अब औषध निरीक्षक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक की चर्चा

एमपीएससी ने शुरू की जांच, दर्ज होगा पुलिस मामला

* शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत को लिया पिछे, संदेह गहराया
पुणे/दि.27- देशभर में नीट पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर सवालों के बीच महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की औषध निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर) भर्ती परीक्षा को लेकर भी बड़ा विवाद सामने आया है. हालांकि एमपीएससी ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा का पेपर लीक होने के आरोप फिलहाल प्रमाणित नहीं हुए हैं और मामले में फैलाई गई जानकारी भ्रामक भी हो सकती है. आयोग ने पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है तथा अब इस संबंध में पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.
एमपीएससी के सचिव महेंद्र हरपालकर ने रविवार को मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि आयोग किसी भी परीक्षा से जुड़े आरोपों को अत्यंत गंभीरता से लेता है. मामले में प्राप्त शिकायत, डिजिटल साक्ष्यों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है. सत्य सामने लाने के लिए पुलिस और फॉरेंसिक जांच की मदद ली जाएगी.
* क्या है पूरा मामला?
बता दे कि, एमपीएससी द्वारा 22 मार्च 2026 को राज्य के छह परीक्षा केंद्रों पर औषध निरीक्षक पदों के लिए ऑफलाइन प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की गई थी. परीक्षा के बाद 12 जून को परिणाम घोषित किए गए थे. इसके पश्चात 1 जुलाई से 22 जुलाई तक पात्र अभ्यर्थियों के साक्षात्कार आयोजित किए गए और 22 जुलाई को अंतिम गुणवत्ता सूची प्रकाशित कर दी गई. इसी बीच आयोग को एक ई-मेल प्राप्त हुआ, जिसमें दावा किया गया कि परीक्षा से पहले व्हॉट्सऐप पर प्रश्न और उत्तर वायरल किए गए थे. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कुछ उम्मीदवारों के अंक संदिग्ध तरीके से बढ़े हुए दिखाई देते हैं, जिससे परीक्षा प्रक्रिया पर संदेह उत्पन्न होता है.
* शिकायतकर्ता ने बदला रुख
आयोग ने शिकायत मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति से प्रमाण मांगे. प्रारंभिक तौर पर कुछ डिजिटल सामग्री आयोग को उपलब्ध कराई गई, जिसके आधार पर मामले की जांच शुरू की गई. इसके बाद आयोग ने शिकायतकर्ता तथा उस उम्मीदवार को भी जांच के लिए बुलाया, जिस पर कथित रूप से अनुचित लाभ प्राप्त करने का आरोप लगाया गया था. लेकिन निर्धारित तिथि पर दोनों ही पक्ष जांच के लिए उपस्थित नहीं हुए. इसी दौरान आयोग को एक और ई-मेल प्राप्त हुआ, जिसमें दावा किया गया कि शिकायत केवल भ्रम और विवाद उत्पन्न करने के उद्देश्य से की गई थी. बाद में मूल शिकायतकर्ता की ओर से भी ई-मेल भेजकर यह बताया गया कि अब उसे इस संबंध में कोई शिकायत नहीं है. इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और अधिक उलझा दिया है तथा यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वास्तव में पेपर लीक हुआ था या फिर किसी ने जानबूझकर परीक्षा प्रक्रिया को बदनाम करने का प्रयास किया.
* फॉरेंसिक जांच की तैयारी
एमपीएससी ने कहा है कि शिकायतकर्ता के पीछे हट जाने से जांच समाप्त नहीं होगी. आयोग मामले में प्रस्तुत किए गए व्हॉट्सऐप संदेशों, कॉल रिकॉर्ड्स और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच करवाएगा. इसके लिए पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जाएगी, ताकि साइबर और फॉरेंसिक विशेषज्ञ उपलब्ध सामग्री की सत्यता की जांच कर सकें. आयोग का कहना है कि यदि किसी प्रकार की पेपर लीक, फर्जीवाड़ा या साजिश सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. वहीं यदि झूठी शिकायत कर परीक्षा प्रक्रिया पर संदेह पैदा करने का प्रयास किया गया है, तो उस स्थिति में भी संबंधित लोगों पर कार्रवाई हो सकती है.
* नीट विवाद के बाद बढ़ी संवेदनशीलता
गौरतलब है कि देश में हाल ही में नीट पेपर लीक प्रकरण को लेकर व्यापक आंदोलन, राजनीतिक विवाद और न्यायिक हस्तक्षेप देखने को मिला है. ऐसे माहौल में एमपीएससी की परीक्षा को लेकर उठे आरोपों ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी थी. हालांकि आयोग ने दावा किया है कि अब तक की जांच में पेपर लीक का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है. फिर भी पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने और उम्मीदवारों का विश्वास बनाए रखने के लिए मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है.
* आयोग का संदेश
एमपीएससी ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे अपुष्ट जानकारी और सोशल मीडिया पर वायरल संदेशों पर भरोसा न करें. यदि किसी के पास परीक्षा से संबंधित कोई ठोस जानकारी या प्रमाण हैं तो उन्हें आयोग अथवा संबंधित जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराया जाए. फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजरें पुलिस जांच और डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि औषध निरीक्षक भर्ती परीक्षा में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई थी या यह केवल एक भ्रामक शिकायत का मामला था.

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