ग्रामीण बाल कलाकारों को भी मिले कला के आधार पर छात्रवृत्ति

भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष सुखदेव पवार की मांग

धामणगांव गढ़ी/दि.15- ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने के लिए बाल कलाकारों को भी उनकी कला के आधार पर शैक्षणिक छात्रवृत्ति दी जानी चाहिए. जिस तरह वरिष्ठ कलाकारों को शासन स्तर पर प्रोत्साहन और सहायता मिलती है, उसी तरह स्कूल में पढ़ने वाले बाल कलाकारों को भी छात्रवृत्ति देकर उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने का अवसर दिया जाए. यह मांग भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अमरावती ग्रामीण जिलाध्यक्ष सुखदेव पवार ने की है.
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में चित्रकला, मूर्तिकला, शिल्पकला, गायन, नृत्य तथा विभिन्न सामाजिक विषयों पर रील बनाने जैसी कलाओं में अनेक बच्चे प्रतिभावान हैं. ऐसे बच्चों की प्रतिभा को केवल मनोरंजन के रूप में न देखते हुए उनके भविष्य को संवारने के लिए शासन को ठोस योजना बनानी चाहिए. सावली दातुरा के विद्यालय में अध्ययनरत बाल कलाकार भावेश निर्मले इसका उदाहरण हैं. कम उम्र में ही भावेश मिट्टी से भगवान श्री गणेश की मूर्तियां बनाने की कला में निपुणता हासिल कर रहे हैं. इसके साथ ही वे मधुर आवाज में भजन भी गाते हैं. विशेष बात यह है कि छोटी उम्र में ही वे अपनी दादी की देखभाल की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं.
सुखदेव पवार ने कहा कि भावेश जैसे ग्रामीण क्षेत्र के बाल कलाकारों को उनकी कला का उचित मूल्य और प्रोत्साहन मिलना चाहिए. शिक्षा विभाग द्वारा ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों के लिए विशेष छात्रवृत्ति मंजूर कर हर महीने उनके बैंक खाते में राशि जमा की जाए, ताकि उनकी पढ़ाई के साथ-साथ कला को विकसित करने में भी आर्थिक मदद मिल सके. उन्होंने कहा कि शासन की ओर से यदि ग्रामीण बाल कलाकारों के लिए ऐसी योजना शुरू की जाती है, तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभावान बच्चों को अपनी कला निखारने और भविष्य में उसे व्यवसाय के रूप में अपनाने का अवसर मिलेगा.

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