मौत के बाद भी नहीं मिली सड़क, खाट पर बांधकर कंधों से ले जाना पड़ा शव

सालईटोला में डेढ़-दो किलोमीटर चिखल-पानी से पैदल चले ग्रामीण

* धानोरा के दुर्गम गांव की तस्वीर ने विकास के दावों पर उठाए सवाल
गड़चिरोली /दि.15 – सड़क नहीं होने की समस्या का दर्द केवल बीमारी और बुढ़ापे तक सीमित नहीं है, बल्कि मौत के बाद भी ग्रामीणों का पीछा नहीं छोड़ रहा. गड़चिरोली जिले के धानोरा तहसील के सालईटोला गांव में एक वृद्ध के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों को खाट का सहारा लेना पड़ा. गांव में पक्की सड़क नहीं होने के कारण शव को खाट पर रस्सी से बांधा गया. इसके बाद दो बांसों की मदद से ग्रामीणों ने खाट को कंधे पर उठाया और चिखल-पानी से भरे रास्ते पर करीब डेढ़ से दो किलोमीटर पैदल चलकर शव को मुख्य सड़क तक पहुंचाया.
सालईटोला की यह तस्वीर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है. सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को जीवन की कठिन परिस्थितियों के साथ-साथ मृत्यु के बाद अंतिम यात्रा के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है. ग्रामीणों के सामने बारिश के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है. कच्चे और कीचड़ भरे रास्ते से वाहन गांव तक पहुंचना मुश्किल होने के कारण बीमारों, बुजुर्गों और अब मृतकों को भी कंधों पर ढोकर मुख्य सड़क तक ले जाने की स्थिति बनती है. स्वतंत्रता के 78 वर्ष बाद भी सालईटोला में सामने आई यह तस्वीर ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर किए जा रहे दावों के सामने एक गंभीर सवाल बनकर खड़ी है.

Back to top button