काटोल एसबीएल फैक्ट्री विस्फोट मामले की जांच हेतु उच्च स्तरीय समिति

हाईकोर्ट ने 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपने का दिया निर्देश

नागपुर/दि.4– केंद्र सरकार ने काटोल स्थित एसबीएल फैक्ट्री में हुए घातक विस्फोट की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. इस हादसे में 26 से अधिक मजदूरों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे. विस्फोटक अधिनियम, 1884 की धारा 9- के तहत तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित कर घटना की विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाएगी. यह निर्णय हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के बाद लिया गया. कोर्ट ने समिति को 15 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. इस कदम से क्षेत्र के सबसे बड़े औद्योगिक हादसों में से एक की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच सुनिश्चित होने की उम्मीद है.
इससे पहले सुनवाई के दौरान उप सॉलिसिटर जनरल एडवोकेट कार्तिक शुकुल ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने विस्फोट की विशेषज्ञ जांच कराने का फैसला किया है. यह जनहित याचिका जम्मू आनंद द्वारा एडवोकेट अरविंद वाघमारे के माध्यम से दायर की गई थी, जिसमें त्रासदी की उचित जांच की मांग की गई थी. केंद्र सरकार द्वारा गठित समिति की अध्यक्षता डॉ. संजना शर्मा, जॉइंट चीफ कंट्रोलर ऑफ एक्सप्लोसिव्स करेंगी. अन्य सदस्य नागपुर के सेवानिवृत्त जॉइंट चीफ कंट्रोलर ऑफ एक्सप्लोसिव्स वी.बी. बोरकर और आगरा के एस.के. दीक्षित हैं. समिति को विस्फोट के सभी पहलुओं की जांच कर कारण पता लगाने और आपदा का कारण बनी चूक की पहचान करने को कहा गया है.
एडवोकेट अरविंद वाघमारे ने तर्क दिया कि जिला कलेक्टर द्वारा पहले आदेशित जांच केवल एक सामान्य जांच थी और हादसे की गंभीरता को देखते हुए पर्याप्त नहीं थी. उन्होंने कहा कि ऐसे घातक हादसों में धारा 9- के तहत जांच में चीफ कंट्रोलर ऑफ एक्सप्लोसिव्स और तकनीकी विशेषज्ञों की भागीदारी जरूरी है. शुक्रवार को कंट्रोलर ऑफ एक्सप्लोसिव्स मनोज दुधे ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र दाखिल कर पुष्टि की कि केंद्र सरकार ने संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत जांच शुरू कर दी है.

 

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