चार दिन बाद भी एफआयआर नहीं, किसे बचा रहे हो?
डफरीन अग्निकांड पर सुषमा अंधारे का हमला

* स्वास्थ्य आयुक्त के रवैये पर उठाए सवाल, पालकमंत्री के इस्तीफे की मांग
* कंत्राटी नर्सों को नियमित सेवा में लेने का प्रस्ताव, निजी अस्पतालों की भी होगी जांच
अमरावती/दि.27 – डफरीन अस्पताल के एसएनसीयू (नवजात शिशु अतिदक्षता कक्ष) में हुए भीषण अग्निकांड और तीन नवजात शिशुओं की दर्दनाक मौत के मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. उद्धव ठाकरे शिवसेना की उपनेता सुषमा अंधारे ने बुधवार को अमरावती पहुंचकर जिला महिला अस्पताल का दौरा किया और उसके बाद जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कठघरे में खड़ा कर दिया.
जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित बैठक के दौरान अंधारे ने स्वास्थ्य सेवा आयुक्त डॉ. संजय काटकर के रवैये पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि, इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद आखिर इतना एटीट्यूड क्यों? तीन मासूमों की मौत हुई है, फिर भी जवाबदेही से बचने की कोशिश क्यों की जा रही है?उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य आयुक्त से मुलाकात के लिए उन्हें और उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल को लगभग ढाई घंटे तक इंतजार कराया गया तथा लगातार संपर्क में रहने के बावजूद स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई.
* चार दिन बीत गए, एफआयआर अब तक क्यों नहीं?
सुषमा अंधारे ने सबसे बड़ा सवाल यह उठाया कि घटना को चार दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस मामले में अब तक किसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गई. उन्होंने कहा कि यदि जिला शल्य चिकित्सक (सीएस) डॉ. विनोद पवार ने पहले ही अस्पताल के वेंटिलेटर, अग्निशमन व्यवस्था और भवन के स्ट्रक्चरल ऑडिट की मांग करते हुए संबंधित विभागों को पत्र भेजे थे, तो उन पत्रों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अंधारे ने आरोप लगाया कि जिला स्त्री अस्पताल में विभिन्न मरम्मत और सुरक्षा कार्यों के लिए करीब 9 करोड़ रुपये की आवश्यकता होने की जानकारी भी शासन और जिला नियोजन समिति को दी गई थी, लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाते तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर सीएस द्वारा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई? क्या उन पर राजनीतिक दबाव है?
* पालकमंत्री कहां हैं? – सुषमा अंधारे
उद्धव सेना की उपनेता ने जिले के पालकमंत्री की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जिले में इतनी बड़ी दुर्घटना होने के बाद भी पालकमंत्री की सक्रियता दिखाई नहीं दी. अंधारे ने कहा कि जब अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार शिकायतें और मांगें की जा रही थीं, तब जिम्मेदार मंत्री और अधिकारी आखिर क्या कर रहे थे? उन्होंने तीन नवजातों की मौत की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पालकमंत्री के इस्तीफे की मांग भी की.
* सिलर कंपनी के वेंटिलेटरों पर भी उठे सवाल
बैठक के दौरान सुषमा अंधारे और उद्धव सेना के जिला पदाधिकारियों ने उस कंपनी की भूमिका पर भी सवाल उठाए, जिसके वेंटिलेटर अस्पताल में लगाए गए थे. उन्होंने पूछा कि यदि संबंधित कंपनी के उपकरणों में पहले भी तकनीकी खामियों और दुर्घटनाओं की शिकायतें सामने आती रही हैं, तो उस कंपनी पर अब तक कोई एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई?
उद्धव सेना के नेता सुधीर सूर्यवंशी ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा, लेकिन उपकरणों की गुणवत्ता, रखरखाव और खरीद प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच जरूरी है.
* जान जोखिम में डालने वाली नर्सों को मिलेगा सम्मान
बैठक में एक सकारात्मक निर्णय भी सामने आया. जिलाधिकारी ने बताया कि आग लगने के बाद अपनी जान की परवाह किए बिना कई कंत्राटी स्वास्थ्यकर्मियों और नर्सों ने नवजात बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने का साहसिक कार्य किया. प्रशासन अब इन कंत्राटी स्वास्थ्यकर्मियों को नियमित शासकीय सेवा में समायोजित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजने पर विचार कर रहा है. अधिकारियों का मानना है कि इन कर्मचारियों की तत्परता के कारण बड़ी संख्या में नवजात बच्चों की जान बचाई जा सकी.
* निजी अस्पतालों पर भी होगी कार्रवाई
बैठक के दौरान उद्धव सेना के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद जिन नवजातों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, उनमें से कुछ अस्पताल उपचार के लिए परिजनों से शुल्क वसूल रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट घोषणा की है कि इन बच्चों के उपचार का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी. इस पर जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया.
* अस्पताल की बदहाली के सबूत भी दिखाए
सुषमा अंधारे ने जिला प्रशासन को अस्पताल परिसर की कुछ तस्वीरें भी दिखाईं, जिनमें भवन के अंदर पीओपी गिरने जैसी घटनाएं दिखाई दे रही थीं. उन्होंने कहा कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम प्रतीत होता है.





