मेलघाट की डोमा आश्रमशाला में ‘भूत’ नहीं, अफवाह का साया

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने किया दावा

* सामूहिक मानसिक तनाव (मास हिस्टीरिया) की आशंका
* डर के कारण 600 से अधिक विद्यार्थी स्कूल छोड़कर घर लौटे
* अब शुरू हुआ समुपदेशन अभियान
अमरावती/दि.14 – मेलघाट के दूरस्थ डोमा स्थित शासकीय आदिवासी आश्रमशाला में ‘भूत’ होने की अफवाह के चलते सैकड़ों विद्यार्थियों के स्कूल छोड़कर घर लौट जाने की घटना ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है. हालांकि, मामले की जांच और प्रत्यक्ष निरीक्षण के बाद महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (अंनिस) ने स्पष्ट किया है कि आश्रमशाला में किसी भी प्रकार की अलौकिक शक्ति या भूत-प्रेत जैसी घटना का कोई प्रमाण नहीं मिला है. समिति ने इस पूरे घटनाक्रम को अफवाह और संभवतः ‘मास हिस्टीरिया’ यानी सामूहिक मानसिक तनाव से जुड़ा मामला बताया है.
डोमा आश्रमशाला में कुछ छात्राओं के असामान्य व्यवहार के बाद परिसर में भूत होने की चर्चा फैल गई. देखते ही देखते यह अफवाह इतनी तेजी से फैली कि विद्यालय में अध्ययनरत 600 से अधिक विद्यार्थी भयभीत होकर अपने-अपने गांवों की ओर लौट गए. इस घटना से न केवल विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हुआ, बल्कि विद्यार्थियों की शिक्षा भी बाधित होने लगी.
विद्यालय में वर्तमान में 263 लड़के और 345 लड़कियां आवासीय व्यवस्था के तहत शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. अचानक बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने से प्रशासन और शिक्षा विभाग भी सक्रिय हो गया. घटना की जानकारी मिलते ही महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की राज्य कार्यकारिणी सदस्य नंदिनी जाधव (पुणे), रामभाऊ डोंगरे (नागपुर) और प्रवीण देशमुख (मुंबई) ने मेलघाट पहुंचकर स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लिया. समिति के प्रतिनिधियों ने विद्यालय परिसर का निरीक्षण करने के साथ ही प्रभावित छात्राओं, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों से बातचीत की. जांच के बाद समिति ने स्पष्ट किया कि विद्यालय में किसी भी प्रकार की अलौकिक घटना नहीं हुई है और भय का वातावरण अफवाहों के कारण बना है.
* गांव-गांव जाकर किया जा रहा समुपदेशन
अंनिस के कार्यकर्ताओं ने डोमा, पाच डोंगरी, खडीमल, चुनकडी और आसपास के अन्य गांवों में जाकर विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से संवाद शुरू किया है. लगातार बारिश और खराब सड़क परिस्थितियों के बावजूद कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों और उनके परिजनों को समझा रहे हैं कि अफवाहों के कारण शिक्षा बाधित नहीं होनी चाहिए. समिति के अनुसार कई छात्राएं समुपदेशन के बाद दोबारा विद्यालय लौटने के लिए तैयार हो गई हैं. अभिभावकों को भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और अपुष्ट बातों पर विश्वास न करने की सलाह दी जा रही है.
* क्या है ‘मास हिस्टीरिया’ की आशंका?
जानकारी के अनुसार, कुछ दिनों पहले एक छात्रा ने अचानक चीखना, रोना, चुपचाप बैठे रहना और बिना कारण हंसना जैसी गतिविधियां शुरू कर दी थीं. धीरे-धीरे अन्य छात्राओं में भी इसी प्रकार के लक्षण दिखाई देने लगे. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अमरावती से विशेष समुपदेशन दल भी विद्यालय पहुंचा था. हालांकि, टीम को इन व्यवहारों के पीछे कोई स्पष्ट चिकित्सकीय कारण नहीं मिला. विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना ‘मास हिस्टीरिया’ अथवा ‘मास साइकोजेनिक इलनेस’ से जुड़ी हो सकती है, जिसमें भय, तनाव और सामूहिक मानसिक प्रभाव के कारण एक जैसी प्रतिक्रियाएं कई लोगों में दिखाई देने लगती हैं.
* मांत्रिक पूजा की घटना के बाद बढ़ी चर्चा
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पहले एक छात्रा के परिजन उसे सीधे छात्रावास में लेकर आए थे और वहां एक स्थानीय ‘भूमका’ (पारंपरिक पुजारी/मांत्रिक) द्वारा पूजा-अर्चना कराई गई थी. इसके बाद भूत-प्रेत संबंधी चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया और विद्यार्थियों में भय का माहौल बन गया. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं और अफवाहें संवेदनशील आयु वर्ग के बच्चों पर मानसिक प्रभाव डाल सकती हैं, जिससे डर और भ्रम तेजी से फैलता है.
* हम स्वयं रात में स्कूल में रुके, कुछ भी असामान्य नहीं
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की वरिष्ठ कार्यकर्ता नंदिनी जाधव ने कहा कि समिति के सदस्य स्वयं आश्रमशाला में रातभर रुके और उन्हें किसी भी प्रकार की असामान्य या अलौकिक गतिविधि दिखाई नहीं दी. उन्होंने कहा कि बच्चों के मन में बैठी आशंका और भय को दूर करना आवश्यक है. यदि समय रहते समुपदेशन नहीं किया गया तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है.
* शिक्षा बाधित न हो, यही सबसे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस समय सबसे महत्वपूर्ण कार्य विद्यार्थियों का विश्वास बहाल करना और उन्हें दोबारा विद्यालय से जोड़ना है. मेलघाट जैसे आदिवासी और दुर्गम क्षेत्र में पहले से ही शिक्षा की अनेक चुनौतियां हैं. ऐसे में अंधविश्वास और अफवाहों के कारण बच्चों का स्कूल छोड़ना चिंता का विषय है. प्रशासन, शिक्षा विभाग और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से अब विद्यार्थियों को पुनः विद्यालय में लाने तथा वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की दिशा में अभियान चलाया जा रहा है. इससे उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही आश्रमशाला में सामान्य शैक्षणिक वातावरण बहाल हो सकेगा.

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