जिले में एसआईआर अभियान निर्णायक मोड़ पर

81.66% फॉर्म डिजिटाइज, 2.11 लाख एएसडीडी मतदाताओं ने बढ़ाई चिंता

* अमरावती और बडनेरा में तेज हुई डिजिटाइजेशन की रफ्तार
* 85 हजार मृत, 93 हजार से अधिक स्थायी रूप से स्थानांतरित और 25 हजार डुप्लीकेट मतदाताओं ने बदला पूरा समीकरण
* मतदाता सूची के सबसे बड़े शुद्धिकरण अभियान में दो लाख से अधिक नाम हटने की संभावना
* अंतिम सूची पर टिकी राजनीतिक दलों की नजर
अमरावती/दि.30- निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान ने अमरावती जिले में निर्णायक चरण में प्रवेश कर लिया है. एक ओर जहां जिले में गणना प्रपत्रों का वितरण लगभग शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है और डिजिटाइजेशन का आंकड़ा 81.66 प्रतिशत तक पहुंच गया है, वहीं दूसरी ओर अभियान के दौरान सामने आए 2.11 लाख एएसडीडी (मृत, स्थलांतरीत व डुप्लिकेट तथा अनुपलब्ध) मतदाताओं ने प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर हलचल बढ़ा दी है. चुनाव आयोग की इस व्यापक कवायद के बाद अमरावती जिले की मतदाता सूची से करीब दो लाख नाम कम होने की संभावना जताई जा रही है.
जिले के कुल 25 लाख 45 हजार 677 मतदाताओं में से 25 लाख 42 हजार 851 मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचाए जा चुके हैं, जो 99.89 प्रतिशत वितरण को दर्शाता है. वहीं 20 लाख 78 हजार 745 प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है. यह जिले की कुल मतदाता संख्या का 81.66 प्रतिशत है.
* 2.11 लाख एएसडीडी मतदाता बने सबसे बड़ी चुनौती
एसआईआर अभियान के दौरान बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर किए गए सत्यापन में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जो या तो अब इस दुनिया में नहीं हैं, स्थायी रूप से दूसरे स्थानों पर बस चुके हैं या फिर एक से अधिक स्थानों पर मतदाता के रूप में दर्ज हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले में 85,563 मतदाता मृत पाए गए, 93,526 मतदाता स्थायी रूप से अन्यत्र स्थानांतरित हो चुके हैं, 25,301 मतदाता डुप्लीकेट पाए गए हैं, 6,731 मतदाताओं का कोई पता नहीं चल सका, अन्य कारणों से 646 मामलों की भी पहचान हुई है. कुल मिलाकर 2 लाख 11 हजार से अधिक मतदाता एएसडीडी श्रेणी में आए हैं. यही कारण है कि मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के समय जिले की कुल मतदाता संख्या में भारी कमी आने की संभावना व्यक्त की जा रही है.
* क्या सचमुच दो लाख मतदाता कम हो जाएंगे?
निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निर्णय प्रारूप और अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद ही होगा. हालांकि वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह लगभग स्पष्ट है कि मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं के हजारों नाम सूची से हटाए जाएंगे. यदि ऐसा होता है तो यह अमरावती जिले में पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान साबित हो सकता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता संख्या में संभावित कमी का असर भविष्य के चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है.
* अमरावती और बडनेरा मेें एसआईआर ने पकड़ी रफ्तार
एसआईआर अभियान के शुरुआती चरण में अमरावती और बडनेरा विधानसभा क्षेत्रों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत धीमा माना जा रहा था. लेकिन पिछले पांच दिनों में इन दोनों शहरी क्षेत्रों ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज कर चुनाव आयोग और प्रशासन की उम्मीदें बढ़ा दी हैं. बडनेरा विधानसभा क्षेत्र में डिजिटाइजेशन प्रतिशत 25 जुलाई के 57.04 प्रतिशत से बढ़कर 30 जुलाई को 72.64 प्रतिशत हो गया. यानी केवल पांच दिनों में 15.60 प्रतिशत की छलांग दर्ज की गई. 29 जुलाई से 30 जुलाई के बीच ही बडनेरा में 1.60 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो जिले में सर्वाधिक रही. इसके साथ ही अमरावती विधानसभा क्षेत्र में डिजिटाइजेशन 64.48 प्रतिशत से बढ़कर 72.57 प्रतिशत तक पहुंच गया है. पांच दिनों में यहां 8.09 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. हालांकि दोनों शहरी क्षेत्र अभी भी जिला औसत से नीचे हैं, लेकिन हालिया प्रगति यह संकेत देती है कि प्रशासन ने यहां विशेष अभियान चलाकर लंबित प्रपत्रों के डिजिटाइजेशन को गति दी है.
* जिले का औसत 80 प्रतिशत के पार
जिले में डिजिटाइजेशन का औसत अब 81.66 प्रतिशत तक पहुंच गया है. 25 लाख से अधिक मतदाताओं में से 20.78 लाख प्रपत्र डिजिटल प्रणाली में दर्ज किए जा चुके हैं. मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिहाज से यह महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि अब प्रशासन का फोकस शेष प्रपत्रों के डिजिटाइजेशन और एएसडीडी मामलों के अंतिम सत्यापन पर है.
* मोर्शी और दर्यापुर अभी भी अव्वल
डिजिटाइजेशन के मामले में मोर्शी और दर्यापुर विधानसभा क्षेत्र लगातार जिले में शीर्ष पर बने हुए हैं. मोर्शी में 89.33 फीसद, दर्यापुर में 89.16 फीसद, धामणगांव रेलवे में 85.42 फीसद, अचलपुर में 85.18 फीसद, मेलघाट में 83.39 फीसद, तिवसा मेें 80.18 फीसद, बडनेरा में 72.64 फीसद तथा अमरावती में 72.57 फीसद डिजिटायझेशन हो चुका है. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में डिजिटाइजेशन का कार्य तेजी से आगे बढ़ा है, जबकि शहरी क्षेत्रों में अभी भी अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता है.
* जिलाधिकारी की सख्त मॉनिटरिंग का असर
एसआईआर अभियान की प्रगति में जिलाधिकारी आशीष येरेकर की सक्रिय भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है. प्रतिदिन समीक्षा बैठकें, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बीएलओ से सीधा संवाद तथा विधानसभावार प्रगति की निगरानी के कारण जिले में गणना प्रपत्र वितरण लगभग शत-प्रतिशत स्तर तक पहुंच चुका है. अधिकारियों के अनुसार अब अभियान का सबसे महत्वपूर्ण चरण शेष डिजिटाइजेशन, एएसडीडी मतदाताओं की पुष्टि तथा प्रारूप मतदाता सूची तैयार करने का है.
* राजनीतिक दलों की बढ़ी धड़कनें
एसआईआर अभियान के दौरान सामने आए 2.11 लाख एएसडीडी मतदाताओं के आंकड़ों ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है. यदि इतनी बड़ी संख्या में मतदाता सूची से नाम हटते हैं, तो आगामी चुनावों के मतदान प्रतिशत, बूथवार गणित और निर्वाचन रणनीति पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है. यही कारण है कि अब प्रशासन, राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं की निगाहें निर्वाचन आयोग द्वारा जारी की जाने वाली प्रारूप एवं अंतिम मतदाता सूची पर टिकी हुई हैं. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि अमरावती जिले की मतदाता सूची में कितना बड़ा बदलाव होने जा रहा है और इसका राजनीतिक परिदृश्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा.

Back to top button