ग्राम पंचायत से महानगरपालिका तक दिव्यांगों को नामनिर्देशन से मिले राजनीतिक प्रतिनिधित्व

महाराष्ट्र दिव्यांग राजनीतिक प्रतिनिधित्व अभियान की मांग

 मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन, स्वतंत्र कानूनी प्रावधान की मांग
मोर्शी/दि.6 – महाराष्ट्र के दिव्यांग नागरिकों को स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं की निर्णय प्रक्रिया में उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए राज्य की विभिन्न दिव्यांग संगठनों, संस्थाओं और कार्यकर्ताओं ने ‘महाराष्ट्र दिव्यांग राजनीतिक प्रतिनिधित्व अभियान’ शुरू किया है. अभियान के तहत ग्राम पंचायत से लेकर महानगरपालिका तक उन स्थानीय निकायों में, जहां कोई दिव्यांग व्यक्ति निर्वाचित होकर नहीं पहुंचा है, पात्र दिव्यांग व्यक्ति को नामनिर्देशन अथवा स्वीकृत सदस्य के माध्यम से प्रतिनिधित्व देने के लिए महाराष्ट्र सरकार से आवश्यक कानूनी प्रावधान करने की मांग की गई है.
राष्ट्रीय दिव्यांग विकास महासंघ के अध्यक्ष राजेंद्र देशमुख ने बताया कि इस संबंध में अभियान की राज्य समन्वय समिति की ओर से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपा गया है. उन्होंने कहा कि यह मांग चुनावी आरक्षण की नहीं, बल्कि स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में दिव्यांगों की निर्णय प्रक्रिया में प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र नामनिर्देशन संबंधी कानूनी प्रावधान की है.
गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर 2026 को नागपुर के विधायक निवास में राज्यस्तरीय बैठक आयोजित की गई. बैठक में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से दिव्यांग संगठनों, संस्थाओं और कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधि शामिल हुए. बैठक में दिव्यांगों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, इसके लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया, अन्य राज्यों में किए गए प्रावधान तथा महाराष्ट्र में आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई. इसी बैठक में महाराष्ट्र दिव्यांग राजनीतिक प्रतिनिधित्व अभियान की राज्यस्तरीय समन्वय समिति का गठन किया गया. समिति में अध्यक्ष एवं मुख्य समन्वयक प्रशांत जाधव, कार्यकारी समन्वयक चंपतराव डाकोरे, सचिव सुहास काले, सहसमन्वयक बी. डी. शिंदे, महिला प्रतिनिधि दीपमाला तुपकर, ग्रामीण प्रतिनिधि सुधाकर पिलणुगडे, कानून विषयक समन्वयक राहुल सालवे, अध्ययन एवं नीति समन्वयक अजय पवार तथा संगठन समन्वयक कांता सुतार की जिम्मेदारी तय की गई है.
* मुख्यमंत्री सचिवालय में सौंपा ज्ञापन
राज्यस्तरीय बैठक के बाद अभियान की मांग शासन तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क किया गया. अभियान के अध्यक्ष एवं मुख्य समन्वयक प्रशांत जाधव ने मुख्यमंत्री कार्यालय की सहसचिव आशा पठाण से संपर्क कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने के लिए समय एवं आवश्यक व्यवस्था की मांग की. इसके बाद 3 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सचिवालय, हैदराबाद हाउस, नागपुर में अभियान की राज्यस्तरीय समन्वय समिति की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया. ज्ञापन में मांग की गई है कि ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद, नगर पंचायत, नगर परिषद/नगरपालिका और महानगरपालिका जैसे सभी स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में, जहां कोई दिव्यांग व्यक्ति निर्वाचित होकर नहीं आया है, वहां पात्र दिव्यांग व्यक्ति को नामनिर्देशन अथवा स्वीकृत सदस्य के रूप में प्रतिनिधित्व देने के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधान किया जाए.
* पत्रकार परिषद में रखी अभियान की भूमिका
3 अक्टूबर को नागपुर में पत्रकार परिषद आयोजित कर अभियान की भूमिका स्पष्ट की गई. इस दौरान राज्यस्तरीय समन्वय समिति के गठन, मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन तथा आगे की कानूनी एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से किए जाने वाले प्रयासों की जानकारी दी गई. अभियान में प्रा. जय चव्हाण, मेघा काले, संतोष व्यास, मनोहर यरपुरवाड, सुधीर कडू, श्रीकृष्ण अडसुले, सुरेश माने, मनमोजी भानारकर, चंद्रशेखर सतदेवे, राजू शेरकुरवार, प्रल्हाद चव्हाण, नामदेव बावणे, पांडुरंग मोहोड, बालू मांडवकर, राहुल लेकुरवाले, जयवंत थोरात, मारुति महाकालकर, त्र्यंबक शिंदे, राजेंद्र घाटोले, सोमेश्वर शहाणे, दिगंबर लोणी, गुलाब पंडित, नागनाथ कामजलगे, भोजराज शिंदे, नारायण नवले, राजेश सुकलकर, विलास स. वर, राजेश गोरे, अंकुश राठोड़ तथा राजेंद्र देशमुख सहित विभिन्न संगठनों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधि सहभागी हुए.

Back to top button