विदर्भ के नये मेडिकल कॉलेजों की जबर्दस्त अनदेखी
6 मेडिकल कॉलेजों में अध्यापकों का अकाल

* अ. नगर के जीएमसी पर विशेष मेहरबानी
* एक साथ 72 अध्यापकों की सेवा की गई वर्ग
अमरावती/दि.17- राज्य में नये शुरू हुए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जहां एक ओर अध्यापकों के पद बडे पैमाने पर रिक्त पडे हैं. वहीं दूसरी ओर वैद्यकीय शिक्षा विभाग अहिल्या नगर में नवनिर्मित पुण्यश्लोक अहिल्या देवी होल्कर शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय में राष्ट्रीय आर्युविज्ञान आयोग के मानकों की पूर्तता करने हेतु महज एक माह के भीतर करीब 72 अध्यापकों की सेवाओं को वर्ग किया है. जिसे लेकर आश्चर्य जताया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर विदर्भ के अमरावती, वाशिम, बुलढाणा, हिंगणघाट (वर्धा), भंडारा व गडचिरोली सहित अन्य कॉलेजों में अध्यापकों की जबर्दस्त किल्लत रहने के बावजूद सरकार द्बारा इस पर अनदेखी की जा रही है. जिसे लेकर विदर्भ क्षेत्रवासियों में काफी हद तक रोष व असंतोष व्याप्त है.
बता दें कि अहिल्या नगर में 100 विद्यार्थियों की क्षमता वाला सरकारी मेडिकल कॉलेज शुरू करने को लेकर सरकार द्बारा 23 मई 2025 को मान्यता दी गई. जिसके बाद सन 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से एमबीबीएस पाठ्यक्रम शुरू करने हेतु आवश्यक फैकल्टी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य के अलग-अलग सरकारी मेडिकल कॉलेजों के अध्यापकों को बडे पैमाने पर सेवावर्ग करते हुए अहिल्यानगर के नवनिर्मित सरकारी मेडिकल कॉलेज से संलग्नित किया गया. वैद्यकीय शिक्षा विभाग द्बारा 10 जून 2026 को जारी किए गये आदेशानुसार 51 अध्यापकों को अहिल्या नगर में सेवावर्ग किया गया है. जिनमें 14 प्राध्यापक, 13 सहयोगी प्राध्यापक व 24 सहायक प्राध्यापक का समावेश है. इन सभी अध्यापकों को नागपुर, मिरज, अलीबाग, छत्रपति संभाजी नगर, पुणे, सोलापुर, सातारा, अंबाजोगाई, लातुर, वाशिम, बारामती, परभणी, जलगांव व कोल्हापुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से स्थलांतरित किया गया है.
* अगले एक माह में ही और 21 अध्यापक सेवावर्ग
इसके उपरांत महज एक माह के भीतर ही 9 जुलाई 2026 को दुबारा आदेश जारी करते हुए अन्य 21 अध्यापकों को सेवावर्ग किया गया. जिनमें तीन प्राध्यापक, 6 सहयोगी प्राध्यापक व 12 सहायक प्राध्यापक का समावेश है. जिसके चलते अब तक कुल 72 अध्यापक अहिल्या नगर के नवनिर्मित मेडिकल कॉलेज में सेवावर्ग किए जा चुके है.
* संभाजी नगर से सर्वाधिक 32 अध्यापक सेवावर्ग अहिल्या नगर के मेडिकल कॉलेज हेतु सेवावर्ग किए गए अध्यापकों में छत्रपति संभाजी नगर के 32 अध्यापकों का समावेश है. वहीं राज्य के अन्य नये मेडिकल कॉलेजों में अध्यापकों के सैकडों पद रिक्त रहने के बावजूद वहां पर न तो पद भतीर्र् की जा रही है, न ही सेवावर्ग के बारे में कोई विचार भी किया जा रहा है.
* विद्यार्थियों की पढाई पर परिणाम
विदर्भ के नये सरकारी मेडिकल कॉलेजों के कई विभागों में आवश्यक फैकल्टी उपलब्ध नहीं रहने के चलते इसका सीधा परिणाम विद्यार्थियों की पढाई-लिखाई, प्रैक्टीकल व परीक्षा की तैयारी पर पड रहा है. अध्यापकों के बिना मेडिकल की पढाई कैसे पूरी होगी, चिकित्सा संबंधी ज्ञान कैसे मिलेगा और मेडिकल विद्यार्थी भविष्य में सक्षम डॉक्टर कैसे बनेंगे, ऐसा प्रश्न विद्यार्थियों व विभागों द्बारा उपस्थित किया जा रहा है.
– विशेष उल्लेखनीय है कि अमरावती के सरकारी मेडिकल कॉलेज के फामॉकोलोजी विभाग में एक भी अध्यापक उपलब्ध नहीं है. जिसके चलते अब सामने परीक्षा रहने की वजह से विद्यार्थियों में जबर्दस्त चिंता का वातावरण है.
* पहले मेडिकल कॉलेज की जांच पडताल के समय उधारी पर लाए गये प्राध्यापक दिखाकर मान्यता हासिल की जाती थी. अब इसकी बजाय सेवावर्ग यानी डेप्युटेशन करते हुए लगभग वही काम किया जा रहा है. सरकार ने इस व्यवस्था को तुरंत बंद करते हुए डीपीसी के जरिए पदोन्नति व एमपीएससी के मार्फत सीधी भर्ती करते हुए प्राध्यापको के रिक्त पदों को तुरंत भरना चाहिए.
– डॉ. समीर गोलावार, राज्य सचिव
महाराष्ट्र राज्य, वैद्यकीय शिक्षक संगठन