राज्य शासन का शालेय शिक्षा में सुधार लाने महत्वपूर्ण निर्णय

शिक्षक, मुख्याध्यापक व पर्यवेक्षकों को हर साल दिया जायेगा 50 घंटे प्रशिक्षण

अमरावती/दि.23– शासन द्बारा राज्य में शिक्षा का दर्जा सुधारने के लिए और शिक्षकों की व्यवसायिक क्षमता बढाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है. जिसमें अब कक्षा 1 ली से 12 वीं तक की सभी शासकीय व निजी अनुदानित शाला के शिक्षक, मुख्याध्यापक व पर्यवेक्षकों को हर साल कम से कम 50 घंटे का सतत व्यवसायिक विकास प्रशिक्षण पूर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है. शिक्षकों को प्रशिक्षण के बाद ही विद्यार्थियों को शिक्षा देनी पडेगी. इसमें विषय शिक्षक, मुख्याध्यापक, उप मुख्याध्यापक का समावेश रहेगा. इस प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षक अध्यापन की नई संकल्पना रख सकेंगे.

50 घंटे का प्रशिक्षण
प्रत्येक शिक्षक को हर साल 50 घंटे का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है. प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद प्रमाणपत्र मिलेगा तथा शाला और शिक्षा विभाग में उनका पंजीयन किया जायेगा.

अनुपस्थित रहने पर कार्रवाई
प्रत्येक शिक्षक को 50 घंटे का प्रशिक्षण हर साल पूरा करना अनिवार्य होगा. प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहनेवाले शिक्षकों पर कार्रवाई की जायेगी.

30 घंटे ऑफलाइन व 20 घंटे ऑनलाइन
कुल 50 घंटों में से 30 घंटे प्रत्यक्ष (ऑफ लाइन ) और 20 घंटे ऑनलाइन सत्र द्बारा प्रशिक्षण पूर्ण करना अनिवार्य है. ऑफ लाइन सत्र जिला, ब्लॉक 2 अंतर्गत प्रशिक्षण दिया जायेगा.

किन शालाओं के लिए बंधनकारक ?
सभी शासकीय शाला और निजी अनुदानित शाालाओं के लिए यह प्रशिक्षण लागू रहेगा. जिसमें इन शालाओं के शिक्षकों को प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा.

इस तरह से की जायेगी देख रेख
प्रशिक्षण के दौरान उपस्थितों का पंजीयन व प्रमाणपत्र की जांच शिक्षा विभाग के डिजिटल पोर्टल पर की जायेगी. प्रत्येक शालाओं को वार्षिक प्रशिक्षण की रिपोर्ट भेजनी होगी. जिला शिक्षाधिकारी व निरीक्षक नियमित ं जांच करेंगे.

* प्रशिक्षण का उद्देश्य और फायदा
उद्देश्य : शिक्षकों के आधुनिक अध्यापन तकनीकी ज्ञान, मूल्यमापन पध्दति, कक्षा व्यवस्थापन, कौशल्य सुधारणा कर शालेय शिक्षा की गुणवत्ता बढेगी.
फायदा : विद्यार्थी- केन्द्रित अध्यापन में वृध्दि होगी. शिक्षा के परिणामों में सुधार होगा, शिक्षकों का व्यवसायिक आत्म विश्वास बढेगा और शाला सुसंगत, शैक्षणिक नीति पर अमल हो सकेगा.

प्रशिक्षकों की होगी बैठक
शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के लिए तज्ञ प्रशिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी जिसमें आनेवाले कुछ दिनों में प्रशिक्षकों की नियोजन बैठक होगी.

प्रशिक्षण के दौरान कौन- कौन से विषयों का समावेश
प्रशिक्षण के दौरान मुख्य विषयों में अध्यापन- पध्दति, विद्यार्थियों का मूल्यांकन, समावेशक शिक्षण, डिजिटल शिक्षण, तकनीकी ज्ञान, कक्षा व्यवस्थापन व मनोविकास का समावेश रहेगा तथा जिलास्तर पर आवश्यकतानुसार स्थानीय मर्यादानुसार अितिरिक्त विषयक कार्यशाला भी आयोजित की जायेगी.

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