उच्च शिक्षा के सपनों को डस गया ‘घोणस’
सर्पदंश से होनहार छात्रा दिव्या की मौत

* 10वीं में 79.40 प्रतिशत अंक लाने वाली छात्रा विज्ञान शाखा से कर रही थी पढ़ाई, परिवार और पूरे तांडे में शोक
अकोला/दि.14 – उच्च शिक्षा प्राप्त कर परिवार और समाज का नाम रोशन करने का सपना देखने वाली एक होनहार छात्रा का जीवन एक जहरीले सर्पदंश ने छीन लिया. अकोला जिले के बार्शीटाकली तहसील अंतर्गत चेलका तांडा निवासी 16 वर्षीय दिव्या गजानन राठोड़ की अत्यंत विषैले घोणस (रसेल वाइपर) सांप के काटने से उपचार के दौरान मौत हो गई. इस दर्दनाक घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है.
जानकारी के अनुसार दिव्या राठोड़ अपनी मां के साथ खेत में कृषि कार्य में मदद करने गई थी. इसी दौरान खेत में मौजूद एक घोणस सांप ने उसे डस लिया. सर्पदंश के बाद उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी. परिजन उसे तत्काल उपचार के लिए अकोला के शासकीय सर्वोपचार अस्पताल लेकर पहुंचे. डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन विष का असर अधिक होने के कारण उपचार के दौरान दिव्या ने दम तोड़ दिया. इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है.
दिव्या राठोड़ एक प्रतिभाशाली और मेहनती छात्रा थी. उसने इसी वर्ष छत्रपति शाहू विद्यालय, बोरगली से दसवीं की परीक्षा 79.40 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी. बेहतर भविष्य और उच्च शिक्षा के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उसने प्राचार्य वसंतराव नाईक आडे उच्च माध्यमिक आश्रमशाला, साखरवीरा में विज्ञान शाखा में प्रवेश लिया था. परिवार और शिक्षकों को उससे काफी उम्मीदें थीं. वह आगे चलकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना चाहती थी. लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने उसके सभी सपनों को अधूरा छोड़ दिया.
दिव्या की असामयिक मृत्यु से उसके माता-पिता, परिजनों और मित्रों को गहरा आघात पहुंचा है. चेलका तांडा में शोक का माहौल है. अंतिम विदाई के समय बड़ी संख्या में ग्रामीण, छात्र-छात्राएं और शिक्षक उपस्थित रहे. नम आंखों से लोगों ने दिव्या को श्रद्धांजलि दी.
पिछले कुछ महीनों में विदर्भ क्षेत्र में सर्पदंश की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है. घोणस, मण्यार और नाग जैसे विषैले सर्पों के काटने पर समय पर उपचार नहीं मिलने से जान का खतरा बढ़ जाता है. दिव्या राठोड़ की मौत ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश की गंभीर समस्या को सामने ला दिया है. एक होनहार छात्रा की असमय मौत ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश से बचाव और उपचार व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है.





