वारा संपत्ति के हस्तांतरण पर लगाई गई अंतरिम रोक को बरकरार रखा. हाई कोर्ट ने माना कि निचली अदालतों के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कानूनी आधार नहीं है.
* 2021 में हुआ था जमीन के सौदे का एग्रीमेंट
मामले के मुताबिक अमरावती की रीता अनिल उमठे, अंकलेश राम गुरबानी और प्रज्वल संजय शहाकार ने जमीन के सौदे से संबंधित एग्रीमेंट को लागू कराने के लिए पुष्पक अन्ना मेश्राम के खिलाफ अमरावती की अधीनस्थ अदालत में सिविल मुकदमा दायर किया था. दोनों पक्षों के बीच 27 जुलाई 2021 को जमीन के लेन-देन के संबंध में एग्रीमेंट हुआ था. वादियों का कहना था कि उन्होंने इस सौदे के तहत 2 लाख रुपये बतौर रकम दी थी. मुख्य मुकदमा लंबित रहने के दौरान प्रतिवादी जमीन को किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में बेच न सके अथवा उसका हस्तांतरण न कर सके, इसके लिए वादियों ने अदालत से अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी.
* ‘मिनी ट्रायल’ नहीं कर सकती अदालत
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रतिवादी ने स्वयं एग्रीमेंट होने तथा 2 लाख रुपये की रकम स्वीकार किए जाने की बात मानी है. ऐसी स्थिति में मुख्य मुकदमे के अंतिम निर्णय तक संपत्ति की स्थिति बनाए रखने के लिए अंतरिम रोक लगाया जाना अनुचित नहीं है. अदालत ने यह भी कहा कि अंतरिम रोक की अर्जी पर विचार करते समय न्यायालय से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह पूरे मामले का ‘मिनी ट्रायल’ करे. वादी वास्तव में जमीन खरीदने के लिए तैयार और इच्छुक था या नहीं, यह सवाल मुख्य मुकदमे की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर तय किया जाएगा.
* जिला अदालत ने भी रोक को रखा था बरकरार
हाईकोर्ट के समक्ष यह भी सामने आया कि पुष्पक मेश्राम ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ अमरावती जिला अदालत में अपील दायर की थी. जिला न्यायाधीश ने 11 अगस्त को उनकी अपील खारिज करते हुए संपत्ति के हस्तांतरण पर लगाई गई अंतरिम रोक को बरकरार रखा था. इसके बाद मेश्राम ने जिला अदालत के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी. हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि निचली अदालत और जिला अदालत ने उपलब्ध तथ्यों एवं परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अंतरिम रोक लगाई थी. इन आदेशों में कोई स्पष्ट कानूनी त्रुटि अथवा अवैधता नहीं पाई गई.
* ‘दोनों अदालतों ने तथ्यों पर विचार किया’
वादियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता आनंद परचुरे ने हाई कोर्ट में दलील दी कि दोनों निचली अदालतों ने मामले के सभी महत्वपूर्ण तथ्यों पर विचार करने के बाद अंतरिम रोक का आदेश दिया है. सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि प्रतिवादी ने स्वयं एग्रीमेंट के अस्तित्व को स्वीकार किया है. ऐसे में निचली अदालतों के आदेश में हाई कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप किए जाने का कोई आधार नहीं है. इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद जस्टिस नंदेश देशपांडे ने पुष्पक मेश्राम की रिट याचिका मेरिट के आधार पर खारिज कर दी. इस फैसले के साथ जमीन के हस्तांतरण पर लगाई गई अंतरिम रोक फिलहाल कायम रहेगी और एग्रीमेंट को लागू कराने से संबंधित मुख्य सिविल मुकदमे का निर्णय साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर किया जाएगा.

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