सचिन अहिर निर्विरोध बने विधान परिषद के उपसभापति

ठाकरे गुट ने अंतिम समय में वापस लिया उम्मीदवार, सर्वसम्मति से हुई नियुक्ति

* शिंदे गुट में शामिल होने के 24 घंटे के भीतर मिला बड़ा संवैधानिक पद
मुंबई/दि.1- महाराष्ट्र की राजनीति में तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता सचिन अहिर को विधान परिषद का नया उपसभापति चुन लिया गया है. बुधवार को हुए चुनाव में उनकी सर्वसम्मति से नियुक्ति हुई. महाविकास आघाड़ी द्वारा उम्मीदवार उतारे जाने के बावजूद अंतिम समय में नामांकन वापस लिए जाने के बाद सचिन अहिर का निर्वाचन निर्विरोध हो गया.
उपसभापति पद के चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा उपमुख्यमंत्री अजित पवार सदन में उपस्थित रहे. उनके निर्वाचन के बाद महायुति खेमे में उत्साह का माहौल दिखाई दिया.
* ठाकरे गुट ने वापस लिया उम्मीदवार
उपसभापति पद के लिए महायुति की ओर से सचिन अहिर और महाविकास आघाड़ी की ओर से जगन्नाथ अभ्यंकर ने नामांकन दाखिल किया था. हालांकि विधान परिषद में महायुति के स्पष्ट बहुमत को देखते हुए परिणाम लगभग तय माना जा रहा था.
चुनाव प्रक्रिया के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रकांत पाटील ने विपक्ष से सर्वसम्मति से चुनाव कराने का आग्रह किया. इसके बाद ठाकरे गुट के नेता अनिल परब ने घोषणा की कि सदन की भावना का सम्मान करते हुए उनकी पार्टी उम्मीदवार का नाम वापस ले रही है. इसके बाद ध्वनिमत से सचिन अहिर को उपसभापति घोषित किया गया.
* फडणवीस ने कहा- निर्भीक और अनुभवी जनप्रतिनिधि हैं अहिर
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सचिन अहिर को बधाई देते हुए कहा कि वे 1999 से उन्हें जानते हैं और उन्होंने हमेशा निर्भीकता तथा स्पष्टता के साथ काम किया है. फडणवीस ने कहा कि उपसभापति का पद निष्पक्षता और संतुलन की मांग करता है तथा उन्हें विश्वास है कि सचिन अहिर सभी दलों के सदस्यों को न्याय देने का कार्य करेंगे. उन्होंने पूर्व उपसभापति नीलम गोर्‍हे के कार्यकाल की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने चुनौतीपूर्ण राजनीतिक परिस्थितियों में भी सदन की गरिमा बनाए रखी.
* 24 घंटे में बदली राजनीतिक तस्वीर
सचिन अहिर के राजनीतिक सफर का यह घटनाक्रम बेहद दिलचस्प माना जा रहा है. मंगलवार को उन्होंने उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थामा था और उसी दिन उपसभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया था. मात्र 24 घंटे के भीतर उन्हें विधान परिषद के उपसभापति जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर निर्विरोध निर्वाचित कर दिया गया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियुक्ति शिंदे गुट की बढ़ती ताकत और महायुति के भीतर उसके राजनीतिक महत्व का स्पष्ट संकेत है.
सचिन अहिर का उपसभापति बनना केवल एक संवैधानिक नियुक्ति नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों का बड़ा संकेत भी माना जा रहा है. हाल के दिनों में ठाकरे गुट के नेताओं और सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की घटनाओं के बीच यह नियुक्ति विपक्ष के लिए एक और राजनीतिक झटका मानी जा रही है. अब राजनीतिक हलकों में चर्चा इस बात की भी है कि क्या आने वाले दिनों में ठाकरे गुट से और नेता शिंदे खेमे की ओर रुख करेंगे या नहीं. फिलहाल सचिन अहिर की निर्विरोध नियुक्ति ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है.

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