विधानपरिषद चुनाव हेतु निकाय निर्वाचन क्षेत्र में वोटों को लेकर माथापच्ची शुरू
पांच स्वायत्त निकायों को छोड भाजपा को कहीं पर भी स्पष्ट बहुमत नहीं

* अमरावती मनपा सहित जिले की चार नगर परिषदों में ही भाजपा के पास बहुमत
* अन्य सभी 10 निकायों में भाजपा के लिए स्थति बेहद जद्दोजहद वाली
अमरावती/दि.14- विधानपरिषद की सीट हेतु अमरावती स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव की घोषणा जल्द होने की पूरी उम्मीद हैं. जिसे ध्यान में रखते हुए इस निर्वाचन के मौजूदा मतदाता की संख्या को लेकर राजनीतिक दलों सहित चुनाव लडने के इच्छूकों द्बारा अभी से ही वोटों को लेकर जमाजोड का अंकगणित लगाना शुरू कर दिया गया हैं. विशेष तौर पर गतरोज दैनिक अमरावती मंडल द्बारा विधानपरिषद के चुनाव को लेकर अमरावती के स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र की स्थिति के संदर्भ में विस्तृत समाचार प्रकाशित किए जाने के बाद यह गतिविधि और भी अधिक तेज हो गई हैं.
बता दें कि इस समय अमरावती महानगरपालिका तथा जिले की 14 नगर परिषदों व नगर पंचायतो की कुल सदस्य संख्या 453 जिनके पास स्थानीय स्वायत्त निकाय निवार्चन क्षेत्र में विधान परिषद की सीट हेतु वोट डालने का अधिकार होता हैं. जिसमें अकेले भाजपा के पास ही 150 सदस्यों के वोट हैं. साथ ही साथ महायुति में शामिल शिंदे सेना के पास 18, अजीत पवार गुट वाली राकांपा के पास 33 एवं युवा स्वाभिमान पार्टी के पास 26 वोट हैं. जिसके चलते महायुति के पास 227 वोटों का गणित पूरी तरह से फिट हैं. जिसे ध्यान में रखते हुए इस समय भाजपा और महायुति का पलडा भारी माना जा रहा हैं. साथ ही यह उम्मीद भी जताई जा रही हैं कि अब पूर्व मंत्री बच्चू कडू के शिंदे सेना में शामिल हो जाने के चलते प्रहार पार्टी के 21 पार्षदों के वोट भी भाजपा व महायुति को मिल सकते हैं. जिसके चलते भाजपा के पास 248 वोट माने जा रहे हैं. परंतु भाजपा के लिए विधान परिषद का रास्ता इतना आसान भी नहीं रहनेवाला हैं. क्योंकि अमरावती मनपा के साथ ही जिले की केवल चार नगर परिषद भी ऐसी है, जहां पर भाजपा के पास बहुमत हैं, वहीं शेष 10 नगर परिषदों व नगर पंचायतों में भाजपा के लिए काफी हद तक जद्दोजहद वाली स्थिति हैं. ऐसे में यह देखना दिलचस्प हो सकता है कि जिले के किन किन निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा अपना दबदबा कायम रख सकती हैं.
यदि जिले के सभी स्वायत्त निकायों में पक्षीय बलाबल का भाजपा के लिहाज से ही विचार किया जाए तो पता चलता है कि भाजपा की स्थिति अमरावती महानगरपालिका सहित धामणगांव रेलवे, चांदूर रेलवे, वरूड एवं शेंदूरजना घाट नगर परिषदों में काफी जबरदस्त हैं. 95 सदस्यीय अमरावती महानगरपालिका में भाजपा के पास 27 सदस्य हैं. वहीं 22 सदस्यीय धामणगांव रेलवे नगर परिषद ने भाजपा ने क्लिन स्वीप करते हुए सभी सीटों पर अपना दबदबा कायम किया हैं और धामणगांव रेलवे में भाजपा का ही नगराध्यक्ष हैं. इसके साथ ही चांदूर रेलवे नगर परिषद में भी भाजपा के पास सर्वाधिक 12 सदस्य हैं. जहां पर कांग्रेस मात्र 4 सीटों के साथ अल्पमत में हैं. वहीं चांदूर रेलवे नप में आपले चांदूर पैनल ने नगराध्यक्ष पद सहित 6 सीटों पर चुनाव जीता था और 2 सीटों पर निर्दलीयों की जीत हुई थी. ऐसे में कयास लगाए जा रहे है कि वोटों के जमाजोड ने माहीर भाजपा द्बारा चांदूर रेलवे नप में स्थिति को बडी आसानी के साथ अपने पक्ष में किया जा सकता हैं. हालांकि भाजपा के लिए ऐसा करना उतना आसान भी नहीं रहेगा. इसके अलावा 26 सदस्यीय वरूड नगर परिषद में नगराध्यक्ष पद सहित कुल 22 सीटों पर भाजपा का कब्जा है. साथ ही साथ 20 सदस्यीय शेंदूरजना घाट नगर परिषद में भी नगराध्यक्ष पद सहित सर्वाधिक 13 सीटें भाजपा के ही पास हैं, जिसके चलते इन सभी निर्वाचन क्षेत्र में फिलहाल भाजपा का अच्छा खासा दबदबा दिखाई दे रहा हैं.
इसके साथ ही खास बात यह है कि जिन स्थानीय स्वायत्त निकाय निवार्चन क्षेत्र में भाजपा की स्थिति मजबुत हैं, उन निकायों में महायुति में शामिल घटक दलों का प्रदर्शन भी बेहद शानदार रहा. जहां अमरावती महानगरपालिका में महायुति के घटक दल युवा स्वाभिमान पार्टी ने 16, अजित पवार गुटवाली राकांपा ने 12 व शिंदे गुटवाली शिवसेना ने 3 सीटे जिती थी और अमरावती महानगरपालिका में महायुति के पास सीधे तौर पर 58 वोटों का स्पष्ट बहुमत है. वहीं धामणगांव रेलवे में भाजपा द्बारा क्लिन स्वीप करते हुए पालिका चुनाव को जीता गया था. जिसके चलते भाजपा के सामने धामाणगांव रेलवे विपक्ष की कोई चुनौती ही नहीं हैं. इसके अलावा वरूड नगर परिषद में नगराध्यक्ष पद सहित भाजपा के पास 22 सीटे हैं. साथ ही वरूड नप में अजीत पवार गुटवाली राकांपा के 4 व प्रहार पार्टी के एक सदस्य हैं. जिसके चलते वरूड नप में भी भाजपा लगभग एकतरफा बहुमत वाली स्थिति में हैं. जहां विपक्ष के तौर पर कांग्रेस के पास केवल 2 सीटे लगभग ऐसी ही स्थिति शेंदूरजना घाट नगर परिषद में भी हैं. जहां पर नगराध्यक्ष पद सहित भाजपा के पास 13 सीटे हैं. वहीं महायुति में शामिल शिंदे सेना ने 2 व अजीत पवार गुटवाली राकांपा ने 7 सीटे जिती हैं. जबकी एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी विजयी हुआ हैं. जिसके चलते शे. घाट नप में भी भाजपा व महायुति के सामने विपक्ष नहीं हैं.
उपरोक्त आंकडो व स्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है कि जिले के 14 में से 5 स्थानीय स्वायत्त निकायों में विधानपरिषद चुनाव हेतु भाजपा के लिए इस समय स्थिति बेहद अनुकूल हैं. जहां पर भाजपा सहित महायुति के पास स्पष्ट बहुमत हैं. परंतु इसके साथ ही इस तथ्य की अनदेखी भी नहीं की जा सकती कि जिले में कुल 15 स्थानीय स्वायत्त निकाय संस्थाएं हैं. जिसमें से केवल पांच निकायों में ही भाजपा के पास बहुमत हैं. वहीं इन निकायों में अन्य दलों के भी कुछ सदस्य निर्वाचित हैं और इसके अलावा जिले के अन्य 10 स्वायत्त निकायों में भाजपा बहुमत वाली स्थिति में नहीं है बल्कि वहां पर भाजपा विरोधी दलों का दबदबा हैं, जिसके चलते उन 10 निकायों में भाजपा के लिए विधानपरिषद चुनाव की राह आसान भी नहीं हैं, क्योंकि उन निकायों में भाजपा व महायुति तथा कांग्रेस व महाविकास आघाडी के बीच काटे की टक्कर वाले रोचक मुकाबले वाली स्थिति हैं. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि उन स्वायत्त निकायों में भाजपा द्बारा विपक्ष की चुनौती को कैसे पार किया जा सकता हैं.





