विधायक-सांसदों के पत्रों का दो माह में देना होगा जवाब
अधिकारियों के लिए सरकार के नए दिशा-निर्देश

लापरवाही पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
हर माह दो दिन मुलाकात के लिए समय तय
मुंबई/दि.29 – विधायकों और सांसदों के पत्रों की अनदेखी, जवाब देने में देरी तथा जनप्रतिनिधियों से मुलाकात में टालमटोल की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र सरकार ने अधिकारियों के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अब जनप्रतिनिधियों से प्राप्त पत्रों पर तत्काल कार्रवाई कर अधिकतम दो माह के भीतर अंतिम जवाब देना होगा. नियमों या विधायी विशेषाधिकारों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकेगी.
सरकारी कार्यालयों को विधायकों और सांसदों से प्राप्त प्रत्येक पत्र की अलग भौतिक अथवा कंप्यूटरीकृत पंजिका रखनी होगी. पत्र मिलने की तारीख, संबंधित जनप्रतिनिधि का नाम, की गई कार्रवाई तथा अंतरिम या अंतिम जवाब की तारीख दर्ज करनी होगी. कार्यालय प्रमुखों को जनप्रतिनिधियों के पत्राचार की हर तीन माह में समीक्षा भी करनी होगी.
विभाग प्रमुखों और कार्यालय प्रमुखों को प्रत्येक माह के पहले और तीसरे गुरुवार को दो-दो घंटे विधायकों और सांसदों से मुलाकात तथा उनके कामकाज की समीक्षा के लिए आरक्षित रखने होंगे. इस समय की जानकारी संबंधित जनप्रतिनिधियों को पहले से देनी होगी. हालांकि, अत्यावश्यक मामलों में नियमित कार्यालयीन समय में भी मुलाकात की जा सकेगी. भूमिपूजन, उद्घाटन और अन्य सरकारी कार्यक्रमों में संबंधित जनप्रतिनिधियों को नियमानुसार आमंत्रित करने तथा कार्यक्रम पत्रिका और बैठने की व्यवस्था में राजशिष्टाचार का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं, विधानसभा या संसद का अधिवेशन चलने के दौरान स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम आयोजित न करने को भी कहा गया है.
यदि कोई विधायक या सांसद किसी आपराधिक अथवा अन्य मामले में दोषी ठहराया जा चुका है और जांच, सुनवाई, अपील या चुनाव संबंधी प्रक्रिया के लिए सरकारी कार्यालय आता है, तो उसके आने-जाने पर अधिकारियों-कर्मचारियों को खड़े होकर अभिवादन करने की आवश्यकता नहीं होगी. ऐसे मामलों में उसे कानून और परिस्थितियों के अनुसार सामान्य नागरिक की तरह व्यवहार करने का प्रावधान स्पष्ट किया गया है.





