अमरावती पहुंची पूज्य माता साहिब हसी देवीजी की स्वर्ण प्रतिमा
भक्तों ने किया भव्य स्वागत

* 200 वे जन्मोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में पहली बार हुए दर्शन
* गुलाब की पंखुडियों की वर्षा और आरती से गूंजा शदाणी दरबार
अमरावती /दि.4- पूज्य शदाणी दरबार तीर्थ के पंचम पीठाधीश्वर परम पुजनीय माता साहिब हसी देवीजी के 200 वे जन्मोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में शुक्रवार 3 जुलाई को अमरावती में ऐतिहासिक एवं भक्तिमय वातावरण देखने को मिला. पूज्य शदाणी दरबार के वर्तमान नवम पीठाधीश्वर पूज्य संत डॉ. युधिष्ठिर लालजी महाराज की प्रेरणा एवं पावन आज्ञा से निर्मित पूज्य माता साहिब हसी देवीजी की दिव्य स्वर्ण प्रतिमा पहली बार अमरावती पहुंची. जहां श्रध्दालुओं ने भव्य स्वागत किया.
शाम करीब 7 बजे जैसे ही स्वर्ण प्रतिमा शदाणी दरबार परिसर पहुंची, पूरा परिसर श्रध्दालूओं के जयघोष से गूंज उठा. महिलाओं ने जयघोष से गूंज उठा. महिलाओं ने पीले परिधान धारण कर तथा माथे पर जय जय शदा राम की पट्टी बांधकर अपनी आस्था प्रकट की. बडी संख्या में महिला-पुरूष श्रध्दालु प्रतिमा के प्रथम दर्शन के लिए उपस्थित रहे.
स्वर्ण प्रतिमा का स्वागत गुलाब की पंखडियों की वर्षा ,आतिशबाजी और जयघोष के बीच किया गया. श्रध्दालूओं ने भाव-विभोर होकर माता साहिब के दर्शन किए. यह पहला अवसर था जब पूज्य संत डॉ. युधिष्ठिर लालजी महाराज के मार्गदर्शन में निर्मित स्वर्ण प्रतिमा के दर्शन अमरावती के श्रध्दालूओं को प्राप्त हुए. स्वागत समारोह के बाद शदाणी दरबार में मदाहा साहब का पाठ किया गया. जिसमें पूज्य माता साहिब हसी देवी जी की महिमा का गुणगान किया गया. इसके पश्चात भव्य आरती संपन्न हुई. कार्यक्रम का समापन पर महाप्रसाद का आयोजन किया गया. जिसमें बडी संख्या में समाजबंधुओें और श्रध्दालूओं ने प्रसाद ग्रहण किया. आयोजकों ने बताया कि अमरावती से स्वर्ण प्रतिमा नागपुर, दुर्ग-भिलाई और राजनांदगांव होते हुए अंतत:शदाणी दरबार तीर्थ रायपुर पहुंचेगी. जहां विधि-विधान के साथ इसकी स्थापना की जाएगी. इस यात्रा के दौरान विभिन्न शहरों के श्रध्दालूओं को भी माता साहिब के दिव्य दर्शन का अवसर मिलेगा. पूरे आयोजन को सफल बनाने में शदाणी दरबार अमरावती की समस्त संगत का विशेष योगदान रहा. श्रध्दालूओं ने इसे अपने जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव बताया.





