‘जय हरि विठ्ठल’ के उद्घोष से गूंजी इंग्लैंड की धरती
लंदन की सडकों पर साकार हुआ ‘रिंगण समारोह’

* विंडसर से 6 जून को रवाना हुई ‘ग्लोबल वारी’
* 50 दिनों की यात्रा के बाद 1 जुलाई को होगा भारत आगमन
* 11 देशों की यात्रा करते हुए पंढरपुर पहुंचेंगे विठ्ठल भक्त
* 5 से 18 जुलाई तक आलंदी-पंढरपुर की पैदलवारी
* 25 जुलाई को जत्थे की होगी इंग्लैंड वापसी
लंदन /दि.10– आगामी जुलाई माह में बनाए जानेवाले एकादशी के पर्व निमित्त जहां महाराष्ट्र सहित भारत के कोने-कोने से विठ्ठल भक्तों द्बारा पंढरपुरवारी का नियोजन किया जा रहा है. वहीं अपनी नौकरी सहित कामकाज के निमित्त बरसों पहले भारत से ‘लंदनवारी’ कर चुके भारतीय मूल के विठ्ठल भक्तों द्बारा इस वर्ष लंदन से पंढरपुर की वारी करने का निर्णय लिया गया है. जिसके तहत पहली बार लंदन से पंढरपुर तक ग्लोबर वारी का नियोजन करते हुए विगत 6 जून को लंदन के विंडसर परिसर से पूरे भक्तिभाव के साथ भगवान श्री विठ्ठल रूक्मिणी की पालखी को लेकर भाविकों का एक जत्था पंढरपुर हेतु रवाना हुआ. जिसके चलते विंडसर सहित लंदन की सडकों पर ‘जय जय रामकृष्ण हरि’ के जयघोष के साथ ही ढोल-ताशे एवं ताल-मृदंग जैसे पारंपरिक भारतीय वाद्यों की थाप के बीच ‘जय हरि विठ्ठल, ज्ञानबा तुकाराम’ के उद्घोष भी गूंजे. जिसके चलते विंडसर एवं लंदन की सडकों पर वातावरण पूरी तरह से भक्तिपूर्ण एवं भगवामय हो गया था.
मूलत: अमरावती से वास्ता रखनेवाले एवं करीब तीन दशक पहले अपने कामकाज के चलते इंग्लैंड जाकर बसे गिरीशचंद्र दुबे ने इस संदर्भ में दैनिक अमरावती मंडल के साथ आयोजन के छायाचित्र व जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस वर्ष आषाढी एकादशी पर लंदन से पंढरपुर तक विठु माउली की पालखी ले जाने हेतु ग्लोबल दिंडी का आयोजन करने की संकल्पना इंग्लैंड में रहनेवाले अनिल खेडकर नामक विठ्ठल भक्त द्बारा सामने रखी गई थी. जिसे इंग्लैंड में रहनेवाले भारतीय मूल के लोगों की ओर से जबर्दस्त प्रतिसाद मिला और देखते ही देखते इस आयोजन के साथ लंदन सहित विंडसर एवं स्लॉ के साथ-साथ आसपास के अन्य शहरों में रहनेवाले भारतीय मूल के परिवार जुडते चले गये. जिसके बाद ग्लोबल दिंडी के आयोजन की रूपरेखा तय करने के साथ ही तमाम तैयारियां पूरी की गई. जिसके उपरांत विगत 6 जून को लंदन के विंडसर परिसर में इंग्लैंडवासी भारतीय समुदाय के लोगों ने इकट्ठा होकर पालखी प्रस्थान एवं रिंगण समारोह का आयोजन किया. यह भारत से बाहर किसी भी विदेशी सरजमीन पर आयोजित होनेवाला पहला रिंगण समारोह रहा.
इसके साथ ही इस आयोजन की विस्तृत जानकारी देते हुए गिरीशचंद्र दुबे ने बताया कि विगत 6 जून को विंडसर में आयोजित पालखी प्रस्थान व रिंगण समारोह में 109 ढोल, 50 से 50 ताशे सहित अनेकों लेझीम व झांज पथक शामिल हुए थे. साथ ही साथ इस आयोजन में 250 के आसपास इंग्लैंडवासी भाारतीय परिवारों में हिस्सा लिया. आयोजन में शामिल सभी लोग पारंपरिक भारतीय परिधानों, विशेषकर महाराष्ट्रीय व वारकरी परिधानों में सजे हुए थे तथा पूरे परिसर में जबर्दस्त तरीके से भगवाध्वज लहराए जा रहे थे. जिसके चलते विंडसर की सडकों पर देहूं, आलंदी व पंढरपुर जैसे दृश्य साकार होते दिखाई दे रहे थे.
उपरोक्त जानकारी के साथ ही गिरीशचंद्र दुबे ने बताया कि विगत 6 जून को लंदन का विंडसर से पंढरपुर हेतु रवाना हुई यह ग्लोबल दिंडी अगले 50 दिनों के दौरान 11 देशों की यात्रा करते हुए सैकडों भक्तों के साथ आषाढी एकादशी वाले दिन पंढरपुर पहुंचेगी. इस दौरान यह ग्लोबल दिंडी नीदरलैंड, बेलजियम, फ्रांस, लक्समबर्ग, जर्मनी, पोलैंड, झेक रिपब्लिक, हंगरी, तुर्की व जॉर्जिया होते हुए 1 जुलाई को मुंबई पहुंचेगी. मुंबई के जरिए भारत आगमन होने के उपरांत यह ग्लोबल दिंडी 3 जुलाई को पुणे, 4 जुलाई को देहू व 5 जुलाई को आलंदी होते हुए 5 जुलाई से 18 जुलाई के दौरान आलंदी से पंढरपुर की पैदलवारी करेगी तथा आषाढी पर्व निमित्त भक्त वत्सल भगवान श्री विठ्ठल रूक्मिणी के दर्शन करने के उपरांत 24 जुलाई की वापसी की यात्रा शुरू करते हुए 25 जुलाई को इंग्लैंड वापिस पहुंचेगी.
बता दे कि प्रतिवर्ष आषाढी यात्रा हेतु देहूं व आलंदी सहित विविध स्थानों से संतों की पालखियां पंढरपुर पहुंचती है. परंतु इस वर्ष लंदन से पंढरपुर में विठ्ठल भक्तों की दिंडी आनेवाली है. यह अपनी तरह की पहली ग्लोबल दिंडी है. भगवान श्री विठ्ठल के भक्त जिस तरह से भारत में हैं, उसी तरह से अब सात समंदर पार भी भगवान श्री विठ्ठल के भाविक भक्त रहते हैं. यह बात स्पष्ट हो गई है. यही वजह है कि अब संतों की पालखी के साथ-साथ लंदन से विठ्ठल भक्तों की पालखी भी आषाढी एकादशी की यात्रा हेतु पंढरपुर आनेवाली है. जिसके चलते विठ्ठल भक्तों में जबर्दस्त उत्साह है और दिंडी के स्वागत की भी अच्छी खासी तैयारियां चल रही है.





