मानसून खत्म, बारिश में 44% की कमी, जिले पर सूखे का संकट

30 सितंबर तक औसत 862 मिमी के मुकाबले केवल 483.8 मिमी बारिश

खरीफ फसलें प्रभावित, रबी सीजन पर भी संकट
धामणगांव रेलवे /दि.2– प्रशासनिक नियमों के अनुसार 1 जून से 30 सितंबर तक की अवधि को आधिकारिक मानसून सीजन माना जाता है. 30 सितंबर को इस वर्ष का मानसून सीजन समाप्त हो गया. लेकिन अमरावती जिले में इस बार मानसून ने किसानों को निराश किया. पूरे सीजन में जिले में औसत की तुलना में करीब 44 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. 30 सितंबर के बाद होने वाली बारिश को बेमौसम बारिश के रूप में दर्ज किया जाएगा.
जिले में मानसून के दौरान सामान्य औसत बारिश 862 मिमी है, जबकि इस वर्ष केवल 483.8 मिमी यानी 56.1 प्रतिशत बारिश दर्ज हुई. बारिश की इस भारी कमी का सीधा असर खेती, पेयजल व्यवस्था और भूजल स्तर पर पड़ने की आशंका है. प्रशासन और किसानों के सामने आने वाले दिनों में जलसंकट की चुनौती भी बढ़ सकती है.
* अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश की कमी
इस वर्ष अगस्त महीने में बारिश की सबसे ज्यादा कमी दर्ज की गई. बारिश की कमी के कारण सोयाबीन, कपास और अरहर जैसी प्रमुख खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा है. खेतों में पर्याप्त नमी नहीं रहने के कारण रबी सीजन की बुवाई और उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है. बारिश कम होने से ग्रामीण क्षेत्रों के कई जलस्रोतों में पानी का स्तर भी घट गया है. कुओं और अन्य जलस्रोतों के सूखने से आने वाले महीनों में पेयजल की समस्या बढ़ने की चिंता व्यक्त की जा रही है.
* इन तहसीलों में सबसे कम बारिश
जिले की कई तहसीलों में औसत से काफी कम बारिश दर्ज हुई है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अचलपुर में 47.4 प्रतिशत – 382.2 मिमी, चांदुर बाजार में 50.4 प्रतिशत – 352.6 मिमी, धामणगांव रेलवे में 50.5 प्रतिशत – 704.7 मिमी, तिवसा में 52.3 प्रतिशत – 347.7 मिमी, वरुड में 55.4 प्रतिशत – 433.6 मिमी.
* कई राजस्व मंडलों में भी गंभीर कमी
जिले के कुछ राजस्व मंडलों में बारिश की स्थिति और भी खराब रही. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 26.2 प्रतिशत बारिश के साथ एक राजस्व मंडल में केवल 174.2 मिमी, गौरखेड़ा बाजार में 33.5 प्रतिशत (467.2 मिमी), मंगरूल चव्हाला में 38.6 प्रतिशत (538.9 मिमी) और अमरावती के दाभा/डवरगांव क्षेत्र में 38.9 प्रतिशत (304.4 मिमी) बारिश दर्ज हुई.
* रबी सीजन पर भी मंडरा रहा संकट
मानसून सीजन समाप्त होने के बाद अब किसानों की नजर अक्टूबर में होने वाली बारिश पर है. खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचने के बाद पर्याप्त मिट्टी की नमी नहीं होने से रबी फसलों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है. आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति और जलस्रोतों में उपलब्ध पानी यह तय करेगा कि रबी सीजन में किसानों को कितनी राहत मिल पाती है.

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