एआई के दौर में पत्रकारिता की विश्वसनीयता और मूल्यों को बचाने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी की

संपादक अनिल अग्रवाल ने भावी पीढ़ी के पत्रकारों का किया मार्गदर्शन

* आईआईएमसी अमरावती में सत्रारंभ समारोह के अवसर पर विशेष व्याख्यान
* कहा – राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और तथ्यपरक पत्रकारिता ही मीडिया की असली पहचान
अमरावती/दि.15 – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सोशल मीडिया और एल्गोरिदम आधारित सूचना तंत्र के तेजी से विस्तार के बीच पत्रकारिता की विश्वसनीयता और उसके मूल्यों को बनाए रखना आज की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है. ऐसे समय में प्रिंट मीडिया अब भी समाज के सबसे भरोसेमंद माध्यम के रूप में देखा जाता है और इस विश्वास को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भावी पत्रकारों के कंधों पर है. यह विचार वरिष्ठ पत्रकार, अमरावती मंडल एवं आपली मातृभूमि के संपादक तथा जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने व्यक्त किए.
वे भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी), अमरावती परिसर में पत्रकारिता पाठ्यक्रम में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित सत्रारंभ कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे. इस अवसर पर उन्होंने बदलते परिवेश में भारतीय मीडिया विषय पर विस्तृत मार्गदर्शन करते हुए मीडिया जगत के सामने खड़ी चुनौतियों, नई तकनीकों के प्रभाव और पत्रकारिता के मूल्यों पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम की अध्यक्षता आईआईएमसी के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. राजेश सिंह कुशवाहा ने की.
* सूचना की बाढ़ में सच की पहचान सबसे बड़ी चुनौती
संपादक अनिल अग्रवाल ने कहा कि एआई और एल्गोरिदम के वर्तमान युग में आम लोगों तक पहुंचने वाली अनेक जानकारियां किसी न किसी उद्देश्य से तैयार और प्रसारित की जाती हैं. सूचना के प्रसार की गति इतनी तेज हो गई है कि किसी घटना के घटित होने और उसके समाचार बनने के बीच का अंतर अब कुछ मिनटों तक सीमित रह गया है. ऐसे माहौल में लोगों के पास जानकारी की सत्यता परखने का पर्याप्त समय नहीं होता. उन्होंने कहा कि यही कारण है कि आज भी पाठक प्रिंट मीडिया को अधिक विश्वसनीय मानते हैं. पत्रकारों की यह जिम्मेदारी है कि वे तथ्यों की जांच-पड़ताल कर निष्पक्ष और प्रमाणिक जानकारी समाज तक पहुंचाएं. पत्रकारिता केवल खबर देने का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतंत्र और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का एक महत्वपूर्ण साधन है.
* सोशल मीडिया ने बढ़ाई पारदर्शिता, लेकिन सावधानी भी जरूरी
अपने संबोधन में संपादक अनिल अग्रवाल ने कहा कि सोशल मीडिया के प्रसार ने सूचना जगत को पूरी तरह बदल दिया है. अब कोई भी घटना लंबे समय तक छिपी नहीं रह सकती और हाल के कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग अत्यंत सजगता और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के प्रति अशोभनीय और गैर-जिम्मेदार टिप्पणियां न केवल लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध हैं, बल्कि समाज में नकारात्मक वातावरण भी निर्मित करती हैं. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है.
* एल्गोरिदम नियंत्रित कर रहे हैं सोच और व्यवहार
संपादक अनिल अग्रवाल ने मीडिया के बदलते स्वरूप पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पारंपरिक मीडिया पर अब एल्गोरिदम आधारित मीडिया का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ता क्या देखेगा, क्या पढ़ेगा और किस विषय पर सोच विकसित करेगा, इसका निर्धारण बड़े पैमाने पर एल्गोरिदम करने लगे हैं. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया केवल सूचना तक सीमित नहीं है, बल्कि मनुष्य की सोच, निर्णय क्षमता और आर्थिक व्यवहार को भी प्रभावित कर रही है. आने वाले समय में इसके सामाजिक, आर्थिक और मानसिक स्तर पर दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं. इसलिए पत्रकारों को तकनीक का उपयोग करते हुए भी मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और तथ्यपरकता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी.
* राष्ट्रहित और सामाजिक समरसता सर्वोपरि
अपने वक्तव्य में संपादक अनिल अग्रवाल ने स्पष्ट कहा कि पत्रकारिता के मूल्यों के साथ-साथ देश की सुरक्षा और सामाजिक समरसता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि किसी भी पत्रकार का पहला दायित्व राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना होना चाहिए. उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे पत्रकारिता को केवल करियर के रूप में न देखें, बल्कि इसे समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने के अवसर के रूप में स्वीकार करें. उन्होंने कहा कि मीडिया की शक्ति समाज को दिशा देने की क्षमता रखती है और इसलिए पत्रकारों का दायित्व अन्य पेशों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक होता है.
* जेन-जी में जिज्ञासा का भाव आवश्यक
युवा विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए संपादक अनिल अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को अपनी जिज्ञासा और सीखने की क्षमता को लगातार विकसित करना चाहिए. किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने और व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने के पीछे जिज्ञासा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. जो व्यक्ति प्रश्न पूछना नहीं छोड़ता, वही आगे बढ़ता है और नई संभावनाओं को तलाश पाता है.
* तथ्य-जांच के बिना किसी जानकारी पर विश्वास न करें – डॉ. कुशवाहा
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए क्षेत्रीय निदेशक डॉ. राजेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि आज समाज को ऐसी पत्रकारिता की आवश्यकता है जो राष्ट्र प्रथम की भावना से प्रेरित हो. उन्होंने कहा कि तकनीक के इस दौर में सूचनाओं का विस्फोट हुआ है और प्रतिदिन करोड़ों जानकारियां लोगों तक पहुंच रही हैं. ऐसे में यह मान लेना कि हर सूचना सत्य है, एक बड़ी भूल होगी. उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि किसी भी रील, वीडियो, पोस्ट या लिखित सामग्री पर विश्वास करने से पहले उसकी तथ्य-जांच अवश्य करें. उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि लेखनी ने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर सामाजिक परिवर्तन तक, पत्रकारिता ने हमेशा समाज को नई दिशा दी है. उन्होंने आशा व्यक्त की कि आईआईएमसी के विद्यार्थी इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएंगे और जिम्मेदार पत्रकार बनकर समाज की सेवा करेंगे.
* विद्यार्थियों का उत्साह, संस्थान परिवार की सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. विनोद निताले के प्रास्ताविक से हुई. कार्यक्रम का संचालन प्रिया और प्रज्वल वरुडकर ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन निकिता काकड़ ने किया. अतिथियों का परिचय नव्या श्रीवास्तव ने कराया. कार्यक्रम को सफल बनाने में राजेश कुमार, राजेश झोलेकर, नूरुज्जमा शेख, भूषण मोहोकार, अनंत नांदुरकर, नंदा तुप्पट तथा राहुल पाटमासे सहित संस्थान के अनेक सदस्यों ने विशेष योगदान दिया. सत्रारंभ कार्यक्रम के माध्यम से नवप्रवेशित विद्यार्थियों को पत्रकारिता के बदलते परिदृश्य, तकनीकी चुनौतियों और नैतिक दायित्वों की गहन समझ प्राप्त हुई. वक्ताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि एआई और डिजिटल युग में भी पत्रकारिता की वास्तविक ताकत उसकी विश्वसनीयता, निष्पक्षता और समाज के प्रति प्रतिबद्धता में ही निहित है.

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