डोमा आदिवासी आश्रम शाला में रहस्यमय घटनाओं से हड़कंप

छात्राओं के अचानक रोने-हंसने की घटनाओं से बढ़ी चिंता

* पूर्व विधायक राजकुमार पटेल ने की तत्काल जांच की मांग
* चिकित्सकों को नहीं मिला स्पष्ट कारण, 10 से 12 छात्राओं को परिजनों के सुपुर्द किया गया
अमरावती/चिखलदरा/ दि. 5- मेलघाट के चिखलदरा तहसील स्थित डोमा आदिवासी आश्रम शाला में कुछ छात्राओं के अचानक असामान्य व्यवहार करने की घटनाओं ने प्रशासन, अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है. प्राप्त जानकारी के अनुसार आश्रम शाला की कई छात्राएं अचानक बिना किसी स्पष्ट कारण के जोर-जोर से हंसने, रोने तथा असामान्य व्यवहार करने लगीं. बताया जा रहा है कि एक बार शुरू होने के बाद उनका हंसना या रोना लंबे समय तक नहीं रुक रहा था. घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल प्रशासन ने प्रभावित छात्राओं को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा. हालांकि प्रारंभिक जांच के दौरान चिकित्सक छात्राओं की इस स्थिति का स्पष्ट कारण निर्धारित नहीं कर सके. इसके बाद एहतियातन कुछ छात्राओं को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया.
* 10 से 12 छात्राओं को भेजा गया घर
सूत्रों के अनुसार इस रहस्यमय स्थिति से प्रभावित लगभग 10 से 12 छात्राओं को फिलहाल उनके अभिभावकों के साथ घर भेजा गया है. स्कूल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और स्वास्थ्य विभाग से भी संपर्क में है. इस घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. कुछ स्थानीय लोग इसे रहस्यमय घटना बता रहे हैं, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक जांच आवश्यक है.
* पूर्व विधायक राजकुमार पटेल ने लिया संज्ञान
मामले की जानकारी मिलते ही मेलघाट क्षेत्र के पूर्व विधायक राजकुमार पटेल ने अमरावती स्थित आदिवासी विकास विभाग के कार्यालय पहुंचकर अपर आदिवासी आयुक्त से मुलाकात की और पूरे मामले की तत्काल जांच कराने की मांग की. पूर्व विधायक पटेल ने अधिकारियों को बताया कि आश्रम शाला में घट रही घटनाएं गंभीर हैं और छात्राओं की सुरक्षा तथा स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों की टीम भेजकर वस्तुस्थिति का पता लगाया जाना चाहिए.
* अधिकारियों ने मुख्याध्यापक से ली जानकारी
पूर्व विधायक पटेल की मांग के बाद अपर आदिवासी आयुक्त ने डोमा आश्रम शाला के मुख्याध्यापक से दूरभाष पर संपर्क कर घटना की जानकारी ली. बताया जाता है कि मुख्याध्यापक ने ऐसी घटनाएं होने तथा कुछ छात्राओं को परिजनों के सुपुर्द किए जाने की पुष्टि की है. इसके बाद आदिवासी विकास विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले पर नजर रखना शुरू कर दिया है.
* क्षेत्र में चर्चाओं का दौर
घटना के बाद काटकुंभ-चुरणी और आसपास के क्षेत्र में इस विषय को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है. छात्राओं के व्यवहार में आए अचानक बदलाव के कारणों को लेकर लोगों में उत्सुकता और चिंता दोनों दिखाई दे रही हैं. हालांकि अभी तक किसी भी सरकारी विभाग या चिकित्सा विशेषज्ञ ने इस घटना के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं दिया है. ऐसे में अफवाहों से बचने और तथ्यों के आधार पर जांच पूरी होने का इंतजार करने की अपील की जा रही है.
* विशेषज्ञ जांच की जरूरत
स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि ऐसी घटनाओं के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें स्वास्थ्य संबंधी, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक अथवा अन्य कारक शामिल हो सकते हैं. इसलिए विशेषज्ञ चिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों की टीम द्वारा विस्तृत जांच कराए जाने की आवश्यकता है. फिलहाल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही छात्राओं की इस स्थिति के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा.

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