शरद पवार गुट को बड़ा झटका
प्राजक्त तनपुरे बीजेपी में शामिल

* मिली एमएलसी की उम्मीदवारी
अहिल्यानगर/दि.30 – विधान परिषद चुनाव का रणसंग्राम अपने चरम पर पहुंच चुका है. इसी बीच अहिल्यानगर जिले की राजनीति से एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के निष्ठावान नेता और पूर्व राज्यमंत्री प्राजक्त तनपुरे आज (शनिवार) दोपहर 3 बजे मुंबई स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में भारतीय जनता पार्टी में आधिकारिक रूप से प्रवेश कर लिया. खबर है कि, पार्टी ने तनपुरे को अहिल्या नगर एमएलसी सीट से उम्मीदवारी देने का वादा किया है. तनपुरे का प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने भाजपा का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया. राष्ट्रवादी के प्रदेशाध्यक्ष जयंत पाटील के भांजे रहे तनपुरे के इस कदम से शरद पवार गुट को बड़ा झटका लगा है.
प्राजक्त तनपुरे ने कहा कि, मैं आज भाजपा में प्रवेश कर रहा हूं. लेकिन यह निर्णय लेते समय मेरे मामा जयंत पाटील या वरिष्ठ नेता शरद पवार को बताने या उनसे मिलने की हिम्मत मुझमें नहीं है. मेरे विधानसभा क्षेत्र की मौजूदा समस्याओं और लंबित मुद्दों को हल करने के लिए मुझे सत्ताधारी दल में जाने का निर्णय लेना पड़ा. जिन कार्यकर्ताओं के बल पर मैंने अब तक राजनीतिक संघर्ष किया, उनकी भावनाओं और उनके राजनीतिक भविष्य का भी विचार करना आवश्यक है.
* उपचुनाव में अक्षय कर्डिले की की थी मदद
विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही प्राजक्त तनपुरे के भाजपा में जाने की चर्चा शुरू हो गई थी. हाल ही में हुए उपचुनाव में भाजपा की ओर से अक्षय कर्डिले को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पालकमंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने मध्यस्थता की थी. उसी समय तनपुरे का भाजपा प्रवेश और विधान परिषद की उम्मीदवारी पर्दे के पीछे तय हो गई थी. तीन दिन पहले उन्होंने अपने मामा जयंत पाटील की तस्वीर स्टेटस पर लगाकर संकेत दिया था, जबकि शुक्रवार सुबह उनके कार्यालय ने इस खबर की आधिकारिक पुष्टि कर दी. आज उनकी उम्मीदवारी की घोषणा होने की प्रबल संभावना है. आने वाले समय में भाजपा में और कितने नेता शामिल होते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा.
* विखे पिता-पुत्र को करनी होगी राजनीतिक कसरत
प्राजक्त तनपुरे के भाजपा में आने से राहुरी तालुका की राजनीति में बड़ा बदलाव होगा. भाजपा के भीतर अब तनपुरे गुट और कर्डिले गुट के रूप में दो समानांतर शक्ति केंद्र बन जाएंगे. जो नेता कल तक एक-दूसरे के कट्टर राजनीतिक विरोधी थे, वे अब एक ही दल में होंगे, जिससे कार्यकर्ताओं के सामने भी असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है. इन दोनों गुटों को साथ लेकर राहुरी तालुका में पार्टी का काम आगे बढ़ाना पालकमंत्री राधाकृष्ण विखे और पूर्व सांसद सुजय विखे के सामने बड़ी चुनौती होगी. स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं, बाजार समिति और अन्य चुनावों में दोनों नेताओं के कार्यकर्ताओं की महत्वाकांक्षाओं को कैसे संतुलित किया जाए, इसके लिए विखे पिता-पुत्र को राजनीतिक कसरत करनी पड़ेगी.
* नाम वापस लेने के बाद ईडी की क्लीन चिट
राहुरी उपचुनाव में प्राजक्त तनपुरे के नाम वापस लेने से भाजपा उम्मीदवार अक्षय कर्डिले की जीत आसान हो गई थी. उसी समय तनपुरे के भाजपा प्रवेश की चर्चा भी शुरू हो गई थी. इस नाम वापसी के बदले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तनपुरे को विधान परिषद भेजने का आश्वासन दिया था, ऐसा वर्तमान घटनाक्रम से स्पष्ट होता है. तनपुरे के पीछे लगी ईडी की जांच और नाम वापसी के बाद इस मामले में उन्हें मिली क्लीन चिट को भी उनके भाजपा प्रवेश के पीछे का एक कारण माना जा रहा है.





