इर्विन चौक की जगह को लेकर किशोर गट्टाणी की याचिका नागपुर हायकोर्ट में खारिज
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक के विस्तार व सौंदर्यीकरण का रास्ता साफ

* जमीन को लेकर एक दशक से चल रहा था विवाद, अदालत में हुआ पटापेक्ष
अमरावती/दि.13- अमरावती शहर के इर्विन चौक स्थित भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के पुतले एवं प्रस्तावित स्मारक परिसर से जुड़े बहुचर्चित भूमि विवाद में नागपुर स्थित बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए जमिन मालिक चंद्रशेखर उर्फ किशोर गट्टाणी द्वारा दायर रिट याचिका क्रमांक 3488/2016 खारिज कर दी है. न्यायालय के इस निर्णय के साथ ही लगभग एक दशक से लंबित स्मारक विस्तार और सौंदर्यीकरण परियोजना का मार्ग प्रशस्त हो गया है. हाईकोर्ट के फैसले के बाद शहर में इस मामले को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है. सामाजिक संगठनों, आंबेडकरवादी कार्यकर्ताओं और स्मारक समर्थकों ने न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है.
ज्ञात रहे कि, पूर्व महापौर विलास इंगोले, कांग्रेस के शहराध्यक्ष व पार्षद बबलू शेखावत, राकांपा पार्षद मंगेश मनोहरे व बसपा पार्षद सचिन वैद्य द्वारा इर्विन चौक पर डॉ. आंबेडकर पुतला परिसर के पिछे स्थित खाली पडी जमिन पर स्मारक साकार करने से संबंधित मुद्दे कोे मनपा की आमसभा में भी उठाया गया था और इस विषय का पूरजोर समर्थन भी किया गया था. इसके साथ ही कई आंबेडकरवादी संगठन भी इस जमिन को पुतला व स्मारक परिसर विकसीत करने हेतु उपलब्ध कराए जाने के पक्ष में थे और इस विषय को लेकर शहर में कई बार आंदोलन की भूमिका भी बनी. ऐसे में जनभावनाओं को देखते हुए जमिन मालिक चंद्रशेखर उर्फ किशोर गट्टाणी को समझाने व जमिन का समुचित मुआवजा देने का अनेकों बार प्रयास किया गया. लेकिन इसके बावजूद यह मामला अदालत तक पहुंचा और आज हाईकोर्ट ने इस मामले का एक तरह से पटापेक्ष हो गया. जहां पर हायकोर्ट ने किशोर गट्टाणी की याचिका डिसमिस यानी खारिज करते हुए इर्विन चौक पर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के पुतला व स्मारक परिसर को साकार करने हेतु जमिन अधिग्रहण के मुद्दे का रास्ता साफ कर दिया है.
* 603 स्केअर मीटर जमीन को लेकर था विवाद
बता दे कि, यह पूरा मामला इर्विन चौक स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर प्रतिमा के उत्तर दिशा में स्थित अमरावती शीट क्रमांक-41 के भूखंड क्रमांक-1 के लगभग 603 वर्गमीटर निजी भूखंड से जुड़ा हुआ है. यह भूमि गट्टाणी परिवार के स्वामित्व में थी, जहां पूर्व में पेट्रोल पंप संचालित किया जाता था. परंतु वर्तमान में यह भूमि खाली पड़ी है. जिसके चलते अमरावती महानगरपालिका ने डॉ. आंबेडकर प्रतिमा परिसर के विस्तार, सौंदर्यीकरण, म्यूरल वॉल निर्माण, शिल्प विकास तथा स्मारक परिसर को भव्य स्वरूप देने के उद्देश्य से इस भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव वर्ष 2012 में पारित किया था.
* 1971 से नगर परिषद के अधीन है प्रतिमा परिसर
दस्तावेजों के अनुसार इर्विन चौक स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा जिस भूमि पर स्थापित है, वह मूल रूप से शासकीय भूमि है. तत्कालीन जिलाधिकारी के 30 दिसंबर 1971 के आदेश के तहत यह भूमि नगर परिषद अमरावती को हस्तांतरित की गई थी. इसके बाद तत्कालीन जिला परिषद ने वर्ष 1972 में डॉ. आंबेडकर की पूर्णाकृति प्रतिमा का निर्माण कराया और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी नगर परिषद को सौंप दी. तब से यह परिसर नगर निकाय के अधीन है.
* 2012 में शुरू हुई थी अधिग्रहण प्रक्रिया
प्रतिमा परिसर को विस्तारित कर भव्य स्मारक विकसित करने के उद्देश्य से महानगरपालिका की स्थायी समिति ने 13 अप्रैल 2012 को निजी भूमि अधिग्रहित करने का प्रस्ताव मंजूर किया था. इसके बाद संबंधित प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजा गया और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई. भूमि की माप-जोख जनवरी 2016 में की गई और भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने मुआवजे की राशि निर्धारित की.
* 3.39 करोड़ रुपये मुआवजे के लिए जमा
भूमि अधिग्रहण अधिकारी द्वारा निर्धारित मुआवजे के अनुसार कुल 3 करोड़ 39 लाख 98 हजार 660 रुपये की राशि विभिन्न स्रोतों से जमा कराई गई थी. इसमें महानगरपालिका निधि, जिला वार्षिक योजना निधि तथा अन्य सरकारी मदों से प्राप्त राशि शामिल थी. प्रशासन द्वारा संपूर्ण मुआवजा राशि भूमि अधिग्रहण अधिकारी के पास जमा कर दी गई थी.
* 2016 में जारी हुई थीं अधिसूचनाएं
भूमि अधिग्रहण, पुनर्वसन एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर तथा पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 के तहत कलम 11 की अधिसूचना 11 जनवरी 2016 तथा कलम 19 की अधिसूचना 31 मई 2016 को जारी की गई थी. इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण की कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया.
* हाईकोर्ट पहुंचा था मामला
भूमि अधिग्रहण का विरोध करते हुए चंद्रशेखर (किशोर) गट्टाणी ने वर्ष 2016 में नागपुर हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी. 24 जून 2016 को न्यायालय ने यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे, जिसके कारण परियोजना वर्षों तक अटकी रही. इसके बाद अमरावती महानगरपालिका, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने न्यायालय के समक्ष कई शपथपत्र और दस्तावेज प्रस्तुत किए. मामले की सुनवाई के दौरान स्मारक की सार्वजनिक उपयोगिता और सामाजिक महत्व पर भी जोर दिया गया.
* विधानसभा और मंत्रालय तक पहुंचा था मुद्दा
यह मामला केवल न्यायालय तक सीमित नहीं रहा. वर्ष 2023 में महाराष्ट्र विधानसभा में भी यह मुद्दा उठाया गया था. इसके बाद दिसंबर 2023 में तत्कालीन राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में नागपुर में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें भूमि अधिग्रहण और स्मारक विकास की स्थिति की समीक्षा की गई.
* मई 2026 में पूरी हुई अंतिम सुनवाई
5 मई 2026 को हुई अंतिम सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था. बाद में अदालत ने गट्टाणी की याचिका खारिज करते हुए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के रास्ते में बनी कानूनी बाधा समाप्त कर दी.
* 50 लाख रुपये की विकास योजना पहले ही मंजूर
राज्य सरकार ने अक्टूबर 2022 में इर्विन चौक स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर प्रतिमा परिसर के सामने सौंदर्यीकरण एवं निर्माण कार्य के लिए 50 लाख रुपये की मंजूरी प्रदान की थी. इस विकास कार्य के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को सौंपी गई है.
* अब स्मारक विकास को मिलेगी रफ्तार
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक परिसर के विस्तार, म्यूरल वॉल निर्माण, आधुनिक सौंदर्यीकरण, शिल्प विकास तथा अन्य प्रस्तावित कार्यों को गति मिलने की संभावना बढ़ गई है. प्रशासनिक स्तर पर भी आगे की कार्रवाई को लेकर हलचल तेज हो गई है. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि फैसले की विस्तृत प्रति आने के बाद इसके सभी पहलू स्पष्ट होंगे. साथ ही यह भी देखना होगा कि याचिकाकर्ता इस निर्णय को उच्च स्तर पर चुनौती देते हैं या नहीं. फिलहाल, न्यायालय के इस फैसले को अमरावती में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक विकास परियोजना के लिए एक बड़ी कानूनी और प्रशासनिक सफलता माना जा रहा है.

* सुप्रीम कोर्ट में करेंगे अपील
आज नागपुर हायकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के संदर्भ में जानकारी एवं प्रतिक्रिया हेतु संपर्क किए जाने पर किशोर गट्टाणी द्वारा कहा गया कि, वे फिलहाल अमरावती से बाहर है और उन्हें नागपुर हायकोर्ट में हुए फैसले की जानकारी नहीं है. लेकिन यदि उनकी याचिका को नागपुर हायकोर्ट द्वारा खारिज किया गया है. तो वे निश्चित तौर पर सुप्रीम कोर्ट में जाकर अपनी जमीन का ताबा खुद को ही मिलने हेतु अपील करेंगे.





